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Written By: Atul Modi | Updated : May 25, 2022 3:36 PM IST
बहुत सी महिलाएं पीसीओडी (PCOD) और पीसीओएस (PCOS) के बीच बहुत कंफ्यूज रहती हैं और उन्हें लगता है कि दोनों एक ही चीज हैं परन्तु इन दोनों में बहुत अंतर होता है और दोनों ही बहुत कठिन स्थितियां हैं। हालांकि दोनों ही स्थितियां ओवरी से जुड़ी हुई हैं और दोनों के द्वारा ही हार्मोन्स असंतुलित होते हैं। फिर भी इन दोनों में बहुत बड़े बड़े अंतर हैं। महिलाओं की दो ओवरीज होती हैं और वह हर महीने एक एग रिलीज करती हैं। यह ओवरीज महिलाओं में कुछ हार्मोन्स भी रिलीज करती हैं जो फर्टिलिटी, मासिक धर्म व फेशियल हेयर आदि को नियंत्रित करती हैं।
पीसीओडी एक ऐसी स्थिति है जिसमें हमारी ओवरी बहुत ही कम मैच्योर एग रखती है। वह फिर बाद में सिस्ट बन जाते हैं। इसके पीछे के बहुत से कारण होते हैं जैसे ज्यादा वजन का बढ़ जाना, स्ट्रेस लेना व हार्मोन्स का अनियमित होना आदि शामिल हैं। इसके कुछ मुख्य लक्षण अनियमित मासिक धर्म, पेट का वजन बढ़ जाना, बांझपन आदि शामिल हैं। इस स्थिति में ओवरी अपने आकार से बड़ी हो जाती है और वह एंड्रोजन की अधिक मात्रा रिलीज करने लगती है। इससे महिलाओं की फर्टिलिटी पर असर पड़ता है।
यह एक मेटाबोलिक डिसऑर्डर है जोकि पीसीओडी से भी ज्यादा खतरनाक व गंभीर है। इस स्थिति में ओवरी पुरुष हार्मोन ज्यादा मात्रा में रिलीज करना शुरू कर देती है। इस कारण दस से अधिक फॉलिकुलार सिस्ट बन जाते हैं। इससे एग बनना बंद हो जाता है। इसके लक्षणों में बाल झड़ना, मोटापा व बांझपन शामिल है।
पीसीओएस ज्यादा गंभीर स्थिति है : पीसीओडी को एक बीमारी नहीं कहा जाता है क्योंकि इसे आप अपने लाइफस्टाइल को ठीक करके व संतुलित आहार लेकर ठीक कर सकते हैं जबकि पीसीओएस एक मेटाबोलिक डिसऑर्डर है।
पीसीओडी ज्यादा कॉमन है : पीसीओडी बहुत ज्यादा आम है। हर तीन में से एक महिला को यह स्थिति होती है। पीसीओएस के मरीज पीसीओडी के मुकाबले कम पाए जाते हैं ।
पीसीओएस में ज्यादा कठिनाइयां हैं : जिन महिलाओं को पीसीओएस होता है उन्हें आगे चल कर डायबिटीज़, उच्च रक्तचाप व हृदय रोगों के होने की सम्भावना बढ़ जाती है। इसके साथ साथ मोटापा और यहां तक कि कैंसर भी होने के चांस पीसीओएस से जुड़े हुए हैं ।
पीसीओएस का पता जल्दी चल जाता है : जिन महिलाओं को पीसीओएस होता है उन्हें उनकी टीनएज से ही कुछ लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं और जिन महिलाओं को यह स्थिति होती है उन्हें बांझपन का भी खतरा होता है। उन्हें मिसकैरिज होने के भी बहुत अधिक संभावना रहती हैं।
पीसीओडी से जूझ रही महिलाओं का ओवुलेशन हो जाता है : हालांकि दोनों स्थितियों के लक्षण काफी समान है लेकिन फिर भी पीसीओडी से जूझ रही महिलाओं को आसानी से ओवुलेशन हो जाता है और उन्हें कंसीव करने में भी ज्यादा समस्या नहीं आती है। बल्कि जिन्हें पीसीओएसहोता है वह आसानी से कंसीव नहीं कर पाती हैं उन्हें ज्यादा मुसीबतों का सामना करना पड़ता है।
इन दोनों ही स्थितियों को आप अपने लाइफस्टाइल को इंप्रूव करके जैसे वजन कम करके, रोजाना एक्सरसाइज करके, एक संतुलित आहार लेकर, जंक फूड आदि खाना छोड़ कर ठीक कर सकते हैं। इसके साथ साथ आपको अपने डॉक्टर की सलाह का भी अवश्य ही पालन करना चाहिए और आप इन स्थितियों से उभर पाने में सफल हो पाएंगी। इसलिए यदि आपको इनमें से एक भी स्थिति है तो आपको ज्यादा स्ट्रेस या ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि इनसे यह स्थिति ठीक होने की बजाय और ज्यादा बढ़ सकती हैं।