hamburger icon
A
Read in English

टियर गैस में ऐसा क्या होता है, जिससे आंखों में आंसू और त्वचा में जलन होने लगती है?

पुलिप आक्रामक भीड़ और प्रोटेकस्ट को कंट्रोल करने के लिए स्थिति अनुसार टियर गैस का इस्तेमाल करती है। लेकिन यह टियर गैस हमारी शरीर को क्या नुकसान पहुंचा सकती है, आइए इस विषय पर जानते हैं।

WrittenBy

Written By: Vidya Sharma | Updated : July 22, 2026 2:47 PM IST

WrittenBy

Medically Verified By: Dr Gaurav Jain

आपने देखा होगा कि प्रोटेस्ट हो, नियंत्रित न की जा सकने वाली भीड़ हो या फिर कहीं आपातकालीन स्थिति, ऐसे में पुलिस द्वारा स्थिति को संभालने के लिए टियर गैस छोड़ी जाती है। टियर गैस के नाम से लगता है कि यह सिर्फ आंखों में आंसू लाती होगी, लेकिन ऐसा नहीं है। टियर गैस के गोले अगर लोगों के बीच छोड़े जाएं या फोड़े जाएं तो यह त्वचा में जलन, आंखों में जलन और थोड़ा बहुत सांस लेने में परेशानी भी पैदा कर सकते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कम नुकसान वाले कहे जाने वाले आंसू गैस के गोले जब भी फोड़े जाते हैं तो लोगों में अफरा-तफरी क्यों मच जाती है? क्यों उनकी स्किन जलने लगती है, आंखों से पानी आने लगता है, आंखें खोलने में परेशानी होती है, सांस लेने में परेशानी होती है और खांस-खांसकर लोगों की हालत खराब हो जाती है? इस गैस में ऐसा क्या होता है जो शरीर पर इतना असर करता है? यह जानने के लिए हमने धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन के कंसल्टेंट डॉक्टर गौरव जैन से बात की। आइए उन्हीं से विस्तार से जानते हैं।

टियर गैस में कौन से हानिकारक केमिकल होते हैं?

टियर गैस में कौन से हानिकारक केमिकल होते हैं? टियर गैस में कौन से हानिकारक केमिकल होते हैं?

पिछले कुछ वर्षों में और हाल में हुए विरोध प्रदर्शन और भीड़ नियंत्रण के दौरान कई बार टियर गैस के इस्तेमाल को देखा गया है। इस गैस के संपर्क में आते ही लोगों की आंखों में से लगातार आंसू आने लगते हैं, खांसी आने लगती है, त्वचा में तेज जलन और सांस लेने में भी तकलीफ हो सकती है। ऐसे में लोगों के मन में यह जानने की उत्सुकता होती है कि आखिर टियर गैस में ऐसा क्या होता है, जिससे कुछ ही पलों में शरीर पर इतना तेज प्रभाव होता है।

इसे लेकर डॉक्टर कहते हैं कि “मैं आपको सबसे पहले यह बता दूं कि टियर गैस असल में गैस नहीं होती है। ये ऐसे केमिकल कंपाउंड के बेहद महीन कण होते हैं, जिन्हें हवा में फैलाया जा सकता है। इसमें सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला रसायन सीएस (CS – o-Chlorobenzylidene Malononitrile) होता है।"

इसके अलावा सीएन (CN) और ओलेओरेसिन कैप्सिकम (OC) जैसे रसायनों का इस्तेमाल भी कई मौकों पर देखा गया है। इनका प्राथमिक उद्देश्य किसी भी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति को इतना असहज करना होता है कि वह कुछ समय के लिए उस जगह से दूर चला जाए।

आंसू बम फूटने पर लोगों के शरीर पर क्या असर पड़ेगा?

डॉक्टर जैन के अनुसार “जब टियर गैस के कण इंसान के आंख, नाक और मुंह के रास्ते से शरीर के संपर्क में आते हैं तो वह कुछ संवेदनशील नसों को सक्रिय कर देते हैं, जो बदले में दर्द और जलन का एहसास कराती हैं। इसका परिणाम यह होता है कि आंखों में तेज जलन शुरू हो जाती है। और शरीर अपने स्वाभाविक रक्षा प्रणाली को आरम्भ करता है, जिससे आंसू आने शुरू हो जाते हैं। आंसुओं का काम उन केमिकल्स को बाहर निकालना होता है इसलिए इसके संपर्क में आए किसी व्यक्ति को कुछ देर तक आंखें ठीक से खोलने में भी कठिनाई होती है।

आंसू बम के केमिकल का स्किन पर क्या असर पड़ता है?

