
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : January 23, 2026 12:36 PM IST
Irritable Bowel Syndrome in Hindi: उम्र के बढ़ने के साथ ही पेट से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं। विशेषज्ञ इसका एक कारण कमजोर पड़ता है शरीर और मांसपेशियों का उम्र के साथ कमजोर होना बताते हैं। मगर समस्या यह है कि आप पेट से जुड़ी समस्याएं केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहे हैं बल्कि कम उम्र और युवा लोगों को भी होने लगी हैं। छोटे बच्चों से लेकर युवाओं तक बार-बार पेट दर्द, गैस, कब्ज या दस्त की शिकायत करते हैं। अधिकतर लोग इसे हल्के में लेते हैं और नहीं जानते कि यह भी एक बीमारी का संकेत है जिसे विशेषज्ञ ‘बॉवेल सिंड्रोम’ (Bowel Syndrome) कहते हैं बाउल सिंड्रोम क्या है? इसे आप किस तरीके से पहचान सकते हैं? और यह किस कारण से होता है? हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती लाइफस्टाइल, गलत खानपान और बढ़ता मानसिक तनाव इस समस्या को युवाओं में तेजी से बढ़ा रहा है, इसलिए सही समय पर इसकी पहचान करना और ‘बॉवेल सिंड्रोम को समझना बेहद जरूरी है।
इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) एक पाचन तंत्र से जुड़ी एक समस्या है। दरअसल, यह कई अलग-अलग समस्याओं का एक समूह है और इसलिए इसे सिंड्रोम कहा जाता है, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम में आमतौर पर हमारी आंत ठीक से काम नहीं कर पाती हैं। यह एक दर्दनाक समस्या है, जिसमें मुख्य रूप से पेट दर्द, सूजन, गैस, कब्ज या कभी दस्त जैसे लक्षण देखे जाते हैं। इससे ग्रसित मरीज को अक्सर मल त्यागने के बाद भी ऐसा महसूस होता है कि उसका पेट साफ नहीं हुआ है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि यह कोई जानलेवा बीमारी नहीं है लेकिन जीवन के गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
इस तरह की बीमारियों का खतरा आमतौर पर बढ़ती उम्र के साथ ही बढ़ता है, लेकिन देखा जा रहा है कि इरिटेबल बाउल सिंड्रोम खतरा कम उम्र में ही बढ़ रहा है। कम उम्र में इरिटेबल बाउल सिंड्रोम विकसित होने की सबसे बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल है। आज की यंग जनरेशन बहुत ज्यादा बाहर की अनहेल्दी चीजें खाने लगी हैं और उनका लाइफस्टाइल सेडेंटरी होता जा रहा है यानी वे बिल्कुल भी एक्सरसाइज नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा देर रात तक जागना, शराब पीना, स्मोकिंग करना या समय पर भोजन न करना आंतों की कार्यप्रणाली को नुकसान पहुंचा रहा है।
आज की इस तेज रफ्तार जिंदगी में युवा पढ़ाई, करियर और सोशल प्रेशर के कारण तनाव महसूस करते हैं। ऐसे में तनाव का सीधा असर दिमाग के साथ-साथ आंतों पर पड़ता है। गट-ब्रेन कनेक्शन के कारण डिप्रेशन जैसी समस्याएं बढ़ती हैं और बॉवेल सिंड्रोम ट्रिगर होता है, जिससे लक्षण और गंभीर हो जाते हैं और आपको परेशानी में डाल सकते हैं
बॉवेल सिंड्रोम से बचाव के लिए सबसे पहले एक संतुलित जीवनशैली अपनाए। संतुलित आहार लें। फाइबर युक्त भोजन का सेवन करे, फल-सब्जियां और पर्याप्त पानी पिएं । रोजाना हल्की एक्सरसाइज करें, योग और प्राणायाम करें। इससे पाचन तंत्र सुधारेगा। वहीं तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन करें और अच्छी नींद लें। लेकिन यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो डॉक्टर से जल्द से जल्द सलाह लेना सबसे जरूरी है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।