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Endometriosis Expaliner: एंडोमेट्रियोसिस क्या है? पीरियड्स का दर्द कब बन जाता है बीमारी का संकेत, जानें लक्षण

पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को अक्सर महिलाएं सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो एंडोमेट्रियोसिस हो सकती है। आइए डॉक्टर से जानते हैं एंडोमेट्रियोसिस क्या है और इस बीमारी के कौन से लक्षणों पर गौर करना चाहिए?

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Written By: Ashu Kumar Das | Updated : July 8, 2026 12:06 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Nikita Trehan

द कपिल शर्मा शो की एक्ट्रेस सुमोना चक्रवर्ती काफी समय से लाइमलाइट से दूर थीं। टीवी और सोशल मीडिया से दूरी पर अब सुमोना चक्रवर्ती ने खुलासा किया है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करके सुमोना ने बताया कि एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) की समस्या को हटाने के लिए उन्होंने सर्जरी करवाई है। सुमोना ने अपने पोस्ट में बताया कि वह लंबे समय से एंडोमेट्रियोसिस से जूझ रही थी। इलाज और दवाओं के बाद जब उन्हें इस बीमारी से राहत नहीं मिली तो उन्होंने सर्जरी का ऑप्शन अपनाया। सुमोना की सर्जरी के बाद हर लड़की को यह जानना चाहिए कि आखिरकार एंडोमेट्रियोसिस क्या होता है और इस स्थिति में क्या करना चाहिए।

दिल्ली के सनराइज हॉस्पिटल की सीनियर गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. निकिता त्रेहन का कहना है कि पीरियड्स का दर्द तो हर लड़की को होता है, इसमें नया क्या है? यह एक ऐसी लाइन है जो अक्सर पीरियड्स के नाम पर सुनने को मिल जाती है। लेकिन क्या हर बार पीरियड्स में होने वाला दर्द सामान्य होता है? अगर हर महीने दर्द इतना बढ़ जाए कि स्कूल, कॉलेज या ऑफिस जाना मुश्किल हो जाए, पीरियड्स के दौरान उठना, बैठना यहां तक की रोजाना के काम भी मुश्किल लगने लगे, तो यह कोई आम बात नहीं है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट बताती है कि पीरियड्स में महिलाओं को असहनीय दर्द होने के साथ उल्टी, चक्कर और कमजोरी महसूस होने लगे, तो यह एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) जैसी बीमारी का संकेत हो सकता है।

एंडोमेट्रियोसिस महिलाओं में होने वाली एक आम लेकिन अक्सर देर से पहचानी जाने वाली बीमारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 19 करोड़ (190 million) महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस से प्रभावित हैं और दिन प्रतिदिन महिलाओं में पीरियड्स से जुड़ी इस गंभीर समस्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि एंडोमेट्रियोसिस की परेशानी शुरुआती स्टेज में पीरियड्स जैसी ही लगती है।

आखिर क्या है एंडोमेट्रियोसिस?

एंडोमेट्रियोसिस को आसान  भाषा में समझें तो हर महीने पीरियड्स के दौरान गर्भाशय (बच्चेदानी) की अंदरूनी परत, जिसे एंडोमेट्रियम कहा जाता है, टूटकर शरीर से बाहर निकलती है। लेकिन एंडोमेट्रियोसिस में यही परत जैसी कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर भी बढ़ने लगती हैं। ये अंडाशय (Ovary), फैलोपियन ट्यूब, पेल्विक हिस्से या कभी-कभी शरीर के अन्य अंगों पर भी पहुंच सकती हैं।

हर महीने हार्मोनल बदलाव के कारण ये कोशिकाएं भी उसी तरह प्रतिक्रिया करती हैं जैसे गर्भाशय की परत करती है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां बनने वाला खून और ऊतक शरीर से बाहर नहीं निकल पाते। समय के साथ यह सूजन, जलन, चिपकाव (Adhesions) और तेज दर्द का कारण बन सकता है।

क्या हर महिला को इसका खतरा होता है?

इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ. निकिता त्रेहन कहती हैं कि हां एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी किसी भी ऐसी महिला जिसे पीरियड्स आते हैं उसे हो सकती है। आमतौर पर इसकी शुरुआत 15 से 45 साल की उम्क के बीच देखे जाते हैं। लेकिन लड़कियों में पीरियड्स की शुरुआती स्टेज में ही इस बीमारी का पता लग जाता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ बताती हैं कि एंडोमेट्रियोसिस से जुड़ी सबसे बड़ी परेशानी की बात यह है कि लड़कियों को होने वाले इस दर्द को परिवार नॉर्मल कहता है और टालने लगता है। इसी वजह से बीमारी की पहचान में काफी देरी हो जाती है।

एंडोमेट्रियोसिस क्यों होता है?

