Sign In
  • हिंदी

जेनरिक दवाएं किसे कहते हैं, यह ब्रांडेड दवाओं की तुलना में सस्ती क्यों होती हैं, जानिए जेनरिक दवाओं के बारे में सबकुछ

जेनेरिक दवाएं सस्ती होने के कारण लोग उसकी गुणवत्ता और उसकी क्षमता पर संदेह करने लगते हैं, शायद ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्हें जेनेरिक दवाओं की सच्चाई पता नहीं होती है। आइये जानते हैं जेनरिक दवाओं के बारे में सबकुछ।

Written by Atul Modi |Published : August 25, 2021 9:24 PM IST

आमतौर पर जेनेरिक दवाएं (Generic Medicine) उन दवाओं को कहा जाता है जिनका कोई अपना ब्रांड नेम नहीं होता है, वह अपने सॉल्ट नेम से मार्केट में जानी-पहचानी जाती है। हालांकि कुछ दवाओं के ब्रांड नेम भी होते हैं मगर वह बहुत ही सस्ते होते हैं और यह भी जेनेरिक दवाओं की श्रेणी में ही आते हैं। जेनेरिक दवाओं को लेकर लोगों के मन में तमाम तरह की भ्रांतियां भी देखी जाती हैं। जेनेरिक दवाएं सस्ती होने के कारण उसके गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किए जाते हैं, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि, लोगों में जेनेरिक दवाओं से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है। क्योंकि यह सस्ती होने के साथ-साथ कारगर भी है।

जेनेरिक दवाओं से जुड़ी उन तमाम बातों को समझने के लिए हमने स्टेहैप्पी फार्मेसी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आयुषी जैन से बात की जिन्होंने हमें विस्तार से जेनेरिक दवाओं के बारे में बताया है, आइए जानते हैं।

प्रश्न-1: जेनरिक दवाईयां क्या हैं?

उत्‍तर: अगर हम आपसे कहें कि जेनरिक दवाईयां ब्रांडेड दवाओं (Branded Medicine) के समान होती हैं, तो क्या आप इस पर विश्वास करेंगे? हां, इस पर विश्वास करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन यही सच है। जेनरिक दवाओं में भी वही सॉल्ट होता है जो ब्रांडेड कंपनियों के पास होता है। दरअसल जब ब्रांडेड दवाओं का सॉल्ट मिश्रण और उत्पादन से एकाधिकार समाप्त हो जाता है तब उन्ही के फार्मूले और सॉल्ट के प्रयोग से जेनरिक दवाईयों का बनाई जाती है। इसलिए जेनरिक दवाएं अपने समकक्षों के समान ही होती है, इनमें सिर्फ पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग का अंतर होता है।

Also Read

More News

प्रश्न-2- जेनरिक दवाईयां ब्रांडेड दवाओं की तुलना में सस्ती क्यों होती हैं?

उत्‍तर: यहां अनिवार्य रूप से तीन प्रमुख कारण हैं, जिनकी वजह से जेनरिक दवाईयां सस्ती और किफायती होती हैं:

कोई विकास शुल्क नहीं: जब कोई कंपनी एक नई दवा बनाती है, तो इसके लिए रिसर्च, डेवलपमेंट, मार्केटिंग, प्रचार और ब्रांडिंग पर पर्याप्त लागत आती है, लेकिन जेनेरिक दवाएं, पहले डेवलपर्स के पेटेंट की अवधि समाप्त होने के बाद उनके फार्मूलों और सॉल्ट का उपयोग करके विकसित की जाती है। इसलिए जेनरिक दवा निर्माताओं को रिसर्च और उत्पादन की लागत कम लगती है। इसके अलावा, जेनरिक दवाओं के निर्माण में मनुष्यों और जानवरों पर बार-बार क्लिनिकल ट्रायल करने का भी कोई खर्च नहीं होता, क्योंकि ये सभी परीक्षण मूल निर्माताओं द्वारा पहले किए जा चुके होते हैं।

कोई मार्केटिंग खर्च नहीं: जेनरिक दवाईयां बड़े स्तर पर मार्केटिंग, प्रमोशन और सेलिंग स्ट्रेटजी के बगैर साधारण तरीकों से बेची जाती हैं। ऐसा होने से इन दवाईयों की कीमतों पर काफी प्रभाव पड़ता है, जिससे इनकी कीमतें अन्य ब्रांडेड दवाईयों की तुलना में काफी सस्ती हो जाती हैं। इसके साथ ही इन दवाईयों के लिए विशेष और ब्रांड विशिष्ट पैकेजिंग की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए ये दवाईयां और भी सस्ती हैं और सभी लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध हैं। यही वजह है कि सरकार भी जेनरिक दवाओं के उपयोग को प्रोत्साहित करती है क्योंकि ये अधिक सुलभ और किफायती हैं।

