
प्रिया मिश्रा
प्रिया को पिछले 4 सालों से हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर लिखने का अनुभव है। इन्हें हेल्थ और ... Read More
Written By: priya mishra | Published : August 23, 2025 3:09 PM IST
Fatty Heart Symptoms: आजकल के गलत खानपान और खराब जीवनशैली के कारण कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में हार्ट की बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं। पहले जहां दिल से जुड़ी बीमारियां बुजुर्गों तक सीमित मानी जाती थी, वहीं अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं और अपनी जान गंवा रहे हैं। दिल से जुड़ी ऐसी ही एक गंभीर बीमारी है फैटी हार्ट, जिसे कार्डियक स्टिओटोसिस भी कहा जाता है। यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो अब अधिक ध्यान देने योग्य बनती जा रही है। उच्च रक्तचाप या डायबिटीज जैसी आम बीमारियों के मुकाबले, फैटी हार्ट अक्सर चुपचाप विकसित होता है, बिना किसी शुरुआती चेतावनी के, लेकिन इसका असर समग्र स्वास्थ्य एवं जीवनशैली पर बहुत गंभीर हो सकता है। डॉक्टरों का मानना है कि जागरूकता, समय पर पहचान और जीवनशैली में बदलाव ही इस स्थिति को आगे बढ़ने से रोकने के सबसे प्रभावी उपाय हैं। आज इस लेख में डॉ सर्वेश कुमार प्रजापति, कंसल्टेंट - कार्डियोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम से जानते हैं फैटी हार्ट क्या है, इसके कारण, लक्षण और इलाज के बारे में विस्तार से -
जब हृदय की मांसपेशियों में अतिरिक्त वसा जमा हो जाती है, तो उसे फैटी हार्ट कहते हैं। सामान्यतः थोड़ी मात्रा में वसा होना ठीक है, लेकिन बहुत अधिक वसा रक्त पंप करने की हृदय की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। समय के साथ, यह हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालती है और हार्ट फेल्योर या धड़कन में गड़बड़ी जैसे जटिलताओं का खतरा बढ़ाती है। यह स्थिति मोटापा, अनियंत्रित डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी होती है। गलत जीवनशैली, जैसे अधिक शराब पीना, व्यायाम की कमी और अस्वस्थ वसा व शुगर से युक्त भोजन भी बड़ा योगदान देता है।
फैटी हार्ट की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती अवस्था में स्पष्ट लक्षण सामने नहीं आते। कई बार लोग तब तक नहीं समझ पाते, जब तक हालत गंभीर न हो जाए। फिर भी, कुछ चेतावनी देने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए — लगातार थकान, सांस लेने में परेशानी, सीने में असुविधा, दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना, और पैरों या एड़ियों में सूजन। डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर ये लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सा जांच करवाएं। इकोकार्डियोग्राफी या एमआरआई जैसे परीक्षणों से हृदय में वसा की मात्रा का पता लगाया जा सकता है और उपचार के सही तरीके निर्धारित किए जा सकते हैं।
फैटी हार्ट के कारण आधुनिक जीवनशैली से गहराई से जुड़े हैं। प्रोसेस्ड फूड, लंबे समय तक शारीरिक निष्क्रियता और बढ़ता मोटापा इसकी बड़ी वजहें हैं। डायबिटीज जैसी चयापचय संबंधी बीमारियों वाले लोगों में यह जोखिम और बढ़ जाता है, क्योंकि हाई ब्लड शुगर स्तर हृदय में वसा जमाव को तेज कर देता है। जेनेटिक्स भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं, यानी कुछ लोग स्वस्थ आदतों के बावजूद ज्यादा जोखिम में होते हैं। इसलिए व्यक्तिगत जोखिम कारकों और पारिवारिक इतिहास की जानकारी लेना रोकथाम का महत्वपूर्ण कदम है।
फैटी हार्ट की रोकथाम मुख्यतः जीवनशैली में सुधार पर निर्भर करती है। डॉक्टर संतुलित आहार लेने की सलाह देते हैं, जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और लीन प्रोटीन शामिल हों। रेड मीट, मीठे पेय और तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें, साथ ही शराब का सेवन भी सीमित करें। व्यायाम रोकथाम में सबसे कारगर उपाय है। तेज चलना, साइक्लिंग या स्विमिंग जैसी गतिविधियां रोजाना कम से कम 30 मिनट करने से हृदय के पास जमा वसा को काफी कम किया जा सकता है। वजन नियंत्रण, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखना भी जरूरी है।
अगर फैटी हार्ट की पहचान हो जाए, तो उपचार व्यक्ति की स्थिति के अनुसार निर्धारित किया जाता है। संबद्ध समस्याओं जैसे उच्च रक्तचाप, डायबिटीज या उच्च कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण के लिए दवाइयां दी जा सकती हैं। कार्डियक रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम, जिसमें एक्सरसाइज, डाइट और लाइफस्टाइल सपोर्ट शामिल है, हृदय की कार्यक्षमता और संपूर्ण स्वास्थ्य सुधारने में मदद करते हैं। गंभीर मामलों में हृदय की कार्यक्षमता स्थिर करने के लिए विशेष उपचार भी आवश्यक हो सकता है। हालांकि, अधिकतर मरीजों को लगातार जीवनशैली सुधार और नियमित मेडिकल निगरानी से ही बड़ा लाभ मिलता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।