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Insulin Resistance Health Hazards- इंसुलिन रेजिस्टेंस एक ऐसी कंडीशन है जिसमें शरीर इंसुलिन को सही प्रतिक्रिया नहीं देता। इंसुलिन एक प्रकार का हार्मोन है जिसका निर्माण अग्नाशय या पैंक्रियाज़ द्वारा किया जाता है। इंसुलिन शरीर मे ग्लूकोज या शुगर के सर्कुलेशन में मदद करता है। ग्लूकोज (glucose) शरीर को भोजन से प्राप्त होनेवाली एनर्जी या रस है जो शरीर को कार्य करने में सहायता करती है। जब शरीर की सेल्स इंसुलिन को ठीक से प्रतिक्रिया नहीं देतीं तो शरीर को ब्लड शुगर लेवल को नॉर्मल (blood sugar levels normal) रखने के लिए अधिक मात्रा में इंसुलिन की जरूरत पड़ती है। अगर यह स्थिति लम्बे समय तक बनी रहे तो इससे शरीर में ब्लड शुगर लेवल (higher blood sugar) बढ़ जाता है और टाइप 2 (risk of type 2 diabetes) डायबिटीज और हार्ट डिजिज (heart disease) जैसी समस्याओं का रिस्क बढ़ने लगता है।
जब हम भोजन करते हैं और विशेषकर कार्ब्स वाले फूड्स (carbohydrates rich foods) खाते हैं तो उनसे शरीर में ग्लूकोज बनता है। यह ग्लूकोज रक्त प्रवाह में घुल जाता जाता है। इंसुलिन एक चाभी की तरह काम करता है और बॉडी सेल्स को खुलने और ग्लूकोज को एनर्जी में बदलने में मदद करता है। सीनियर एंडोक्रोइनोलॉजिस्ट और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. महेश डीएम कहते हैं कि, इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति में यह ताले और चाभी का मैकेनिज्म काम नहीं करता। जिससे बॉडी सेल्स ठीक तरह से खुल नहीं पातीं और ऐसे में ग्लूकोज के सेल्स के अंदर भेजने के लिए पैंक्रियाज को अधिक मात्रा में इंसुलिन का निर्माण करना पड़ता है। शुरूआत में अतिरिक्त इंसुलिन ब्लड शुगर लेवल का स्तर ठीक रखने का काम करता है लेकिन, समय के साथ पैंक्रियाज के लिए यह काम मुश्किल हो जाता है।
डॉक्टर बताते हैं कि, इंसुलिन रेजिस्टेंस के कई कारण हो सकते हैं जैसे-
सबसे बड़ी चिंता की बात यही है कि इंसुलिन रेजिस्टेंस के शुरूआती स्टेज पर इसके कोई लक्षण दिखायी नहीं देते। इसीलिए, बहुत-से लोगों को यह समझ नहीं आता कि उन्हें इंसुलिन रेजिस्टेंस है। हालांकि, समय बीतने के साथ इसके लक्षण दिखायी दे सकते हैं। इंसुलिन रेजिस्टेंस के कुछ लक्षण इस प्रकार हैं-
रेग्यूलर फिजिकल एक्टिविटी करें। रोजाना एक्सरसाइज करें।
अपनी डाइट में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन और हेल्दी फैट्स शामिल करें।
चीनी वाली चीजें कम खाएं, फ्राइड फूड्स और प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन कम करें।
अपने शरीर का वजन कम करें। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने में मदद होगी।
तनाव को बढ़ने से रोकें और योग-मेडिटेशन जैसे उपायो की मदद से स्ट्रेस कंट्रोल करें।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
बहुत अधिक थकान महसूस करना, लगातार बढ़ता मोटापा, मीठा खाने की क्रेविंग्स होना और स्किन पर काले धब्बे बनना इंसुलिन रेजिस्टेंस के लक्षण हो सकते हैं।
मोटापा, कसरत ना करने की आदत और प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन अधिक मात्रा में करने से इंसुलिन रेजिस्टेंस हो सकता है