NAFLD: शराब न पीने वालों में भी फैटी लिवर क्यों होता है? जानिए कारण और लक्षण

Fatty Liver in Non Drinker: फैटी लिवर उन लोगों में भी हो जाता है, जो लोग शराब नहीं पीते हैं और इस लेख में हम एक्सपर्ट्स से यही जानेंगे कि आखिर शराब न पीने वाले लोगों में भी फैटी लिवर क्यों हो जाता है और इसे कैसे कंट्रोल करें।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : April 11, 2026 1:49 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Shoolpani Mishra

Fatty Liver Problems in Non Drinker People: फैटी लिवर सिर्फ शराब पीने वाले लोगों को ही नहीं होता है, बल्कि जो लोग शराब का सेवन नहीं करते हैं उन्हें भी फैटी लिवर की समस्या हो सकती है। फैटी लिवर की समस्या को अक्सर शराब के सेवन से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन आजकल बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी इस बीमारी से प्रभावित हो रहे हैं जो शराब नहीं पीते। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता है। यह समस्या धीरे-धीरे विकसित होती है और यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। आज के समय में भी ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि फैटी लिवर सिर्फ शराब पीने वाले लोगों को ही होता है। गोरखपुर के रिजेंसी हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी डिपार्टमेंट में एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. शूलपाणि मिश्रा ने इस बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जिनके बारे में हम इस लेख में जानेंगे।

बिना शराब पीए भी फैटी लिवर क्यों हो जाता है?

शराब न पीने वाले लोगों में फैटी लिवर होने का सबसे बड़ा कारण उनका बैड लाइफस्टाइल है। आजकल जंक फूड, तला-भुना और अधिक कैलोरी वाला भोजन हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। इससे शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होने लगता है, जो धीरे-धीरे लिवर में भी इकट्ठा हो जाता है। इसके अलावा, मोटापा इस समस्या का एक प्रमुख कारण है। जिन लोगों का वजन अधिक होता है, उनमें लिवर में चर्बी जमा होने का खतरा ज्यादा रहता है।

डायबिटीज, खासकर टाइप-2 डायबिटीज, और शरीर में बढ़ता इंसुलिन रेजिस्टेंस भी फैटी लिवर के जोखिम को बढ़ाते हैं। कम शारीरिक गतिविधि, यानी नियमित एक्सरसाइज की कमी, लंबे समय तक बैठकर काम करना और तनावपूर्ण जीवनशैली भी लिवर की सेहत पर नकारात्मक असर डालती है। इसके अलावा, कुछ मामलों में जेनेटिक कारण, हार्मोनल बदलाव और कुछ दवाइयों का लंबे समय तक सेवन भी नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) के विकास में योगदान दे सकते हैं।

(और पढ़ें - नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज की पहचान कैसे करें)

नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर के लक्षण

फैटी लिवर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, इसलिए कई बार लोगों को इसका पता ही नहीं चल पाता। जैसे-जैसे समस्या बढ़ती है इसके कुछ लक्षण धीरे-धीरे विकसित होने लगते हैं जैसे -

  • लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना
  • पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में हल्का दर्द या भारीपन
  • भूख कम लगना
  • वजन का अचानक बढ़ना या घटना
  • बार-बार गैस बनना, अपच या पेट फूलना
  • गंभीर स्थिति में लिवर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) हो सकती है, जिसे नजरअंदाज करने पर लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर से बचाव

कुछ सामान्य चीजों का ध्यान रख कर ही नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज होने से बचाव किया जा सकता है और ये सामान्य चीजें कुछ इस प्रकार हैं -

  • संतुलित आहार लें, जिसमें हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल हों।
  • तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं।
  • रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉकिंग, योग या हल्की एक्सरसाइज करें और वजन को नियंत्रित रखें।
  • साथ ही, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराते रहें।

समय रहते खानपान और दिनचर्या में सुधार कर लिया जाए, तो नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) को शुरुआती चरण में ही रिवर्स किया जा सकता है।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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