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Doom Scrolling क्या होती है और इससे दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते समय सभी बुरी खबरे ही आती हैं और फिर दिमाग में वहीं चलता है? इसे डूम स्क्रॉलिंग कहा जाता है। आइए जानते हैं यह दिमाग को कैसे प्रभावित करता है।

Written By Vidya Sharma
Updated : June 17, 2026 11:19 AM IST

डूम स्क्रॉलिंग

आपने ऐसे लोग जरूर देखें होंगे, जिनकी फीड पर ज्यादातर बुरी खबरे आती हैं। जब मोबाइल या सोशल मीडिया पर लगातार नकारात्मक, डराने वाली या स्ट्रेस बढ़ाने वाली खबरें, पोस्ट और वीडियो देखी जाती रहें, भले ही उससे आपका मूड खराब हो रहा हो। इस स्थिति को डूम स्क्रोलिंग कहा जाता है। यह किसी की हत्या, एक्सीडेंट, बीमारियां या अन्य घटनाओं से जुड़ी हो सकती है। ऐसा करने वाले व्यक्ति की स्ट्रेस और टेंशन बढ़ रहती हैं। यह समस्या आज के समय में युवाओं, कामकाजी लोगों के साथ-साथ हर उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ रही है। आइए साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर मालिनी सबा से जानते हैं कि डूम स्क्रॉलिंग दिमाग को कैसे प्रभावित करती है?

दिमाग में बुरी चीजें फीड करता है डूम स्क्रॉलिंग

साइकोलॉजिस्ट मालिनी सबा के अनुसार "हमारा दिमाग जो देखता है, उन चीजों के बारे में कई बार सोचता है। खासकर अगर वो खतरे से जुड़ी हों तो ध्यान अपने आप अट्रेक्ट हो जाता है, क्योंकि हमें उन्हें अपने या अपने परिवार की सेफ्टी के लिए जरूरी समझते हैं। इससे स्ट्रेस और टेंशन दोनों बढ़ते हैं।" आइए डूम स्क्रॉलिंग से दिमाग पर होने वाले असर के बारे में जानते हैं।

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तनाव के साथ बढ़ती है चिंता

जब कोई लगातार नेगेटिव कंटेंट देखता है तो उस व्यक्ति को लग सकता है कि जैसे दुनिया में जो भी हो रहा है सब बुरा ही हो रहा है। ऐसे में हमारा खुद के लिए व परिवार जनों के लिए चिंता, बेचैनी और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। यह चीजें हमारी सेहत पर भी बुरा असर डाल सकती हैं।

स्लीप क्वालिटी पर असर पड़ता है

इसमें कोई दो राय नहीं है कि बहुत से लोग सोने से पहले तक फोन पर सोशल मीडिया देखते हैं। लेकिन रात को सोते समय ऐसी नेगेटिव पोस्ट या वीडियो देखना आपके दिमाग पर लंबे समय तक असर डाल सकता है। यहां तक कि आपको सोते समय यही ख्याल आ सकते हैं। ऐसे में दिमाग एक्टिव रहता है और नींद की क्वालिटी भी खराब हो सकती है

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फोकस करने में परेशानी

साइकोलॉजिस्ट सबा बताती हैं कि "कई बार-बार मोबाइल चेक करने और लगातार नई जानकारी देखने से दिमाग डिस्ट्रेक्ट होता है। इसका असर बच्चों की पढ़ाई, ऑफिस जाने वालों के काम और सभी के डेली के काम पर भी पड़ सकता है।"

बार-बार मूड खराब रहना

एक्सपर्ट के अनुसार "डूम स्क्रॉलिंग करने वाले लोगों में उदासी, चिड़चिड़ापन और मानसिक थकान जैसे लक्षण अधिक देखे जा सकते हैं। ऐसा सोशल मीडिया पर लगातार नकारात्मक सामग्री देखने से हो सकता है, जिससे व्यक्ति का इमोशनल बैलेंस भी प्रभावित हो सकता है।" वह आगे बताती हैं कि "घंटों तक स्क्रीन देखने और लगातार जानकारी फीड करने से दिमाग सिर्फ थका हुआ महसूस हो सकता है। कई लोगों को इसकी वजह से मानसिक थकावट, सिरदर्द और उत्पादकता में कमी महसूस होती है।"

डूम स्क्रॉलिंग से कैसे बचें?

अगर आप अपने इस आदत को सुधारना चाहते हैं तो उसे लिए साइकोलॉजिस्ट की बताई इन आदतों को सुधारें- 

  • सोशल मीडिया का इस्तेमाल लिमिट में करें।
  • सोने से कम से कम 1 घंटे पहले फोन को दूर रख दें।
  • सही और ट्रस्टेड सोर्स से ही खबरें पढ़ें।
  • नेगेटिव खबरों के साथ पॉजिटिव और मोटिवेशनल कंटेंट भी देखें।
  • दिन में कुछ समय मोबाइल और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर रहें।

डिस्क्लेमर: डूम स्क्रॉलिंग एक नॉर्मल डिजिटल हैबिट लग सकती है, लेकिन इसका असर मेंटल हेल्थ पर बुरी तरह से पड़ सकता है। आप आस-पास घट रही घटनाओं की जानकारी रखें, लेकिन उन्हें अपने दिमाग में बैठाकर न रखें।