WHO की रिपोर्टबताती है कि किसी भी लड़की को एंडोमेट्रियोसिस होने के कई कारण होते हैं। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैः

1. पीरियड्स का खून पेट में जाना

एंडोमेट्रियोसिस होने का सबसे बड़ा कारण है पीरियड्स के खून का गलत तरीके से संचारित होन। इसमें पीरियड्स का कुछ खून शरीर से बाहर आने की बजाय फैलोपियन ट्यूब के जरिए पेट के अंदर चला जाता है। इससे एंडोमेट्रियम जैसी कोशिकाएं दूसरी जगहों पर जाकर बढ़ने लगती हैं।

2. जेनेटिक्स

अगर किसी महिला के परिवार में एंडोमेट्रियोसिस का इतिहास रहा हो, उसे एंडोमेट्रियोसिस का खतरा रहता है।

3. हार्मोनल बदलाव

एस्ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन इस बीमारी को बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है।

एंडोमेट्रियोसिस के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

डॉ. निकिता त्रेहन कहती हैं एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण हर महिला में अलग- अलग होते हैं। कुछ महिलाओं में बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है लेकिन लक्षण कम दिखाई देते हैं, जबकि कुछ को शुरुआत से ही तेज दर्द होता है। एंडोमेट्रियोसिस के शुरुआती लक्षणों में मुख्य रूप से शामिल हैः

  1. पीरियड्स में दौरान बहुत ज्यादा तेज दर्द
  2. पीरियड्स के अलावा भी पेल्विक दर्द
  3. पार्टनर के साथ संबंध बनाते समय दर्द होना
  4. बहुत ज्यादा या लंबे समय तक ब्लीडिंग होना
  5. मल त्याग या पेशाब के समय दर्द रहना
  6. बिना काम किए थकान रहनाडॉ. निकिता त्रेहन कहती हैं कि महिलाओं को लंबे समय तक अगर अपने अंदर यह लक्षण नजर आते हैं तो उन्हें इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पीरियड्स के साथ नजर आने वाले इन लक्षणों के बारे में अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

एंडोमेट्रियोसिस की जांच कैसे होती है?

एंडोमेट्रियोसिस का पता लगाने के लिए सबसे पहले महिलाओं को अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दी जाती है। अल्ट्रासाउंड करवाने से पहले डॉक्टर कई सवाल पूछते हैं। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैः

पीरियड्स के दौरान दर्द कब शुरू होता है?

  1. क्या हर महीने पीरियड्स में दर्द होता है?
  2. दर्द की वजह से रोजमर्रा का काम रुक जाता है?
  3. परिवार में किसी और महिला को यह बीमारी रही है?

क्या सिर्फ अल्ट्रासाउंड से एंडोमेट्रियोसिस का पता चल सकता है?

स्त्री रोग विशेषज्ञ के अनुसार, किसी महिला को शुरुआती स्टेज में एंडोमेट्रियोसिस की परेशानी है तो इसका पता अल्ट्रासाउंड के जरिए चल सकता है। अगर अंडाशय में एंडोमेट्रियोसिस की वजह से सिस्ट (Endometrioma) बन गई है, तो अल्ट्रासाउंड में वह दिखाई दे सकती है। लेकिन शुरुआती या हल्के एंडोमेट्रियोसिस के कई मामले सामान्य अल्ट्रासाउंड में नजर नहीं आते है। इस स्थिति में हम महिलाओं को MRI जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं, खासकर तब जब बीमारी गहरी जगहों पर होने का संदेह हो। कुछ मामलों में बीमारी की पुष्टि के लिए लेप्रोस्कोपी (Laparoscopy) की जाती है। इसमें छोटे चीरे के जरिए कैमरा डालकर पेट के अंदर देखा जाता है।

दिमाग पर क्या असर डालता है एंडोमेट्रियोसिस?

लगातार दर्द केवल शरीर को ही नहीं, मन को भी प्रभावित करता है। कई महिलाएं बार-बार दर्द होने की वजह से चिड़चिड़ापन, तनाव, चिंता या उदासी महसूस करने लगती हैं। कुछ मामलों में लंबे समय तक रहने वाला दर्द अवसाद (डिप्रेशन) का कारण भी बन सकता है। अगर आपको लगने लगे कि दर्द की वजह से आपकी नींद, काम, रिश्ते या मानसिक शांति प्रभावित हो रही है, तो इसे सामान्य मानकर न टालें।

एंडोमेट्रियोसिस का इलाज क्या है?

एंडोमेट्रियोसिस का इलाज करने के लिए डॉक्टर कई ऑप्शन अपनाते हैं। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैः

1. दर्द कम करने वाली दवाएं

अगर दर्द ज्यादा है, तो डॉक्टर सीमित समय के लिए दर्द कम करने वाली दवाएं दे सकते हैं। हालांकि एंडोमेट्रियोसिस के मामलों में बिना डॉक्टर की सलाह के दवा खाना गलत होता है।

2. हार्मोनल थेरेपी

कई मामलों में हार्मोनल दवाएं दी जाती हैं ताकि एंडोमेट्रियोसिस के बढ़ने के प्रोसेस को कम किया जा सके और महिला को पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द से राहत मिल सके।

3. लेप्रोस्कोपिक सर्जरी

अगर दवाओं से आराम नहीं मिल रहा, सिस्ट बन गई है, तो डॉक्टर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।

डॉक्टर के साथ बातचीत के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि एंडोमेट्रियोसिस ऐसी बीमारी है, जिसके बारे में आज भी जागरूकता की कमी है। सबसे बड़ी समस्या यह नहीं कि बीमारी होती है, बल्कि यह है कि महिलाएं सालों तक अपने दर्द को "सामान्य" मानकर सहती रहती हैं। याद रखिए, पीरियड्स का दर्द अगर आपकी जिंदगी पर असर डाल रहा है, तो वह सिर्फ दर्द नहीं, बल्कि शरीर का एक संकेत भी हो सकता है। समय पर जांच, सही इलाज और परिवार का सहयोग न केवल दर्द को कम कर सकता है, बल्कि भविष्य में होने वाली परेशानियों से भी बचा सकता है।