
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : July 27, 2022 2:39 PM IST
मंकीपॉक्स 1958 में लैब के कई बंदरों में पाया गया था और उसी के आधार पर इसका नाम पड़ा था। यह एक जूनोटिक वायरल संक्रमण है, जिसका मतलब है कि यह जानवरों से मनुष्यों में भी फैल सकता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है। हालांकि, मनुष्यों में यह पहली बार यह 1970 में कांगो देश के एक 9 महीने के बच्चे में पाया गया था। कांगो में चेचक (मंकीपॉक्स का करीबी वायरस) 1968 में खत्म हो चुका था। मंकीपॉक्स के लक्षण आमतौर पर इससे पहले चेचक में हुए लक्षणों के साथ मिलते-जुलते हैं, जो 1980 में पूरी दुनिया से खत्म कर दिया गया था। 2003 में पहली बार मंकीपॉक्स का प्रकोप अफ्रीका के बाहर अमेरिका में देखा गया था और यह मामला संक्रमित प्रैरी डॉग के पालने से जुड़ा था। प्रैरी डॉग एक खास प्रकार का रोडेंट है, जो चूहों और गिलहरी की श्रेणी में आता है। ज्यादातर जानवर मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमित होने के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं और फिर उनसे मनुष्यों में फैल जाता है। इन जानवरों में प्रमुख रूप से रोडेंट ही आते हैं जैसे चूहे व गिलहरी आदि।
किसी व्यक्ति को बुखार, गंभीर सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, पीठ में दर्द, ऊर्जा की कमी महसूस होना, लिम्फ नोड्स में सूजन और त्वचा पर चकत्ते व घाव होना आदि मंकीपॉक्स से सबसे आम लक्षण होते हैं। किसी व्यक्ति के मंकीपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति को बुखार होने के एक या तीन दिन के भीतर त्वचा पर चकत्तों के लक्षण दिखने लग जाते हैं। त्वचा पर होने वाले घाव आमतौर पर सपाट या पहले से थोड़े उभरे हुए हो सकते हैं और ये घाव साफ या हल्के पीले रंग के द्रव से भरे हो सकते हैं। धीरे-धीरे इन घावों के ऊपर से पपड़ी बन जाती है, जो धीरे-धीरे सूख कर गिर जाती है।
त्वचा पर बनने वाले घावों की संख्या हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है और इनकी संख्या एक-दो से लेकर हजारों तक जा सकती है। मंकीपॉक्स से ग्रसित व्यक्ति की त्वचा पर चकत्ते शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह चेहरे, हथेली और पैर के तलवों पर देखे जाते हैं। वहीं कुछ मामलों में मरीजों को ये मुंह, जननांगों और आंखों पर भी देखे जा सकते हैं।
मंकीपॉक्स वायरस किसी स्वस्थ व्यक्ति में तब फैलता है, जब वह किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आता है जिसमें मंकीपॉक्स के लक्षण दिख रहे हैं। संक्रमित व्यक्ति की त्वचा पर बनने वाले चकत्ते, उनसे निकलने वाला पस, खून व अन्य शरीर के द्रव आदि में मंकीपॉक्स वायरस होता है और इनके संपर्क में आने से दूसरे व्यक्ति संक्रमित हो सकते हैं।
संक्रमित व्यक्ति के छाले व घाव भी संक्रामक हो सकते हैं, क्योंकि मंकीपॉक्स वायरस लार के माध्यम से भी पैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की गई किसी वस्तु का इस्तेमाल करना भी संक्रमित बना सकता है। इन वस्तुओं में प्रमुख रूप से तौलिए, चादर, टूथब्रश और बर्तन आदि शामिल हैं।
मंकीपॉक्स से ग्रसित व्यक्ति तब तक संक्रामक रहते हैं, जब तक उनमें लक्षण दिख रहे होते हैं और यह अवधि आमतौर पर एक से चार हफ्तों तक हो सकती है। हालांकि, अभी इस बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाई है कि जिन लोगों में मंकीपॉक्स के लक्षण नहीं हैं, वे दूसरों में यह संक्रमण फैला रहे हैं या नहीं।
