क्‍या है डिस्लेक्सिया ? ज्यादातर बच्चों में होती है यह बीमारी

ज्यादातर डिस्लेक्सिया बीमारी 3 से 15 साल के बच्चों को होती है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Published : August 8, 2018 6:28 PM IST

डिस्लेक्सिया एक ऐसी बीमारी होती है जिसमें बच्चे बड़े तो होते जाते हैं लेकिन उनका बोद्धिक विकास रूक सा जाता है। ज्यादातर देखा गया है कि बच्चे पढ़ने, लिखने और बोलने में परेशानी का सामना करते हैं। जो बच्चे इस बीमारी से ग्रसित होते हैं उनमें शब्दों की पहचान या बोलने में ज्यादा समस्या देखी जाती है।

डिस्लेक्सिया बीमारी वैसे तो बहुत कम लोगों को होती है लेकिन यह तीन तरह की होती है जो जीवन में कभी भी होने की संभावना भी रखती है। आइए जानते हैं इस बीमारी के बारे में और इसका इलाज की क्या स्थिति है।

क्या है डिस्लेक्सिया ?

डिस्लेक्सिया रोग एक दिमाग की बीमारी है जो तीन तरह की होती है। तीनों तरह की डिस्लेक्सिया के लक्षण और कारण अलग होते हैं इसलिए इसे तीन स्टेज के तौर पर भी देखा जाता है।

  1. प्राइमरी डिस्लेक्सियाः इस स्टेज की बीमारी में बच्चे अक्षर की पहचान और पढ़ना ठीक से नहीं कर पाते। समय का आभास भी बच्चे को नहीं हो पाता।
  2. सेकेंड्री डिस्लेक्सियाः यह समस्या बच्चों में जन्मजात होती है जिसके कारण बच्चों का दिमागी विकास नहीं हो पाता है। इसमें बच्चे ठीक से बोल भी नहीं पाते।
  3. ट्रॉमा डिस्लेक्सियाः सामान्यतया यह बीमारी किसी दिमागी चोट की वजह से होती है। इसमें बच्चे आवाज सुन नहीं पाते जिससे बोलने में भी रूकावट आती है।

डिस्लेक्सिया के लक्षण

डिस्लेक्सिया के लक्षणों को अगर देखा जाय तो वह जल्द बच्चों में पता नहीं हो पाता है। अगर बच्चों में यह बीमारी है तो वह तब पता चलती है जब बच्चे स्कूल जाना शुरू करते हैं या पढ़ना प्रारम्भ करते हैं। ज्यादातर यह बीमारी 3 से 15 साल के बच्चों को होती है और अगर आकंड़ों के हिसाब से देखा जाय तो यह 100 में से 3 बच्चों में होने की संभावना होती है।

अगर बच्चों में इसके शुरूआती लक्षण पहचान लिए जाय तों इसका इलाज संभव है। एक्सपर्ट्स की माने तो ज्यादातर बच्चों में इस समस्या का पता तब चलता है जब बच्चे स्कूल जाना प्रारम्भ करते हैं।

चित्रस्रोत-Shutterstock.

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