
... Read More
Types of Depression: डिप्रेशन क्या है, इसके प्रकार और लक्षणों के बारे में जानें यहां विस्तार से
Types of Depression in Hindi: आजकल लोगों में डिप्रेशन (Depression) की समस्या बहुत अधिक देखने को मिल रही है। डिप्रेशन कई प्रकार का होता है जैसे माइल्ड, लो-ग्रेड डिप्रेशन। जो लोग इससे ग्रस्त होते हैं, उन्हें पता भी नहीं चलता कि वे अवसाद से ग्रस्त हो चुके हैं। अक्सर लोग अपनी डेली लाइफ में उदासी महसूस करना, मूड सही ना होना जैसी परेशानियों से जूझते हैं, लेकिन लोग इसे नॉर्मल मानते रहते हैं। कभी-कभी उदासी महसूस करना, खुश ना रहना चलता है, लेकिन ऐसा नियमित रूप से हो, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। यह डिप्रेशन के लक्षण हो सकते हैं।
हर किसी के जीवन में सुख-दुख आता-जाता रहता है। दुखी होना, बुरा महसूस करना, जिंदगी के किसी भी गतिविधियों में दिलचस्पी ना रहना एक सामान्य अवस्था है। लेकिन, ये सारे लक्षण जीवन में लंबे समय तक बने रहें, तो आप मानसिक रूप से प्रभावित होते हैं। लंबे समय तक दुखी, निराश या उदास रहना सामान्य नहीं हो सकता है। यह अवसाद (Depression) हो सकता है। दुनिया भर में लाखों लोग इस मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। डिप्रेशन रोजमर्रा की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। यह हफ्तों, महीनों तक लोगों को मानसिक रूप से बीमार कर सकता है। अवसाद एक चिकित्सा स्थिति है जो क्रोध, हानि की भावना, निराशा से व्यक्ति को घेर देती है। क्रोनिक डिप्रेशन की स्थिति में व्यक्ति कई बार आत्महत्या तक कर लेता है। कुछ स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां, जैसे गठिया, अस्थमा, हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह और मोटापा इस मूड विकार के लक्षणों को और भी अधिक बिगाड़ सकते हैं।
लो-ग्रेड डिप्रेशन को डिस्थीमिया (Dysthymia) भी कहते हैं। डिस्थीमिया या निम्न-श्रेणी का अवसाद (Low-Grade Depression), अवसाद का एक ऐसा रूप है, जिसमें अधिकतर लोगों को यह पता नहीं चलता कि उन्हें यह समस्या है। लो-ग्रेड या लो-लेवल से लोग यह समझ बैठते हैं कि उनकी समस्या बहुत हल्की है, लेकिन ऐसा नहीं होता। वास्तव में, अवसाद का यह रूप एक गंभीर विकार है, जो दीर्घकालिक शारीरिक और मनोवैज्ञानिक जटिलताओं के साथ-साथ जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय रूप से गिरावट का कारण बन सकता है। कई बार लो-ग्रेड डिप्रेशन होने का कोई मुख्य कारण नजर नहीं आता है। लगभग 3.6 प्रतिशत जनसंख्या अपने पूरे जीवनकाल के किसी पड़ाव पर इस डिप्रेशन से ग्रस्त होते हैं। औसतन, लो-लेवल डिप्रेशन वयस्कों में पांच सालों तक बना रह सकता है। यह एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जिसे कई अन्य नामों से भी जाना जाता है, जिनमें शामिल हैं:
बहुत अधिक या बहुत कम खाना, वजन का घटना या बढ़ना
बहुत कम या ज्यादा सोना
लगातार थकान महसूस करना
आत्म-सम्मान में कमी
मन में नकारात्मक ख्याल आना, मूड में उतार-चढ़ाव
किसी भी एक्टिविटी को एन्जॉय ना करना
खालीपन या निराशा की भावना
एकाग्रता में कमी
निर्णय लेने में कठिनाई महसूस करना
