हंता वायरस क्या होता है और ये चूहों द्वारा कैसे फैलता है?
What is Hantavirus: अटलांटिक क्रूज शिप पर हंता वायरस के आउटब्रेक ने पूरी दुनिया को अलर्ट कर दिया है। इस से 3 लोगों की मौत हो गई है और कई इंफेक्टेड मामले भी मिले। आइए हंता वायरस के बारे में विस्तार से जानते हैं।
Hantavirus Outbreak: चूहों से फैलने वाला हंता वायरस जानलेवा साबित हो रहा है और दुनिया भर में इसका खौफ बढ़ रहा है। हाल में यह इसलिए चर्चा में है क्योंकि साउथ अटलांटिक महासागर में एमवी होंडियस नाम के क्रूज शिप में इसका अचानक प्रकोप देखा गया। इसका कारण यह हो सकता है कि शिप में गंदगी का खाने के स्टोरेज के कारण चूहे आ गए हों और उनके द्वारा मल व मूत्र किया गया हो। जाहिर सी बात है, चूहे जहां-जहां जाएंगे अपने शरीर की गंदगी और बैक्टीरिया को भी छोड़ेंगे।
विशेषज्ञ की मानें तो कोरोना जितना तेजी से फैलने वाला वायरस नहीं है, लेकिन अब तक इससे हो चुकी 3 मौतों और कई लोगों के बीमार होने की खबर को देखते हुए इस जानलेवा कहा जा सकता है। हंता वायरस के बारे में विस्तार से बताने से पहले आपको सामान्य जानकारी दे दें कि इस वायरस का नाम साउथ कोरिया की हंता नदी के नाम से पड़ा है।
हंता वायरस क्या है?
हंता वायरस, वायरसों का एक ऐसा परिवार है जो गंभीर बीमारियां और मृत्यु का कारण बन सकता है। ये वायरस हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) और हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS) जैसी बीमारियां पैदा करते हैं। ये मुख्य रूप से रोडेंट्स जैसे जैसे चूहे और गिलहरी द्वारा फैलते हैं। एंडीज वायरस हंता वायरस का एकमात्र ऐसा प्रकार है जिसके बारे में यह जानकारी है कि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। यह फैलाव आमतौर पर उन लोगों तक ही सीमित रहता है जिनका बीमार व्यक्ति के साथ नजदीकी संपर्क होता है।
हंता वायरस के लक्षण कैसे होते हैं?
यू.एस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की रिपोर्ट के अनुसार हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है जो फेफड़ों पर असर डालती है। हंता वायरस के लक्षण आमतौर पर किसी संक्रमित चूहे या गिलहरी के संपर्क में आने के 1 से 8 हफ्ते बाद दिखाई देने लगते हैं।
इसके अलावा सिरदर्द, चक्कर आना, ठंड लगना, पेट से जुड़ी समस्याएं, जैसे जी मिचलाना, उल्टी, दस्त और पेट दर्द आदि। बीमारी के शुरुआती दौर के 4 से 10 दिन बाद, HPS के बाद के लक्षण दिखाई देते हैं। इन लक्षणों में खांसी और सांस लेने में दिक्कत शामिल है। मरीजों को सीने में जकड़न महसूस हो सकती है, क्योंकि फेफड़ों में पानी भर जाता है।
हंता वायरस के जोखिम को कम कैसे करें?
हंता वायरस के संपर्क में आने से जोखिम को कम करने के लिए, अपने घर, काम की जगह या कैंपसाइट में चूहों-गिलहरियों से संपर्क को खत्म करें या कम से कम रखें। जैसे-
हंता वायरस का पता कैसे करें?
जिस व्यक्ति को इंफेक्टेड हुए 72 घंटे से भी कम समय हुआ हो, ऐसे किसी व्यक्ति में हंतावायरस का पता लगाना मुश्किल होता है। अगर शुरुआती टेस्ट वायरस का पता चलने से पहले ही कर लिया जाता है, तो अक्सर लक्षणों की शुरुआत के 72 घंटे बाद दोबारा टेस्ट किया जाता है। शुरुआती लक्षण जैसे कि बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, जी मिचलाना और थकान आसानी से इन्फ्लूएंजा के लक्षणों जैसे लग सकते हैं।
किन लोगों का हंता वायरस हो सकता है?
यू.एस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की दूसरी रिपोर्ट 'हंता वायरस प्रीवेंशन' बताती है कि जो लोग चूहों को संभालते हैं और उनके बाद सफाई करते हैं- जैसे कि पेस्ट वाले और जानवरों की देखभाल करने वाले। उन्हें हंता वायरस के संपर्क में आने का ज्यादा जोखिम होता है, इसलिए उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए। जो लोग जीवित चूहों के साथ काम करते हैं या उन्हें पालतू जानवर के तौर पर रखते हैं, उन्हें चूहों के काटने से या इंफेक्टेड जानवरों की लार, पेशाब, बीट या गंदे बिस्तर को छूने से हंता वायरस का संक्रमण हो सकता है।
हंता वायरस इन्फेक्शन का क्या इलाज है?
हंता वायरस इन्फेक्शन का कोई खास इलाज नहीं है। मरीजों को सपोर्टिव केयर मिलनी चाहिए, जिसमें आराम, शरीर में पानी की कमी न होने देना और लक्षणों का इलाज शामिल है।
HPS से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है, और मरीजों को सांस लेने में मदद की जरूरत पड़ सकती है, जैसे कि इनट्यूबेशन। इनट्यूबेशन एक मेडिकल प्रोसेस है जिसमें मरीज को ऑक्सीजन दिलाने में मदद के लिए मुंह के रास्ते फेफड़ों में एक ट्यूब डाली जाती है।
डिस्क्लेमर- अगर आपको हंता वायरस बीमारी का संदेह है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें और उन्हें बताएं कि आपके चूहों के संपर्क में आने की संभावना हो सकती है।