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Liver Cirrhosis in Hindi: यकृत यानी लिवर (Liver) हमारे शरीर का एक बेहद अहम अंग है। यह शरीर में कई जरूरी कार्य करता है। यह पाचन क्रिया और टॉक्सिंस को निकालने के लिए जरूरी होता है। इसके अलावा, लिवर ऊर्जा के भंडारण और कई अन्य जरूरी कार्यों के लिए भी जिम्मेदार होता है। स्वस्थ शरीर के लिए, लिवर का स्वस्थ होना बेहद जरूरी होता है। हालांकि, आजकल के गलत डाइट और खराब जीवनशैली की वजह से लिवर से जुड़ी बीमारियां बेहद आम हो गई हैं। कई लोग लिवर की तरह-तरह की बीमारियों से जूझ रहे हैं। इसमें लिवर सिरोसिस भी एक है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लिवर की स्वस्थ कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होकर फाइब्रोसिस (स्कार टिशू) में बदल जाती हैं। जैसे-जैसी लिवर सिरोसिस की बीमारी गंभीर होती है, लिवर के समस्त कार्य बाधित होने लगते हैं और इससे संपूर्ण स्वास्थ्य प्रभावित होता है। लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) की वजह से रक्त का संचार और विषैले पदार्थों को हटाने में मुश्किल हो जाती है। इससे लिवर खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। तो आइए, शारदा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट-इंटरनल मेडिसिन के डॉ. श्रेय श्रीवास्तव से विस्तार से जानते हैं लिवर सिरोसिस के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में-
आपको बता दें कि शुरुआत में लिवर सिरोसिस के लक्षण हल्के नजर आते हैं। लेकिन, जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, इसके लक्षण भी गंभीर होने लगते हैं।
लिवर सिरोसिस रोग कई कारणों से हो सकता है। इसमें शामिल हैं-
जो लोग अत्यधिक शराब का सेवन करते हैं, उनमें लिवर सिरोसिस का जोखिम अधिक बना रहता है। दरअसल, शराब पीने से लिवर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है। इससे सिरोसिस हो सकता है। भारत में ज्यादा शराब का सेवन, लिवर सिरोसिस का एक मुख्य कारण है। जो लोग शराब पीते हैं, उनमें शराब न पीने वाले लोगों की तुलना में लिवर सिरोसिस के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं। यानी लिवर सिरोसिस रोग के मामले शराब पीने वाले लोगों में ज्यादा देखने को मिलते हैं।
शराब लिवर सिरोसिस का एक अहम कारण है। लेकिन, जो लोग शराब नहीं पीते हैं, उन्हें भी लिवर सिरोसिस हो सकता है। नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (Non-Alcoholic Fatty Liver Disease), लिवर सिरोसिस का कारण बन सकता है। यह तब होता है, जब लिवर में अधिक मात्रा में फैट जमा होने लगता है। यह मोटापे, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से फैटी लिवर हो सकता है। फैटी लिवर, धीरे-धीरे सिरोसिस में बदल सकता है।
हेपेटाइटिस बी और सी (Hepatitis B & C) जैसे वायरल संक्रमण भी लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। अगर समय पर हेपेटाइटिस बी और सी का इलाज न किया जाए, तो लिवर सिरोसिस हो सकता है। यह स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। इसलिए हेपेटाइटिस बी और सी के लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें।
ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस भी लिवर सिरोसिस का कारण बन सकता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली लिवर सेल्स पर हमला करती है। यह स्थिति भी लिवर सिरोसिस के लिए जिम्मेदार हो सकती है।
आपको बता दें कि लिवर सिरोसिस का कोई स्थायी इलाज नहीं है। कुछ दवाइयों, खान-पान और जीवनशैली की मदद से लिवर सिरोसिस के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।
लिवर सिरोसिस के इलाज के लिए डॉक्टर कुछ दवाइयां लिख सकते हैं। इसमें मूत्रवर्धक और एंटी-वायरल दवाइयां शामिल हो सकती हैं। मूत्रवर्धक दवाइयों की मदद से सूजन और पानी की अधिकता को कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, डॉक्टर शरीर की कमजोरी और थकान को दूर करने के लिए विटामिन्स और मिनरल्स के सप्लीमेंट्स भी लिख सकते हैं।
लिवर सिरोसिस के लक्षणों को नियंत्रण में रखने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करना बहुत जरूरी होता है। शराब और धूम्रपान से पूरी तरह से दूरी बनाकर रखें। नियमित योग और एक्सरसाइज करें। साथ ही, वजन को नियंत्रण में रखना बहुत जरूरी होता है। हेल्दी डाइट लें। इसमें नमक का सेवन कम करें और इम्यूनिटी बूस्ट करने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
जब सिरोसिस की वजह से लिवर पूरी तरह फेल हो जाता है, तो इस स्थिति में लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकता है। आपको बता दें कि यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है। इसमें लिवर सिरोसिस रोगी में एक नया लिवर ट्रांसप्लांट किया जाता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
लिवर सिरोसिस के रोगियों को अपनी डाइट का खास ख्याल जरूर रखना चाहिए। उन्हें अपनी डाइट में हरी सब्जियां, फल और साबुत अनाज शामिल करना चाहिए। एल्कोहल और जंक फूड से परहेज करें।
नहीं, लिवर सिरोसिस कई अन्य कारणों से भी हो सकता है। इसमें हेपेटाइटिस, फैटी लिवर और ऑटोइम्यून रोग भी शामिल हैं।
लिवर सिरोसिस मुख्य रूप से 3 प्रकार का होता है। इसमें कम्पेन्सेटेड सिरोसिस, डी-कम्पेन्सेटेड सिरोसिस और एंड-स्टेज लिवर डिजीज शामिल हैं।
नहीं, लिवर सिरोसिस पूरी तरह ठीक नहीं हो सकता है। हालांकि, अगर शुरुआती स्टेज में लिवर सिरोसिस का निदान हो जाए तो बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।