लो-ग्रेड डिप्रेशन की तुलना में मेजर डिप्रेशन अधिक गंभीर होता है। हालांकि, दोनों के अधिकतर लक्षण एक समान ही होते हैं। निम्न-श्रेणी के अवसाद के लक्षण प्रमुख अवसादग्रस्तता विकार से जुड़े लक्षणों के समान होते हैं। इन दोनों डिसऑर्डर के बीच सिर्फ लक्षणों की गंभीरता का फर्क होता है। मेजर डिप्रेशन से ग्रस्त लोगों में आत्महत्या के विचार का अनुभव होने की अधिक संभावना होती है। लो-ग्रेड डिप्रेशन से ग्रस्त लगभग 75% व्यक्ति मेजर डिप्रेशन के एपिसोड का अनुभव करते हैं। इसी कारण से माइल्ड डिप्रेशन का इलाज जरूरी है, क्योंकि यह आसानी से अधिक गंभीर स्थिति में बदल सकता है।
अवसाद एक व्यक्ति को शारीरिक और भावनात्मक रूपों से प्रभावित कर सकता है। अवसाद के आम लक्षणों में अनहैप्पीनेस, भूख में कमी, पसंदीदा एक्टिविटीज में दिलचस्पी कम हो जाना, ऊर्जा में कमी, ध्यान लगाने में समस्या महसूस करना, निर्णय लेने में असमर्थ महसूस करना, नींद से जुड़ी समस्या जैसे इन्सोम्निया। क्रोनिक डिप्रेशन का इलाज ना करवाया जाए, तो यह आत्महत्या के विचारों को जन्म दे सकता है। इसके अलावा डिप्रेशन के निन्म लक्षण इस प्रकार हैं:-
लक्षणों की गंभीरता के आधार पर अवसाद को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित इस विकार (mental health disorder) के कॉमन प्रकार हैं, क्लिनिकल डिप्रेसिव डिसऑर्डर, मेजर डिप्रेशन, परसिस्टेंट डिप्रेशन, डिप्रेसिव साइकोसिस, सीजनल एफेक्टिव डिसऑर्डर या डिप्रेशन, पोस्टपार्टम डिप्रेशन या पेरीनैटल डिप्रेशन, सिचुएशनल डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर आदि। जानते हैं सभी के बारे में यहां...
यह अवसाद का सबसे गंभीर रूप है। इसमें कुछ खास लक्षणों को आप 2 सप्ताह से अधिक समय तक के लिए अनुभव कर सकते हैं। इन लक्षणों में शामिल है, दिन में अधिकांश समय तक उदासी महसूस करना, दैनिक कार्यों के प्रति रुचि कम हो जाना, बिना कारण वजन बढ़ना या कम होना, बहुत अधिक सोना या नींद में कमी, सोचने की क्षमता कम हो जाना, अनिश्चितता, आत्महत्या करने वाले विचार आना।
एक व्यक्ति जिसमें लगातार होने वाले डिप्रेसिव डिसऑर्डर का पता चलता है, उसमें कम गंभीर लक्षणों के साथ मेजर डिप्रेसन के एपिसोड नजर आ सकते हैं। और ये दो वर्ष तक नजर आ सकते हैं।
डिप्रेशन में लोग सीजनल एफेक्टिव डिसऑर्डर से भी प्रभावित होते हैं। डिप्रेशन का यह प्रकार सर्दियों के मौसम में सूरज की रोशनी की कमी के कारण अधिक होता है।
बच्चे को जन्म देने के बाद कई महिलाओं में यह समस्या देखने को मिलती है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन को पेरीनैटल डिप्रेशन भी कहते हैं। अवसाद के इस रूप के पीछे प्रमुख कारण हार्मोन में परिवर्तन है। यदि आप प्रसव (delivery) के बाद महीनों के लिए पोस्टपार्टम डिप्रेशन का अनुभव करती हैं, तो किसी अच्छे साइकोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई बीमारी से जुड़ी सभी जानकारियां सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गई हैं। किसी बीमारी की चिकित्सा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कृपया अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर ले लें।)