किडनी कैंसर क्या है? यह Kidney को कैसे नुकसान पहुंचाता है?

Kidney Cancer Kya Or Kaise Hota Hai: मुंह का कैंसर हो या फिर ब्रेस्ट कैंसर, इनका पता फिर भी जल्दी लग जाता है, लेकिन किडनी कैंसर के बारे में बहुत ही कम लोगों को पता होता है। आइए इसके बारे में डॉक्टर से जानते हैं।

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Written By: Vidya Sharma | Published : April 22, 2026 10:46 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Srikanth Atluri

Kidney Cancer Kya Hota Hai: किडनी कैंसर को अक्सर शरीर में होने वाले किसी भी दूसरे ट्यूमर जैसा ही मान लिया जाता है। लेकिन, असल में यह एक ऐसी बीमारी है जो हमारे शरीर के सबसे जरूरी फिल्टरिंग सिस्टम यानी कि हमारी किडनी के काम में चुपके से रुकावट डालती है। किडनी कैंसर का सबसे आम प्रकार रीनल सेल कार्सिनोमा (RCC) कहलाता है। यह एक ऐसा कैंसर है जो किडनी की उन बहुत छोटी-छोटी फिल्टरिंग इकाइयों में होता है, जो हमारे खून को साफ करने का काम करती हैं।

यह समझने के लिए कि किडनी कैंसर किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाता है, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि जब किडनी ठीक से काम कर रही होती है, तो वह क्या करती है। यह जानने के लिए हमने एसएसओ कैंसर हॉस्पिटल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर श्रीकांत अट्लूरी से बात की। उन्होंने किडनी कैसे काम करती है? और किडनी कैंसर कब और कैसे शुरू होता है? इस विषय पर विस्तार से बताया।

किडनी कैसे और क्या काम करती है?

डॉक्टर श्रीकांत बताते हैं कि किडनी हर दिन लगभग 150-180 लीटर खून को फिल्टर करती है। इस प्रक्रिया में वह खून से जहरीले पदार्थों को निकालती है, शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखती है, और साथ ही ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने तथा शरीर में तरल पदार्थों का सही संतुलन बनाए रखने का काम भी पूरा करती है। किडनी की फिल्टरिंग की पूरी प्रक्रिया, कई छोटी-छोटी संरचनाओं पर निर्भर करती है, जो सभी मिलकर पूरी तरह से तालमेल बिठाकर काम करती हैं, ताकि सही परिणाम मिल सकें।

किडनी कैंसर कैसे बनता है?

किडनी कैंसर तब शुरू होता है, जब इनमें से कुछ संरचनाओं के जेनेटिक बनावट में कोई गड़बड़ी आ जाती है। इस गड़बड़ी के कारण वे बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं। हालांकि, कई दूसरे कैंसर की तुलना में, यह कोशिकाओं से जुड़ी गड़बड़ी किडनी के काम पर तुरंत कोई असर नहीं डालती। डॉक्टर श्रीकांत कहते हैं कि किडनी कैंसर का यही 'धोखा देने वाला' पहलू है, जिसकी वजह से यह कई महीनों या सालों तक बिना पता चले रह सकता है। 

इस दौरान खून की जांच के नतीजों में बदलाव आ सकते हैं या बीमारी या चोट के कोई लक्षण दिखाई दे सकते हैं। किडनी में मौजूद ट्यूमर, कई महीनों से लेकर कई सालों तक किडनी के अंदर ही बढ़ सकता है, और इस दौरान खून की जांच के नतीजों में कोई बदलाव नहीं भी दिख सकता है, या बीमारी के कोई लक्षण भी सामने नहीं आ सकते हैं।

जब नुकसान होना शुरू होता है, तो यह दो तरह से होता है- लोकर तौर पर और पूरे शरीर पर असर डालने वाले तौर पर (systemic)।

लोकल किडनी कैंसर क्या होता है?

1. इसे लोकल इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसमें ट्यूमर का बढ़ता हुआ आकार धीरे-धीरे किडनी के स्वस्थ ऊतकों (tissues) की जगह ले लेता है।

2. हम इसकी कल्पना कुछ इस तरह कर सकते हैं, जैसे किसी फिल्टरिंग प्लांट का काम करने वाली मशीनरी की जगह धीरे-धीरे कोई बेकार और काम न करने वाला ढेर ले ले।

3. इसका नतीजा यह होता है कि किडनी के अंदर काम करने वाली कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है, और खून को फिल्टर करने की उनकी क्षमता भी घट जाती है। 

4. शुरुआती दौर में, दूसरी स्वस्थ किडनी इस काम का कुछ बोझ अपने ऊपर ले सकती है, जिससे असली समस्या का पता नहीं चल पाता। 

5. लेकिन, जैसे-जैसे ट्यूमर बढ़ता है, वह आस-पास के अंगों और खून की नसों पर दबाव डालता है, और मूत्रवाहिनी (ureter) में रुकावट पैदा करके पेशाब के सामान्य बहाव को भी प्रभावित करता है।

सिस्टेमिक कैंसर कैसे होता है?

