
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Published : April 29, 2026 12:13 PM IST
जब कोई व्यक्ति किसी गंभीर हालत में अस्पताल जाता है तो अस्पताल का सबसे पहला काम उसे एडमिट कर जरूरी इलाज शुरू करना होता है। लेकिन देश की राजधानी दिल्ली से अभी एक ऐसा मामला सामने आया है जो ठीक इसके उलट है। एक महिला बेहद नाजुक हालत में अस्पताल गई और उसे 1 नहीं 3 बड़े अस्पतालों ने मना कर दिया। जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो 2 जजों की बेंच ने इन तीनों अस्पतालों को फटकार लगाकर कहा है कि महिला को एमरजेंसी ट्रीटमेंट क्यों नहीं दिया। आइए पूरा मामला जानते हैं क्या है और ये भी जानते हैं कि एमरजेंसी ट्रीटमेंट क्या होता है?
सुनवाई के दौरान जब कोर्ट को बताया कि एक महिला जिस पर उसके पति द्वारा कई बार चाकू से हमला किया गया था औ वह बेहद नाजुक हालत में जब अस्पताल पहुंचती है तो उसे एडमिट करने से साफ मना कर दिया जाता है। कारण? अस्पताल कहते हैं कि हालत बेहद नाजुक है इसलिए एडमिट नहीं किया जा सकता। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस बात पर नाराजगी जताई और पूछा कि 'एमरजेंसी ट्रीटमेंट क्यों नहीं दिया गया?' कोर्ट ने जांच अधिकारी को ऑर्डर दिया है कि वह मामले की पूरी तरह जांच करें और रिपोर्ट समिट करें कि इन अस्पतालों (कैलाश अस्पताल, गुरु तेग बहादुर अस्पताल, आरके अस्पताल) ने इलाज देने से मना क्यों किया। हालांकि बाद में महिला को एम्स अस्पताल में भर्ती किया गया और उसका इलाज शुरू हुआ।
मेडिकल एथिक्स और कानून के हिसाब से क्योंकि यह महिला बुरी तरह से जख्मी थी ऐसे में उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती करा के इलाज मिलना चाहिए था। जिस समय उसे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजा जा रहा था वह उसके गोल्डन ऑवर (चोट लगने के तुरंत बाद का सबसे महत्वपूर्ण समय) थे जिस समय उसे तुरंत इलाज की जरूरत थी।
अगर किसी कंडीशन में आपको या आपके किसी जानने वाले को इस स्थिति का सामना करना पड़े तो आपको यह पता होना चाहिए कि ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए। अगर कोई अस्पताल इमरजेंसी के समय जरूरी इलाज देने से मना करता है और कहता है कि यह पुलिस केस है तो आप उसे परमानंद कटारा वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया केस की याद दिला सकते हैं। यह एक ऐतिहासिक फैसला था जिसमें सुप्रीम ने कहा था कि इमरजेंसी की स्थिति में कोई भी अस्पताल जरूरी इलाज देने से मना नहीं कर सकता है। अगर आपको एमरजेंसी काउंटर पर दिक्कत आए तो आप तुरंत अस्पताल के CMO या मेडिकल सुपरिटेंडेंट से बात करें। उनसे लिखित में मांगें कि वे इलाज से क्यों मना कर रहे हैं। अक्सर लिखित शिकायत की बात सुनकर अस्पताल पीछे हट जाते हैं।
एमरजेंसी ट्रीटमेंट वह इलाज होता है जो एक मरीज के लिए गोल्डन ऑवर माना जाता है। अगर किसी एक्सीडेंट या कोई कंडीशन में व्यक्ति गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचता है तो उसे तुरंत इलाज मिलना चाहिए जिससे उसकी हालत स्थिर की जा सके। इसमें अस्पतालों को बिना किसी पुलिस कार्यवाही या कागजी औपचारिकताओं का इंतजार किए तुरंत खून रोकना, दर्द कम करना और जीवन रक्षक उपचार शुरू करना होता है।
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