
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Medically Verified By: Dr Seema Dhir
insulin resistance (AI generated image)
डायबिटीज जैसी बीमारियों के बारे में तो आज के समय में ज्यादातर लोगों को पता है, लेकिन इंसुलिन रेजिस्टेंस के बारे में आज भी ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं है। लेकिन आज के समय में न तो हमारा खानपान सही है और न ही हमारी लाइफस्टाइल सही है क्योंकि हम एक्सरसाइज बहुत ही कम करते हैं और एक बड़ी संख्या में लोग डेस्क जॉब करते हैं। इसलिए आज के समय में सिर्फ डायबिटीज की जानकारी होने से काम नहीं चलेगा बल्कि इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याओं की जानकारी का होना भी जरूरी है। लेकिन ऐसी समस्याओं के बारे में लोगों को बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है। डॉ. सीमा धीर, यूनिट हेड और सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, आर्टेमिस हॉस्पिटल्स ने इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी, जिनके बारे में हम आगे जानेंगे।
डॉ. सीमा धीर के अनुसार आज के दौर में इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जो कि एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन के प्रति सही तरीके से प्रतिक्रिया नहीं देती। इंसुलिन पैनक्रियाज द्वारा बनने वाला महत्वपूर्ण हार्मोन है जिसका मुख्य काम रक्त में मौजूद ग्लूकोज यानी कि शुगर को कोशिकाओं तक पहुंचाना है ताकि वह ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल हो सके।
लेकिन जब शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित हो जाता है, तब कोशिकाएं इंसुलिन के संकेत को ठीक से पहचान नहीं पाती है और नतीजा होता है कि ग्लूकोज कोशिकाओं के अंदर जाने की बजाय खून में जमा होने लगता है इसकी भरपाई करने के लिए पेनक्रियाज शुरू-शुरू में अधिक मात्रा में इंसुलिन बनाता है लेकिन समय के साथ पैंक्रियाज की क्षमता कम होने लगती है और ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने लगता है और यही स्थिति आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज का कारण बन सकती है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस का सबसे बड़ा कारण मोटापा माना जाता है खासकर जब पेट के आसपास बहुत ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है इसके अलावा लंबे समय तक शारीरिक एक्टिविटी ना होना अधिक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन मीत है ड्रिंक का बहुत ज्यादा इस्तेमाल पर्याप्त नींद ना लेना लगातार तनाव में रहना इसके जोखिम को बढ़ाते हैं कुछ महिलाओं में पुलिस स्टिक ओवरी सिंड्रोम होने पर भी इंसुलिन रेजिस्टेंस की संभावना बनी रहती है।
शुरुआती चरण की बात करें, तो आपको बिल्कुल भी पता नहीं चलेगा कि आपको इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या है। क्योंकि इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। हालांकि कुछ लोगों को बार-बार भूख लगना,जल्दी थकान, पेट के आसपास तेजी से चर्बी बढ़ना, गर्दन या बगल में काले धब्बे, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना जैसे संकेत देखने को मिलते हैं और कई बार इसका पता सिर्फ ब्लड शुगर टेस्ट से भी हो जाता है।
अगर वक्त रहते ही इंसुलिन रेजिस्टेंस पर ध्यान दिया जाए तो टाइप टू डायबिटीज से बचा जा सकता है साथ ही कई और गंभीर बीमारी जैसे हृदय रोग फैटी लीवर जैसी गंभीर समस्या से बचाव हो सकता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस को काफी हद तक एक अच्छी जीवनशैली को अपना कर नियंत्रित किया जा सकता है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याओं को कंट्रोल करने के लिए अपनी डाइट व लाइफस्टाइल से जुड़ी निम्न बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है -
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य सिर्फ इंसुलिन रेजिस्टेंस के बारे में कुछ जरूरी जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के लिए नहीं है और उसके लिए आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।