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जानें क्या है मारबर्ग वायरस, इसके लक्षण, कारण और इलाज

Marburg virus: मारबर्ग वायरस इबोला परिवार का एक हिस्सा और उसी की तरह यह गंभीर भी है। इस लेख में हम मारबर्ग वायरस क्या है, इसके लक्षण, कारण और इलाज के बारे में जानेंगे।

जानें क्या है मारबर्ग वायरस, इसके लक्षण, कारण और इलाज

Written by Mukesh Sharma |Published : July 19, 2022 11:54 AM IST

मारबर्ग वायरस, इबोला परिवार का एक वारस है और इसलिए इस वायरस के लक्षण भी इबोला वायरस संक्रमण से मेल खाते हैं। इबोला की तरह मारबर्ग वायरस डिजीज (मारबर्ग वायरस रोग) की भी मृत्यु दर काफी ज्यादा है। हालांकि, मारबर्ग वायरस के प्रकार और देखभाल के आधार पर मृत्यु दर कम या ज्यादा भी हो सकती है। मारबर्ग वायरस तेजी से फैलने वाला एक रक्तस्रावी बुखार है और यह पहले सितंबर 2021 में गिनी में पाया गया था। मारबर्ग वायरस डिजीज का प्रकोप कई अफ्रीकी देशों में देखा जा चुका है, जिनमें एंगोला, कोंगो, साउथ अफ्रीका और युगांडा जैसेदेश शामिल हैं। इन कई प्रकोपों के साथ-साथ बड़ी सख्या में मृत्यु भी देखी गई है, जो ज्यादातर दक्षिणी और पूर्वी अफ्रीका में हुई।

क्या हैं मारबर्ग वायरस के लक्षण

जब कोई व्यक्ति मारबर्ग वायरस से संक्रमित होता है, तो उसके 2 से 3 तीन दिनों के भीतर उसे लक्षण महसूस होने लगते हैं। मारबर्ग वायरस के शुरुआती लक्षणों में आमतौर पर निम्न शामिल हैं -

  • तेज बुखार
  • गंभीर सिरदर्द
  • मांसपेशियों में दर्द
  • बदन दर्द
  • तकलीफ व असहज महसूस होना

हालांकि, तीसरे दिन के बाद संक्रमण गंभीर होने लगता है और मरीज को कुछ अन्य लक्षण भी महसूस हो सकते हैं जैसे -

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  • पेट में दर्द
  • ऐंठन व मरोड़ होना
  • जी मिचलाना
  • उल्टी आना
  • गंभीर दस्त (जो एक हफ्ते तक रह सकते हैं।

मारबर्ग वायरस डिजीज को एक हफ्ते से अधिक समय होने के बाद इसमें एक हेमोरेजिक बीमारी के रूप में लक्षण विकसित होने लगते हैं। इस दौरान नाक, मसूड़ों और महिलाओं में योनी से रक्त आना आदि लक्षण देखे जा सकते हैं। मारबर्ग वायरस से संक्रमित होने के बाद अगर व्यक्ति की समय रहते देखभाल न की जाए तो 8 से 9 दिनों के भीतर ही उसकी मृत्यु हो सकती है।

मारबर्ग वायरस रोग कैसे फैलता है?

मारबर्ग वायरस रोग भी एक जूनोटिक रोग है, जो आमतौर पर अफ्रीकन फ्रूट बैट से फैलता है। अफ्रीकन फ्रूट बैट मारबर्ग वायरस का प्राकृतिक मेजबान (होस्ट) होता है, जिससे यह प्राइमेट्स (मानव-सदृश जानवर) में फैल जाता है।

इस वायरस के मानव से मानव प्रसार की बात करें तो यह सीधे संपर्क में आने से ही फैलता है। उदाहरण के लिए स्किन की खरोंच या मेंब्रेन के संपर्क में आने से व्यक्ति खून या शरीर के अन्य द्रवों के संपर्क मे आने से संक्रमित हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति के खून या अन्य शारीरिक द्रवों से दूषित कपड़ों के संपर्क में आने से भी व्यक्ति इस रोग से बीमार पड़ सकता है।

मारबर्ग वायरस का इलाज

मारबर्ग वायरस का इलाज करने के लिए सबसे पहले उसका निदान किया जाता है, जिस दौरान मरीज का आरटी-पीसीआर या सेल कल्चर टेस्ट आदि किए जा सकते हैं। हालांकि, मरीज के लक्षणों के अनुसार कुछ अन्य टेस्ट भी किए जा सकते हैं।

मारबर्ग वायरस के इलाज के लिए अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बन पाई है। इस रोग के इलाज में मरीज के लक्षणों के अनुसार उसकी देखभाल की जाती है और साथ ही साथ सपोर्टिव केयर दी जाती है। सोर्टिव केयर में मुख्य रूप से मरीज को पर्याप्त मात्रा में द्रव दिए जाते हैं, जिन्हें मुंह के साथ-साथ नसों के द्वारा (इंट्रावेनस फ्लूइड) के द्वारा दिया जाता है।

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मारबर्ग वायरस मरीज के ठीक होने के बाद भी उसके शरीर में रह सकता है और उसके सात हफ्तों बाद भी यौन संबंध बनाने या अन्य किसी करीबी संपर्क से यह वायरस अन्य लोगों तक फैल सकता है। इसलिए मारबर्ग वायरस से संक्रमित व्यक्तियों का टेस्ट जब नेटेटिव आ जाता है, तो उसके 12 महीनें बाद फिर ही फिर से यौन क्रियाएं शुरू करने की सलाह दी जाती है।