इमरान खान की दाईं आंख की 85% रोशनी खत्म, क्या वाकई खतरे में है पाकिस्तान के पूर्व पीएम की सेहत?
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के आंख की रोशनी काफी हद तक जा चुकी है। इसके पीछे आंख से जुड़ी बीमारी CRVO जिम्मेदार है। जानें, इस बीमारी के लक्षण-
Imran Khan Health Update: आडियाला जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के एक आंख की रोशनी काफी कम हो गई है। उनकी दाहिनी आंख की लगभग 85 फीसदी रोशनी चली गई है। यानी अब दाईं आंख में सिर्फ 15 प्रतिशत तक ही रोशनी बची है, जो काफी चिंताजनक है। इसकी वजह से अब उन्हें देखने में भी परेशानी हो रही है। दरअसल, इमरान खान को आंख से जुड़ी बीमारी सेंट्रल रेटिनल वेन ओक्लूजन (CRVO) है, इसकी जानकारी मंगवार को उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने सोशल मीडिया पर दी। उनकी पार्टी द्वारा चिंता जताने के बाद बुधवार को इमरान खान की आडियाला जेल में सरकारी डॉक्टरों की एक टीम से हेल्थ चेकअप किया। आज गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की सेहत की जांच के लिए एक मेडिकल टीम बनाने का आदेश भी दिया है। अब आपके मन में यह सवाल जरूर होगा कि क्या आंखों की इस बीमारी से इमरान की सेहत खतरे में है? या सीआरवीओ क्या है? आइए, इस बारे में एशियन हॉस्पिटल की कंसल्टेंट और हेड ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी डॉ. सिद्धि गोयल (Dr. Siddhi Goel, Consultant and Head of Ophthalmology, Asian Hospital) से जानते हैं-
क्या खतरे में है इमरान खान की सेहत?
दरअसल, सेंट्रल रेटिनल वेन ओक्लूजन (CRVO) आंखों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। अगर बीमारी का समय पर देखभाल और इलाज न किया जाए, तो इस स्थिति में रेटिनल ब्लॉकेज की वजह से स्थायी दृष्टि हानि हो सकती है। यानी आंखों की रोशनी पूरी तरह से जा सकती है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के दाईं आंख की रोशनी सिर्फ 15 फीसदी ही बची है, इस स्थिति में आपातकालीन इलाज बहुत जरूरी है। अन्यथा, वे अपनी दाईं आंख की रोशनी पूरी तरह खो सकते हैं।
CRVO क्या है?
सेंट्रल रेटिनल वेन ओक्लूजन (CRVO) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें रेटिना की सबसे मुख्य नस में ब्लॉकेज आ जाती है। यह ब्लड क्लॉट या ब्लड सर्कुलेशन में कमी की वजह से होता है। इसे "आंख के पर्दे की नस में ब्लॉकेज" भी कहा जाता है। यह एक गंभीर नेत्र रोग है। यह बीमारी मुख्य रूप से 50 साल से अधिक उम्र के लोगों को प्रभावित करती है। इसके अलावा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और ग्लूकोमा रोगियों में इसका जोखिम ज्यादा बना रहता है।
50 की उम्र के बाद क्यों बढ़ता है CRVO का खतरा?
आपको बता दें कि 50 साल के बाद सेंट्रल रेटिनल वेन ओक्लूजन का खतरा ज्यादा रहता है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जिसमें शामिल हैं-
- इस उम्र के बाद रक्त वाहिकाएं सख्त हो जाती हैं।
- 50 साल के बाद रक्त वाहिकाएं संकरी हो जाती हैं।
- इस उम्र के बाद ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर भी बढ़ने लगते हैं, जो सीआरवीओ के खतरे को बढ़ाते हैं।
CRVO के लक्षण क्या हैं?
सेंट्रल रेटिनल वेन ओक्लूजन होने पर रोगी को कुछ संकेत महसूस हो सकते हैं।
- धुंधलापन: आंख की इस बीमारी की वजह से धुंधलापन हो सकता है। यह एक आंख में धुंधली दृष्टि का कारण बन सकता है। इतना ही नहीं, अचानक से आंख की रोशनी पूरी तरह भी जा सकती है।
- दर्द होना: रोगी को आंख में तेज और असहनीय दर्द महसूस हो सकता है। इस बीमारी की वजह से जलन और दबाव भी महसूस हो सकता है।
- सीआरवीओ की वजह से रोगी को सीधी रेखाएं टेढ़ी दिखाई दे सकती है।
- काले धब्बे दिखाई दे सकते हैं, इस संकेत की बिल्कुल अनदेखी न करें।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।