लोकल तरह से कैंसर का फैलना जितना चिंताजनक है, उतना ही चिंताजनक यह भी है कि ट्यूमर पूरे शरीर पर भी असर डालता है। किडनी कैंसर में खून की सप्लाई बहुत ज्यादा होती है, क्योंकि कैंसर अपनी ग्रोथ के लिए खुद ही खून की नसें बना लेता है।

ऐसा करने से कैंसर खून के नॉर्मल सर्कुलेशन में भी रुकावट डालता है और किडनी की नस (renal vein) या इन्फीरियर वेना कावा (inferior vena cava) जैसी बड़ी नसों पर भी हमला कर देता है। इसलिए, इस कैंसर का असर सिर्फ किडनी तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैलने का रास्ता बना लेता है।

किडनी कैंसर का दूसरे अंगों को कैसे प्रभावित करता है?

किडनी से कैंसर का दूसरे अंगों में फैलना (मेटास्टेसिस) यह दिखाता है कि किडनी कैंसर का पूरे शरीर पर क्या असर होता है। कैंसर के सेल्स फेफड़ों, हड्डियों, लिवर और/या दिमाग तक फैल सकते हैं; ऐसे में यह सिर्फ एक अंग के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

बायोलॉजिकल मिस डायरेक्शन क्या होता है?

डॉक्टर कहते हैं कि किडनी कैंसर से शरीर को होने वाले नुकसान में एक चीज बायोलॉजिकल मिस डायरेक्शन भी शामिल है। इसका मतलब है कि कुछ ट्यूमर ऐसे हार्मोन या केमिकल मैसेज बनाते हैं जिनकी शरीर को कोई ज़रूरत नहीं होती। इसकी वजह से कुछ ऐसी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं जिनकी पहले से कोई उम्मीद नहीं होती, जैसे कि पॉलीसाइथेमिया (खून में लाल रक्त कोशिकाओं का बहुत ज्यादा बढ़ जाना), कैल्शियम का लेवल बढ़ जाना, या असामान्य रूप से हाई ब्लड प्रेशर होना। अक्सर, ये ही ऐसे पहले संकेत होते हैं जिनसे पता चलता है कि शरीर में कुछ तो गड़बड़ है।

भारत में देरी से पता लगता है किडनी कैंसर

भारत के नजरिए से देखें, तो ज्यादातर मरीजों में कैंसर का पता बहुत देर से चलता है, जिसकी वजह से इलाज में दिक्कतें बढ़ जाती हैं और कैंसर को पूरी तरह से ठीक करने का मौका कम हो जाता है। कई बार, कैंसर के कोई लक्षण दिखाई न देने पर लोग यह गलतफहमी पाल लेते हैं कि उन्हें कोई बीमारी ही नहीं है।

कैंसर का इलाज

डॉक्टर कहते हैं कि इस सब के बावजूद एक अच्छी बात यह भी है कि अगर किडनी कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में ही चल जाए, तो इसके पूरी तरह से ठीक होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है। इमेजिंग, मिनिमली इनवेसिव सर्जरी और रोबोटिक तकनीकों में हाल ही में हुई तरक्की की मदद से अब हम किडनी के कई ट्यूमर को हटाकर किडनी के काम करने की क्षमता को बचाए रख सकते हैं। जिन मरीजों में कैंसर काफी बढ़ चुका होता है, उनके इलाज में नई 'टारगेटेड थेरेपी' और 'इम्यूनोथेरेपी' काफी असरदार साबित हो रही हैं और उनके इलाज के नतीजों को बेहतर बना रही हैं।

निष्कर्ष

किडनी कैंसर होने से पहले कोई चेतावनी नहीं होती है। यह चुपके-चुपके किडनी को नुकसान पहुंचाती रहती है, बड़ी चालाकी से शरीर के हिसाब से खुद को ढाल लेती है, और बिना किसी को भनक लगे पूरे शरीर में फैल जाती है। इसलिए, जब कैंसर इस तरह से फैल रहा हो, तो किडनी कैंसर के बारे में जागरूकता सिर्फ इसके लक्षणों को जानने तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए।

बल्कि हमें यह भी समझना होगा कि यह कितनी खामोशी से शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। किडनी कैंसर के मामले में, सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है कि आप उन लक्षणों को पहचान ही नहीं पाते, जिनका सीधा संबंध इस बीमारी से होता है।

FAQs

क्या किडनी का कैंसर ठीक हो सकता है?

यदि गुर्दे के कैंसर का निदान और उपचार प्रारंभिक अवस्था में हो जाए तो यह एक ठीक होने योग्य बीमारी है।

किडनी के कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

मूत्र में रक्त (गुलाबी, लाल या कोला रंग का),  लगातार दर्द- कमर या पीठ में लगातार होने वाली तकलीफ, असामान्य थकान, अस्पष्टीकृत वजन कम होना, रात में पसीना आना या बुखार आदि।

किडनी कैंसर कैसे होता है?

किडनी (गुर्दे) में कैंसर तब होता है जब किडनी की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर बनाती हैं।

किडनी खराब कब होती है?

किडनी मुख्य रूप से अनियंत्रित डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और पेन किलर की दवाइयों के ज्यादा सेवन के कारण खराब होती है।

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