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Written By: Anshumala | Published : July 18, 2020 8:46 PM IST
Conjunctivitis (pink eye) is a common problem during monsoons. © Shutterstock.
Coronavirus and Conjunctivitis: कंजंक्टिवाइटिस (Conjunctivitis) मानसून में एक आम नेत्र संक्रमण (eye infection in monsoons) है, लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स ने ये भी चेतावनी दी है कि आंखों से संबंधित इस समस्या को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। कंजंक्टिवाइटिस कोरोनावायरस के संक्रमण के कारण भी हो सकता है। विशेषज्ञों ने भी कुछ दिनों पहले कंजंक्टिवाइटिस या गुलाबी आंख (Pink eye) को कोरोना का एक असामान्य लक्षण (Coronavirus and Conjunctivitis) बताया था। ऐसे में डॉक्टर्स आंखों के प्रति खास देखभाल बरतने की बात कर रहे हैं। कोरोनावायरस संक्रमण मुंह, नाक के साथ ही आंखों से भी फैल सकता है। ऐसे में इससे बचने के लिए आंखों की स्वच्छता (eye hygiene) और सोशल डिस्टेंसिंग (social distancing) का पालन करना बहुत जरूरी है।
मानसून में कंजंक्टिवाइटिस (eye infection in monsoons) आम है। एक एसिम्प्टोमेटिक (asymptomatic) रोगी भी आंसू या डिस्चार्ज के जरिए कोरोना रोग का प्रसार (Coronavirus spread) कर सकता है। ऐसे में आई प्रोटेक्शन को पहनना महत्वपूर्ण है। 2003 में टोरंटो में सार्स के प्रकोप (SARS Outbreak) के फैलने का मुख्य कारण था आई प्रोटेक्शन ना पहनना। इसके कारण कोरोना संक्रमित रोगियों से काफी स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोनवायरस होने का खतरा बढ़ गया था। प्रकाशित वैज्ञानिक अध्ययन दर्शाते हैं कि कंजंक्टिवाइटिस बुखार (Fever), सूखी खांसी (Dry cough) या रेस्पिरेटरी लक्षणों के अलावा सक्रिय कोविड-19 (COVID-19) संक्रमण का एकमात्र संकेत और लक्षण हो सकता है।
1 जब एक कोरोनोवायरस का मरीज (Covid-19 patient), भले ही वह एसिम्प्टोमेटिक (asymptomatic) हो, तो बोलने, खांसने या छींकते समय ड्रॉपलेट्स फैलाता है, जिससे कोरोना बीमारी (Corona disease) फैल सकती है। जो लोग कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, उन्हें महामारी के दौरान चश्मे का उपयोग करना चाहिए और आंखों की स्वच्छता (Eye Hygiene Tips in hindi) बनाए रखनी चाहिए।
2 अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं। फिर सादे पानी से अपनी आंखें (Coronavirus and Conjunctivitis in hindi) धोएं, इसे बार-बार दोहराएं। डॉक्टर द्वारा बताए गए मेडिकेटेड आई ड्रॉप का उपयोग करें।
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3 आंखों को अधिक स्ट्रेन पड़ने से भी बचाएं। लगातार लैपटॉप या किसी भी स्क्रीन को देखने से बचें। हर घंटे 10 मिनट का ब्रेक लेने की कोशिश करें। इससे आंखों को रगड़ने की प्रवृत्ति कम होगी। बालकनी में लगे पौधों को देखें। सोसायटी के पार्क में बैठकर हरे-भरे पेड़ों को देखें।
4 अपने खानपान का खास ख्याल रखें। पालक, खुबानी (apricots), शकरकंद (sweet potatoes), मछली के साथ ही विटामिन सी, कैल्शियम और जिंक शामिल करें। जो डॉक्टर आंखों की समस्या से ग्रस्त मरीजों का इलाज कर रहे हैं, उन्हें भी संक्रमण होने की संभावना को रोकने के लिए फेस शील्ड (Face Shield) और पीपीई (PPE) का उपयोग करना चाहिए।
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