जब किसी व्यक्ति का शरीर मंकीपॉक्स से संक्रमित किसी जानवर के संपर्क में आता है, तो वह मंकीपॉक्स से संक्रमित हो जाता है। इन में प्रमुख रूप से रोडेंट (चूहे व गिलहरी) आदि व प्राइमेट्स (बंदर आदि) शामिल हैं। इसलिए असुरक्षित रूप से बीमार और मृत जानवरों के संपर्क में न आना ही मात्रा मनुष्यों में मंकीपॉक्स को फैलने से बचा सकता है। असुरक्षित रूप से संपर्क में आने का मतलब उनके मांस, खून व अन्य शारीरिक द्रवों के संपर्क में आना होता है।
इसलिए खासतौर पर जहां मंकीपॉक्स स्थानिक बीमारी है, वहां कोई भी ऐसा खाद्य पदार्थ खाना जिसमें जानवरों का मांस या उनके शरीर का अन्य कोई हिस्सा है, मंकीपॉक्स होने के खतरे को काफी हद तक बढ़ा सकता है।
मंकीपॉक्स एक ऐसा वायरल इंफेक्शन है, जो आमतौर पर बिना इलाज के अपने आप ही ठीक हो जाता है और इसलिए ऐसे मामलों में इलाज की आवश्यकता ही नहीं पड़ती है। हालांकि, इसके कारण त्वचा पर बनने वाले चकत्तों की पूरी तरह से देखभाल करना बेहद जरूरी है। संभव हो तो त्वचा के चकत्तों व घावों को ढक कर रखें।
मुंह या आंख पर बने किसी भी घाव या छाले को छूएं नहीं और ऐसे स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेकर माउथवॉश और आई ड्रॉप का इस्तेमाल करें। हालांकि, कोर्टिसोन युक्त दवाओं व प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि, मंकीपॉक्स के प्रति रोकथाम के लिए स्मॉलपॉक्स की कुछ वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, एमवीएन-बीएन शामिल हैं। हालांकि, अभी यह वैक्सीन व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है और विश्व स्वास्थ्य संगठन वैक्सीन निर्माता कंपनियों के साथ मिलकर इस पर काम कर रहा है।
मंकीपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति के साथ करीबी शारीरिक संपर्क से यह संक्रमण फैल सकता है। हालांकि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि यह बीमारी यौन संचरण के माध्यम से फैल सकती है या नहीं जैसे वीर्य या योनि द्रव के माध्यम से। हालांकि, यौन संबंध बनाने के दौरान त्वचा के घाव या चकत्तों के संपर्क में आने से मंकीपॉक्स हो सकता है।
मंकीपॉक्स से चकत्ते कई बार यौन अंगों और मुंह पर विकसित हो सकते हैं, जो यौन संबंध बनाने के दौरान मंकीपॉक्स फैलने का कारण बन सकते हैं। इसलिए मुंह से त्वचा का संपर्क होने पर मंकीपॉक्स फैल सकता है, अगर इन दोनों में से किसी एक जगह पर मंकीपॉक्स के छाले बने हुए हों।
मंकीपॉक्स से संक्रमित होने का खतरा सिर्फ यौन सक्रिय लोगों और पुरुषों से यौन संबंध बनाने वाले पुरुषों तक ही सीमित नहीं है। यह रोग संक्रमित व्यक्ति से करीबी संपर्क बनाने वाले किसी भी व्यक्ति को हो सकता है।
मंकीपॉक्स वायरस को आमतौर पर ज्यादा संक्रामक नहीं माना जाता है, क्योंकि यह सिर्फ संक्रमित त्वचा के संपर्क में आने से ही होता है। इसलिए पब्लिक में यह संक्रमण फैलने का खतरा काफी कम है। हालांकि, मंकीपॉक्स के वर्तमान प्रकोप को रोकने के लिए प्राथमिकता के साथ प्रतिक्रिया दे रहा है। पता लगाने को कोशिश की जा रही है, कि यह वायरस कैसे फैलता है और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसके संपर्क से बचाने की कोशिश की जा रही है। मंकीपॉक्स के प्रति फैलाना भी इस रोग को फैलने से रोकने में मदद कर सकता है।