आंसू गैस में मौजूद केमिकल त्वचा पर भी असर डालते हैं। खासकर चेहरे, गर्दन और शरीर के खुले हिस्सों में तेज जलन, चुभन और लालिमा महसूस हो सकती है। डॉक्टर कहते हैं कि जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव होती है या जिनके शरीर पर पसीना ज्यादा होता है, उनमें अन्य लोगों की स्किन की तुलना में जलन ज्यादा हो सकती है। कुछ मामलों में खुजली या हल्की सूजन भी दिखाई दे सकती है, हालांकि ज्यादातर लोगों में ये लक्षण कुछ समय बाद अपने आप कम होने लगते हैं।

सांस लेने में होने वाली परेशानी

टियर गैस सिर्फ आंखों और स्किन को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि श्वसन तंत्र पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। इसके बारीक पार्टिकल्स नाक और गले की परत को उत्तेजित करते हैं, जिससे लगातार खांसी, गले में जलन, सीने में जकड़न और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। 

जिन लोगों को पहले से अस्थमा, एलर्जी या फेफड़ों की कोई बीमारी है, उनमें यह परेशानी अधिक गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे मरीजों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाकर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।

आंसू गैस की वजह से होने वाली अन्य समस्याएं

डॉक्टर कहते हैं कि कुछ लोगों में टियर गैस के संपर्क में आने के बाद मतली, उल्टी जैसा महसूस होना या पेट में असहजता भी हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गैस के कुछ पार्टिकल्स श्वसन मार्ग या मुंह के जरिए शरीर के अंदर पहुंच सकते हैं। हालांकि यह प्रभाव आमतौर पर अस्थायी होता है और ताजी हवा मिलने के बाद धीरे-धीरे कम होने लगता है। लेकिन फिर भी इस दौरान समस्या बढ़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होगा।

टियर गैस से खुद को कैसे बचाएं?

डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर कोई व्यक्ति टियर गैस के संपर्क में आ जाए तो सबसे पहला कदम वहां से तुरंत निकलकर खुली और ताजी हवा वाले स्थान पर पहुंचना होता है। वहीं इसके बाद आंखों को सामान्य साफ पानी या सलाइन से अच्छी तरह धोना चाहिए और उन्हें बार-बार रगड़ने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे जलन और बढ़ सकती है। 

अगर कॉन्टैक्ट लेंस लगे हों तो उन्हें तुरंत निकाल देना चाहिए। उस दौरान पहने कपड़ों को उतारकर अलग रखें और दोबारा पहनने से पहले अच्छी तरह धो लें। साथ ही त्वचा को साबुन और साफ पानी से धोना भी मददगार साबित होता है।

कब तक रहता है टियर गैस का असर?

अगर हम स्वस्थ लोगों की बात करें तो उनमें टियर गैस का असर 30 मिनट से लेकर कुछ घंटों के भीतर धीरे-धीरे कम होने लगता है। हालांकि अगर आंखों में तेज दर्द बना रहे, धुंधला दिखाई दे, सांस लेने में लगातार परेशानी हो या व्यक्ति को पहले से कोई गंभीर बीमारी हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। वहीं अगर आपको पहले से कोई बीमारी, जैसे अस्थमा या अन्य कोई बीमारी है तो या फिर ऐसी जगहों पर जाने से बचें और समस्या बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

शबाना आजमी को टियर गैस की वजह से आया अस्थमा अटैक

shabana azmi शबाना आजमी

हाल की खबरों की बात करें तो जंतर-मंतर में चल रहे युवाओं के प्रोटेस्ट को सपॉर्ट करने पहुंची शबाना आजमी ने टियर गैस का सामना किया, जिसके बाद उन्होंने बताया कि आंसू गैस के धुएं के संपर्क में आने के कारण उन्हें अस्थमा का दौरा पड़ गया था। हालांकि, उन्होंने अपने पास रखे इनहेलर की मदद से तुरंत राहत पाई और इसके बाद वापस लौटकर प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की.

डिस्क्लेमर: टियर गैस को अपेक्षाकृत कम घातक और भीड़ को कंट्रोल करने का उपाय माना जाता है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि यह पूरी तरह सुरक्षित है। लंबे समय तक संपर्क, बंद जगह में इसका उपयोग या पहले से बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने पर इसके दुष्प्रभाव गंभीर हो सकते हैं। इसलिए किसी भी ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय सही प्राथमिक उपचार अपनाना और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे महत्वपूर्ण होता है।