
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : March 1, 2025 4:50 PM IST
What are the signs of imposter syndrome: अपने अपने आसपास ऐसे बहुत से लोगों को देखा होगा जो काबिल तो बहुत है लेकिन खुद पर भरोसा नहीं करते। अक्सर ऐसे लोगों को देखा होगा जो दूसरों की तुलना में अधिक योग्य और सक्षम होते हैं, फिर भी खुद को कमजोर और कमतर समझते हैं। वे अपनी सफलता को संयोग मानते हैं और हमेशा इस डर में जीते हैं कि कहीं लोग उनकी वास्तविकता को पहचान ना ले। मनोवैज्ञानिक इस मानसिक स्थिति को इम्पोस्टर सिंड्रोम कहते हैं। बहुत से लोग इस बीमारी के बारे में जान नहीं पाते हैं और जब तक उन्हें पता चल पाता है बहुत देर हो चुकी होती है। इस लेख में हम आपको बताने वाले हैं क्या है इंपोस्टर सिंड्रोम और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।
इम्पोस्टर सिंड्रोम एक मानसिक अवस्था है, जिसमें व्यक्ति अपनी उपलब्धियों को स्वीकार नहीं कर पाता और खुद को अयोग्य महसूस करता है। यह समस्या खासतौर पर उन लोगों में देखी जाती है जो अत्यधिक प्रतिभाशाली होते हैं, लेकिन अपने आत्मविश्वास की कमी के कारण अपनी क्षमताओं पर भरोसा नहीं कर पाते। कई सर्वे से पता चला है कि अधिकतर महिलाएं हैं इंपोस्टर सिंड्रोम का शिकार रहती हैं।
जब मनोवैज्ञानिकों ने इस सिंड्रोम का अध्ययन किया, तो पाया कि यह सबसे पहले उच्च शिक्षा प्राप्त महिलाओं में देखा गया था। कई महिलाएं, चाहे वे कितनी भी योग्य क्यों न हों, खुद को दूसरों से कमतर महसूस करती हैं। वे अपनी सफलता को अपनी मेहनत का परिणाम नहीं मानतीं, बल्कि इसे भाग्य या बाहरी परिस्थितियों का असर समझती हैं। यह समस्या महिलाओं के करियर और सामाजिक जीवन में कई चुनौतियां खड़ी कर सकती है। आत्म-संदेह के कारण वे नई जिम्मेदारियों से बचती हैं, उच्च पदों के लिए आवेदन करने से हिचकिचाती हैं और अपनी सफलता का पूरा श्रेय नहीं ले पातीं।
1. परवरिश और सामाजिक मान्यताएं: बचपन से ही लड़कियों को सिखाया जाता है कि वे अधिक आत्मविश्वास न दिखाएं, जिससे वे खुद को कमतर समझने लगती हैं।
2. उच्च मानक और परफेक्शनिज्म: जो लोग खुद से बहुत ज्यादा उम्मीदें रखते हैं, वे छोटी असफलताओं को भी बड़ा मानकर खुद को अयोग्य समझने लगते हैं।
3. अत्यधिक आलोचना या तुलना: बार-बार दूसरों से तुलना किए जाने पर व्यक्ति अपनी योग्यता पर शक करने लगता है।
4. कम आत्मसम्मान: अगर किसी व्यक्ति का आत्मसम्मान बचपन से ही कमजोर रहा हो, तो वह अपनी उपलब्धियों को भी संयोग मानता है।
1. अपनी उपलब्धियों को स्वीकार करें: अपनी मेहनत और सफलता को भाग्य या संयोग मानने के बजाय, इसे अपनी काबिलियत का नतीजा समझें।
2. स्वयं को दूसरों से तुलना न करें: हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है, इसलिए अपनी सफलता को दूसरों के मापदंड से न तोलें।
3. नकारात्मक सोच को बदलें: अपने विचारों पर ध्यान दें और जब भी खुद को अयोग्य महसूस करें, सकारात्मक तरीके से सोचें।
4. मदद लेने से न डरें: यदि यह समस्या ज्यादा बढ़ रही हो, तो किसी मेंटर, कोच या थेरेपिस्ट से बात करें।
5. छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं: छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर उन्हें पूरा करें और खुद को अपनी मेहनत के लिए सराहें।
इम्पोस्टर सिंड्रोम एक गंभीर मानसिक स्थिति हो सकती है, जो व्यक्ति के आत्मविश्वास को प्रभावित करती है। खासतौर पर महिलाओं में यह अधिक देखने को मिलता है, लेकिन सही जागरूकता और मानसिक प्रशिक्षण से इससे बाहर निकला जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि हमें अपनी क्षमताओं पर भरोसा करना सीखना होगा और अपनी सफलता को पूरी तरह स्वीकार करना होगा।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।