अधिक आपूर्ति: जब जेनरिक दवाएं बाजार में उतारी जाती हैं, तो आपूर्ति स्टॉक सिर्फ ब्रांडेड दवाओं से बदल जाता है, जो अक्सर मात्रा में ब्रांडेड प्लस जेनरिक तक सीमित होती हैं और अधिक मात्रा में होती हैं। इसलिए जेनरिक दवाओं की आपूर्ति बढ़ जाती है। अर्थशास्त्र के सरल नियम के मुताबिक, जब आपूर्ति बढ़ती है, तो जेनरिक दवाओं की कीमतों में गिरावट आती है, चाहे दवाईयों की मांग कम या ज्यादा स्थित रहती हो। इसी वजह से अन्य ब्रांडेड दवाईयों की तुलना में जेनरिक दवाईयां कई गुना सस्ती हो रही हैं।

प्रश्न-3- क्या जेनरिक दवाईयां ब्रांडेड दवाईयों की तरह ही असरदार हैं?

उत्‍तर: जैसा कि हमने पहले बताया कि जेनरिक दवाईयां बनाने में उन्हीं फार्मूलों और सॉल्ट का उपयोग किया जाता है, जो ब्रांडेड कंपनियां पहले ही प्रयोग कर चुकी हैं। इसलिए जेनरिक दवाईयों का ब्रांड नेम वाली दवाईयों के समान ही जोखिम और लाभ हैं। सभी सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए एक कठोर समीक्षा के बाद ही जेनेरिक दवाओं को मंजूरी दी जाती है। इसलिए जेनरिक दवा भी मनुष्य के शरीर पर पेटेंटे दवा के समान ही असर करेगी। यदि जेनरिक दवाओं को ब्रांड नेम वाली दवाओं के समान रूप से, समान डोज और सावधानी पूर्वक लिया जाता है तो इसका असर भी वैसा ही होगा, जैसे ब्रांड नेम वाली दवाई करेगी। जेनरिक दवाईयां, पेटेंट उत्पाद के समान गुणवत्ता और विनिर्माण के उच्च मानकों को भी पूरा करती हैं। यह मानक सभी जेनेरिक दवाओं पर लागू होता है।

प्रश्न-4- जेनरिक और ब्रांडेड (पेटेंटे दवाईयों) में क्या अंतर है?

उत्‍तर: जेनरिक दवाएं, पेटेंटे या ब्रांड नेम वाली दवाओं के बिल्कुल समान होती हैं। जेनरिक दवाओं को अगर मूल दवाओं की तरह ही एक समान खुराक में, उतनी ही मात्रा और समान तरीके से लिया जाए तो उनका असर भी पेटेंट या ब्रांड दवा की तरह ही होगा। जेनरिक दवाओं का जैसे मूल दवाओं की तरह सकारात्मक असर होता है वैसे ही समान रूप से नकारात्मक असर भी समान रूप से हो सकता है। जेनरिक और ब्रांड नेम वाली दवाईयों में मुख्य रूप से ब्रांडिंग, पैकेजिंग, स्वाद और रंगों का अंतर होता है। इनकी मार्केटिंग स्ट्रेटजी में भी अंतर है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन दवाईयों की कीमतों में भी बहुत अंतर होता है। ऊपर हमनें इन दवाओं की कीमतों में अंतर के कारणों को पहले ही स्पष्ट करके बताया है।

प्रश्न-5- कैसे पहचानें, कौन सी दवा जेनरिक है और कौन सी नहीं?

उत्‍तर: जेनरिक दवाओं का अक्सर मूल दवाओं (पेटेंट दवाओं) के जैसा या अलग नाम होता है। केमिस्ट जेनरिक दवाओं में प्रयोग होने वाले सॉल्ट्स की पूरी जानकारी रखते हैं और वे ग्राहकों को इसके बारे में बता भी सकते हैं। दवाई का नाम इनकी पहचान के लिए महत्वपूर्ण संकेतकों में से एक है। इसी तरह जेनरिक दवाईयों की पहचान के लिए इंटरनेट पर सॉल्ट नेम के माध्यम से खोज की जा सकती है, जिससे इनकी पहचान करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही जेनरिक दवाओं की कीमतें ब्रांडेड नेम वाली दवाओं की तुलना में बेहद कम होती हैं और उनका असर उतना ही होता है। बाजार में जेनरिक दवाओं के प्रयोग को लेकर कई तरह के मिथक और टैबू मौजूद हैं। इनमें एक आम धारणा यह है कि जेनरिक दवाईयां असरदार नहीं होती हैं। ये दवाईयों असर करने में काफी समय लेती हैं, इनके निर्माण में घटिया मेटेरियल लगाया जाता है और ये सुरक्षित नहीं हैं। हालांकि ये सभी धारणाएं गलत और बेबुनियादी साबित हो चुकी हैं। जेनरिक दवाईयां पूरी तरह से सुरक्षित, कारगर, सभी की पहुंच में और किफायती हैं।

नोट: यह लेख स्टेहैप्पी फार्मेसी की कार्यकारी निदेशक आरुषि जैन से हुई बातचीत पर आधारित है।

Total Wellness is now just a click away.

Follow us on