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इन्फ्लूएंजा क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण और बचाव के उपाय

इन्फ्लूएंजा एक संक्रामक बीमारी है। यह एक से दूसरे व्यक्ति में ड्रॉपलेट्स के जरिए फैल सकता है। इससे बचाव के लिए वैक्सीन लगवाना बहुत जरूरी है। बुजुर्गों और बच्चों में इन्फ्लूएंजा का खतरा ज्यादा रहता है।

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Written By: Anju Rawat | Published : July 29, 2026 4:26 PM IST

इन्फ्लूएंजा या फ्लू एक श्वसन संबंधी बीमारी है। यह संक्रामक होती है यानी एक से दूसरे में फैल सकती है। यह इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होती है। यह वायरस श्वसन-तंत्र को प्रभावित करता है और नाक, मुंह और फेफड़ों में संक्रमण पैदा कर सकता है। कुछ मामलों में इंफ्लूएंजा के रोगी सही इलाज और खान-पान से घर पर ही ठीक हो जाते हैं। लेकिन, कुछ लोगों में फ्लू काफी गंभीर और जानलेवा हो सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में फ्लू की वजह से हर साल लगभग 2.90 लाख से 6.50 लाख लोगों की मौत हो जाती हैं। वहीं, सीजनल इन्फ्लूएंजा से हर साल लगभग 100 करोड़ मामले सामने आते हैं। इनमें करीब 30 से 50 लाख लोग गंभीर रूप से इन्फ्लूएंजा से बीमार पड़ते हैं। WHO के अनुसार, आमतौर पर संक्रमित होने के 1 से 4 दिन बाद शुरू होते हैं और सामान्यत: लगभग एक सप्ताह तक बने रहते हैं।

फ्लू के लक्षण क्या होते हैं?

Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार, जब कोई इन्फ्लूएंजा वायरस के संपर्क में आता है, तो उसे कई लक्षण महसूस हो सकते हैं। इसके लक्षण आमतौर पर अचानक शुरू होते हैं। इनमें शामिल हैं-

  • बुखार होना या बुखार जैसा महसूस होना
  • ज्यादा ठंड लगना
  • खांसी और गले में खराश या दर्द होना
  • नाक बहना या नाक बंद हो जाना
  • शरीर में दर्द रहना
  • सिरदर्द होना
  • थकान या कमजोरी महसूस होना
  • उल्टी या दस्त होना

इन्फ्लूएंजा से संक्रमित व्यक्ति में इनमें से कोई लक्षण महसूस हो सकता है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि फ्लू होने पर सबसे पहले बुखार आता है, लेकिन यह जरूरी नहीं है।

कैसे फैलता है इन्फ्लूएंजा वायरस!

CDC के अनुसार, इन्फ्लूएंजा संक्रमित व्यक्ति के श्वसन बूंदों यानी ड्रॉपलेट्स के जरिए फैलता है। ये बूंदे खांसने, छींकने या बातचीत के दौरान बाहर निकलती हैं। जब ये ड्रॉपलेट्स पास बैठे लोगों के मुंह या नाक तक पहुंचती है, तो स्वस्थ व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है। कुछ लोगों में इन्फ्लूएंजा का खतरा ज्यादा रहता है, इनमें शामिल हैं-

  • 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में फ्लू का खतरा ज्यादा हो सकता है।
  • जो लोग अस्थमा, डायबिटीज या किसी अन्य बीमारी से लंबे समय से जूझ रहे हैं, उनमें इसका खतरा ज्यादा हो सकता है।
  • बीएमआई 40 kg/m² या उससे अधिक वाले लोग इन्फ्लूएंजा की चपेट में जल्दी आ सकते हैं।
  • गर्भवती महिलाओं में इन्फ्लूएंजा वायरस का खतरा ज्यादा रहता है।
  • 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इन्फ्लूएंजा का जोखिम ज्यादा होता है।

फ्लू से बचाव कैसे करें?

  • इन्फ्लूएंजा से बचाव का एक प्रभावी तरीका वैक्सीनेशन है। इसलिए फ्लू की वैक्सीन जरूर लगवाएं।
  • खाना खाने से पहले और शौचालय का इस्तेमाल करने के बाद हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं।
  • खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें। इससे संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।
  • संक्रमित लोगों के संपर्क में आने से बचें।
  • आंखों, नाक या मुंह को बार-बार छूने से बचें।

Disclaimer: इन्फ्लूएंजा या फ्लू एक सामान्य बीमारी है। यह संक्रामक होता है और एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इसकी वजह से शरीर में दर्द, थकान और उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इन्फ्लूएंजा से बचाव के लिए वैक्सीन लगवाना जरूरी है। अगर आपको इन्फ्लूएंजा से जुड़ा कोई भी लक्षण महसूस हो तो इनकी अनदेखी बिल्कुल न करें और अगर तेजी से तबीयत बिगड़ने लगे तो इस स्थिति में डॉक्टर से मिलें।