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Written By: Anshumala | Updated : May 26, 2020 9:09 PM IST
crohn's disease: क्या है पेट से संबंधित क्रॉन्स डिजीज, जानें इसके कारण, लक्षण, जांच और इलाज।
अक्सर लोगों को पेट दर्द, दस्त, आंतों में जलन, वजन कम होने की शिकायत रहती है। कई बार लोग इसे नजरअंदाज भी कर देते हैं। हो सकता है ये लक्षण पेट से संबंधित किसी बीमारी की तरफ इशारा कर रहे हों। पेट से संबंधित एक बीमारी है ‘क्रॉन्स डिजीज’ या क्रॉन्स बीमारी (Crohn's Disease) जिसे क्रॉन्स सिंड्रोम (Crohn's syndrome) या इलाइटिस (ileitis) भी कहते हैं। इस बीमारी का नाम न्यू यॉर्क के गैस्ट्रोएन्टरोलॉजिस्ट बर्रिल बर्नार्ड क्रॉन के नाम पर आधारित है। यह बीमारी एक तरह के डाइजेस्टिव ट्रैक में होने वाला क्रॉनिक इंफ्लेमेटरी डिजीज है।
क्रॉन्स डिजीज (Crohn's Disease) आंतों में होने वाले रोगों के एक समूह का हिस्सा है, जिसे इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज या आईबीडी (Inflammatory Bowel Disease) के तौर पर जाना जाता है। आमतौर पर यह बीमारी छोटी आंत (इलियम) के नीचले हिस्से को प्रभावित करता है। हालांकि, यह गैस्ट्रोइन्टेस्टिनियल सिस्टम के किसी भी भाग में हो सकता है।
क्रॉन्स डिजीज होने पर इससे पीड़ित लोगों में आंतों और उसके आसपास के भागों में सूजन, जलन और घाव (अल्सर) होता है, जिससे डाइजेस्टिव ट्रैक की परत बुरी तरह से प्रभावित होती है। अब तक वैज्ञानिक इसके सही कारणों का पता नहीं लगा सके हैं, लेकिन उनका मानना है कि संभवत: इसके पीछे प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित समस्याएं, अनुवांशिक और बेतरतीब जीवनशैली जैसे तत्व जिम्मेदार हैं। जीवनशैली में खानपान की गड़बड़ियों, माइक्रोब्स जैसे बैक्टीरिया या वायरस, धूम्रपान आदि शामिल हैं। कई शोधों में भी कहा गया है कि जो लोग धूम्रपान नहीं करते उनकी तुलना में धूम्रपान करने वालों में क्रॉन्स डिजीज होने की आशंका अधिक रहती है।
आमतौर में यह बीमारी 15 से 30 वर्ष के लोगों में आम है, फिर भी यह किसी को भी प्रभावित कर सकती है। इसके लक्षणों में पेट या आंतों में दर्द, खून या बिना खून के दस्त आना, बुखार, पेट के दाईं तरफ निचले भाग में भारीपन का अहसास, वजन कम होना, एनीमिया, थकान आदि शामिल हैं। अन्य गंभीर लक्षण बीमारी की जटिलताओं के आधार पर विकसित हो सकते हैं जैसे अर्थराइटिस, पित्त पथरी (गॉलस्टोन), मुंह और आंखों में जलन, स्किन रैशेज या अल्सर आदि।
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जरूरी नहीं कि सभी लक्षण क्रॉन्स डिजीज की ही तरफ इशारा करते हैं, ऐसे में घबराने या परेशान होने की जरूरत नहीं। यदि लक्षण लगातार नजर आएं, तो पहले डॉक्टर से संपर्क करें। क्रॉन्स डिजीज की पहचान करने के लिए कई टेस्ट किए जाते हैं जैसे मेडिकल हिस्ट्री, एन्डोस्कोपी, खून की जांच, बैरिअम एक्स-रे आदि। इलाज में पहले दवाओं के जरिए सूजन, जलन, दर्द, दस्त, ब्लीडिंग को कम करने की कोशिश की जाती है। साथ ही सर्जरी, पोषण संबंधी सप्लीमेंट्स के जरिए भी इसे ठीक किया जाता है।
यह बीमारी इतनी कॉमन नहीं है। पेट में दर्द, दस्त लगना, खाना ठीक से नहीं पचना जैसे लक्षण कई बीमारियों में देखे जाते हैं। ऐसे में यह जरूरी नहीं कि आपको क्रॉन्स रोग ही हुआ हो। यह ऐट्रोजेनिक (चिकित्साजन्य) होता है, जिसमें कारणों का पता नहीं होता। कई जांच, आंतों की बायोप्सी के बाद ही क्रॉन्स का पता चलता है। जीवनशैली में बदलाव लाकर जैसे एक्सरसाइज, बैलेंस्ड डायट यानी पौष्टिक आहार को खानपान में शामिल कर, तनाव दूर कर, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-एलर्जिक ड्रग्स देकर इसका इलाज किया जाता है।
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