
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Medically Verified By: Dr. Rita Bakshi
मेल इनफर्टिलिटी क्या होती है?
कई बार जो कपल माता-पिता नहीं बन पाते हैं, उनमें अक्सर महिला को जांच करवाने के लिए कहा जाता है। लोग अक्सर यह मानने को तैयार नहीं होते कि पुरुषों की फर्टिलिटी भी प्रभावित हो सकती है। मेल इनफर्टिलिटी के बारे में सबसे जरूरी बात यह समझनी चाहिए कि इसके लक्षण हमेशा साफ दिखाई नहीं देते। कई बार पुरुष पूरी तरह स्वस्थ और फिट नजर आते हैं, लेकिन जांच के दौरान पता चलता है कि समस्या उनके स्पर्म की गुणवत्ता, संख्या या गतिशीलता में है।
अक्सर इसकी जानकारी तभी मिलती है, जब पुरुष वीर्य जांच (Semen Analysis) करवाते हैं। RISAA IVF की को-फाउंडर और सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर रीता बक्शी बताती हैं कि अगर किसी दंपति को गर्भधारण में परेशानी हो रही है, तो सबसे पहले पुरुष का सीमेन एनालिसिस करवाना चाहिए। सिर्फ बाहरी रूप से देखकर यह पता नहीं लगाया जा सकता कि उसकी प्रजनन क्षमता सामान्य है या नहीं।
डॉक्टर बताती हैं कि मेल इनफर्टिलिटी के कुछ संकेत बचपन से ही जुड़े हो सकते हैं। जब बच्चा बहुत छोटा होता है, तब माता-पिता या डॉक्टर जांच के दौरान महसूस कर सकते हैं कि टेस्टिस ठीक तरह से बने हैं या नहीं। कई बार देखा जाता है कि उस जगह पर टेस्टिस मौजूद महसूस नहीं होते, यानी वह जगह खाली सी लगती है, या फिर टेस्टिस सामान्य से अधिक नरम महसूस होते हैं। यह आगे चलकर प्रजनन क्षमता से जुड़ी कुछ समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है, इसलिए समय रहते विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।
बड़े होने पर कुछ अन्य शारीरिक समस्याएं भी मेल इनफर्टिलिटी से जुड़ी हो सकती हैं। इनमें से एक है वेरिकोसील (Varicocele), जिसमें टेस्टिस के आसपास की नसें (Veins) फूल जाती हैं और सूजन जैसी महसूस होती है। इससे टेस्टिस के तापमान और खून के बहाव (blood flow) पर असर पड़ता है, जिससे स्पर्म बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। यह मेल इनफर्टिलिटी का एक आम कारण माना जाता है।
इसके अलावा, इरेक्शन और स्खलन (Ejaculation) से जुड़ी दिक्कतें भी इनफर्टिलिटी का संकेत हो सकती हैं। अगर इरेक्शन ठीक से न बन पाए या इजैक्युलेशन के समय बार-बार कोई परेशानी महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। एक और स्थिति है रिवर्स इजेक्युलेशन, जिसमें वीर्य बाहर आने के बजाय ब्लैडर (मूत्राशय) की ओर चला जाता है। यह भी मेल इनफर्टिलिटी का एक बड़ा कारण हो सकता है, और यह केवल बाहरी रूप से देखने पर आसानी से समझ नहीं आता, इसलिए इसकी जांच करवाना जरूरी होता है।
इन सारी बातों से यह साफ है कि सिर्फ बाहरी बनावट देखकर इनफर्टिलिटी का पता लगाना काफी नहीं है। सही जांच बहुत जरूरी होती है, जिसमें स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड एक अहम टेस्ट माना जाता है। यह टेस्ट टेस्टिस की अंदरूनी बनावट, वेरिकोसील जैसी समस्याओं और बाकी असामान्यताओं को अच्छे से दिखा सकता है।
इसलिए अगर ऊपर बताए गए किसी भी संकेत जैसे टेस्टिस में असामान्य बदलाव महसूस होना, वैरीकोसेले, इरेक्शन या इजैक्युलेशन जैसी स्थिति दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज न करें ऐसे में बिना देर किए किसी फर्टिलिटी एक्सपर्ट या यूरोलॉजिस्ट से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर सीमेन एनालिसिस और स्क्रोटल अल्ट्रासाउंड जैसी जांचें करवाई जाती हैं, जिससे समस्या की सही वजह का पता चल सके और समय रहते उचित इलाज शुरू किया जा सके।