मेडिकल एनेस्थीसिया कितने प्रकार के होते हैं और कब किया जाता है किस Medical Anesthesia का इस्तेमाल

जानें एनीस्थीसिया से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां और शरीर पर इसके प्रभाव के बारे में।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : July 26, 2022 12:24 AM IST

Medical Anesthesia and their types: किसी भी सर्जरी या ऑपरेशन से पहले मरीजों को एनेस्थीसिया दिया जाता है। इसकी मदद से सर्जरी करा रहे व्यक्ति को दर्द का अहसास नहीं होता और उसकी सर्जरी आसानी से पूरी हो सकती है। एनेस्थीसिया लेने के बाद मरीज को यह समझ नहीं आता कि उसके शरीर पर किस जगह के कट लगाए जा रहे हैं और उन्हें दर्द भी महसूस नहीं होता। हालांकि, कुछ मामलों में ऐसा भी देखा जाता है कि जहां व्यक्ति एनेस्थीसिया लेने के बाद भी वह पूरी तरह से बेहोश नहीं होता।  कुछ रिसर्च में यह बात सामने आयी कि लगभग 0.5 फीसदी यानि  20 में से एक व्यक्ति को एनेस्थीसिया देने के बाद भी वह पूरी तरह बेहोश नहीं हो पाता। हालांकि, इस तरह के व्यक्ति पूरी तरह से हिल-डुल नहीं पाते और पूरी तरह होश में आने के बाद उन्हें पुरानी बातें याद नहीं रहतीं। इस लेख में आप पढ़ सकते हैं एनीस्थीसिया से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां और शरीर पर इसके प्रभाव के बारे में।  (Medical Anesthesia and their types in Hindi)

मेडिकल एनेस्थीसिया क्या है? (What is Medical Anesthesia?)

एनेस्थीसिया का अर्थ है- बेहोशी की अवस्था। ऐसी भी किसी मेडिकल ट्रीटमेंट जिसमें मरीज का ऑपरेशन करने या टांके लगाने की जरूरत पड़ती है तो वहां पीड़ित व्यक्ति को मेडिकल एनेस्थीसिया दिया जाता है। एनेस्थीसिया आमतौर पर गैस या स्टीम के रूप में इस्तेमाल किया जाता है और इन दवाओं को इंजेक्शन की मदद से शरीर में पहुंचाया जाता है या उसे सुंघा दिया जाता है और इस दोनों ही स्थितियों में मरीज बेहोश हो जाता है और उसके बाद मरीज की सर्जरी शुरू की जा सकती है।

मेडिकल एनेस्थीसिया देने से पहले किन बातों का ध्यान रखा जाता है? (Things to keep in mind before Medical Anesthesia is given)

किसी भी मरीज को मेडिकल एनेस्थीसिया देने से पहले इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:-

  • मेडिकल एनेस्थीसिया हमेशा प्रोफेशनल और ट्रेनिंग प्राप्त करने वाले स्टाफ द्वारा दिया जाना चाहिए।
  • मरीज को मेडिकल एनेस्थीसिया देने से पहले उसकी मेडिकल हिस्ट्री या पुरानी बीमारी और उन दवाइयों के बारे में पूरी जानकारी लेनी चाहिए जिनका सेवन मरीज कर रहा है।
  • मेडिकल एनेस्थीसिया देने के बाद मरीज को तब तक मेडिकल स्टाफ की निगरानी में रखना चाहिए जब तक कि उसे होश ना आ जाए।

मेडिकल एनेस्थीसिया के कितने प्रकार होते हैं?

मुख्य रूप से मेडिकल एनेस्थीसिया 2 प्रकार के होते हैं जिनका इस्तेमाल डॉक्टरों द्वारा किया जाता है। ये दोनों प्रकार हैं:-

लोकल एनेस्थीसिया

इस प्रकार के मेडिकल एनेस्थीसिया का प्रयोग किसी छोटी-मोटी  सर्जरी में किया जाता है , जब मरीजों को पूरी तरह से बेहोश करने की जरूरत नहीं पड़ती। बल्कि, शरीर के किसी एक छोटे से हिस्से को सुन्न किया जाता है।  लोकल मेडिकल एनेस्थीसिया में मरीज के शरीर का वह हिस्सा सुन्न रहता है जहां सर्जरी हो रही हो। इस प्रकार के मेडिकल एनेस्थीसिया देने के बाद मरीज पूरी तरह होश में रहता है लेकिन उसे सर्जरी वाले स्थान पर दर्द या तकलीफ महसूस नहीं होता।

जनरल एनेस्थीसिया

इस प्रकार के एनेस्थीसिया में सर्जरी करा रहे व्यक्ति को दवाओं की मदद से पूरी तरह से बेहोश किया जाता है। इसीलिए, सर्जरी या ऑपरेशन के दौरान मरीज पूरी तरह इस बात से अनजान रहता है कि उसके साथ क्या हो रहा है। इसीलिए, गम्भीर चोट लगने पर या लम्बे समय तक चलने वाले ऑपरेशन में जनरल एनेस्थीसिया का इस्तेमाल किया जाता है।