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Written By: akhilesh dwivedi | Published : August 7, 2018 9:18 PM IST
कलर थेरेपी वैकल्पिक चिकित्सा का एक रूप है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा को स्वस्थ करने के लिए प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। रंगों द्वारा स्वास्थ्य विकारों की वजह से हमारे भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक स्तर पर हुए ऊर्जा असंतुलन को बहाल करने काम किया जाता है। हम रोजाना विभिन्न प्रकार के बहुत सारे रंग देखते हैं। प्रत्येक रंग हमारे मन पर अलग ढंग का प्रभाव डालता है, जैसे- खुशी, उदासी , अवसाद , गर्मी , शांति , क्रोध और जुनून आदि।
पृथ्वी पर जीवन के सभी रूपों के लिए ऊर्जा का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत क्या है ? जी हां – यह सूर्य का प्रकाश है, जो कि अलग-अलग तरंग-दैर्ध्यों से निर्मित है। सूर्य के प्रकाश का हम पर चिकित्सकीय प्रभाव पड़ता है, खासकर सर्दियों के दौरान हम देख सकते हैं कि धूप में हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका पर कितना अच्छा प्रभाव पड़ता है।
नारंगी रंग
नारंगी रंग लाल व पीले रंग से मिश्रित होता है। इस रंग के प्रयोग से दोनों रंगों का मिश्रित प्रभाव मिलता है। यह रंग ज्ञान व शक्ति का संतुलित प्रभाव देता है। तभी तो साधु-संतो का चोला केसरिया रंग का होता है। यह रंग अध्यात्म व संसारिक गुणों का संतुलन स्थापित करता है। इस रंग में तंत्रिका तंत्र को मजबूती प्रदान करने की अद्भुत शक्ति होती है। महत्वकांक्षा को बढ़ाना, भूख बढ़ाना व श्वास के रोगों से आराम देना इस रंग के गुण हैं। यह रंग अवसाद से भी मुक्ति दिलाता है।
हरा रंग
हरा रंग सहयोग व विस्तार की भावना विकसित करता है। इस रंग के प्रयोग से व्यक्ति नेत्र रोग, कमजोर ज्ञानतंतु, अल्सर, कैंसर व चर्म रोगों से निजात पाता है। यह रंग नेत्रों को शीतलता प्रदान करता है। यह रंग “बुध ग्रह” का प्रतिनिधित्व करता है। बौद्धिक विकास के लिए जातक को हरे रंग का पन्ना रत्न ग्रहण करने की सलाह दी जाती है।
नीला रंग
नीला रंग सत्य ,आशा, विस्तार, स्वच्छता व न्याय का प्रतीक है। यह रंग स्त्री रोग, पेट में जलन, गर्मी, महत्वपूर्ण बल की कमी आदि के उपचार में प्रयुक्त किया जाता है। गहरा नीला रंग अकेलेपन को बढ़ाता है। अवसाद जैसी स्थिति में इस रंग का प्रयोग कदापि न करें। इसके विपरीत इस रंग की वस्तुओं का दान शुभ फल देता है।
पीला रंग
पीला रंग ज्ञान और सात्विकता का प्रतिनिधित्व करता है। खांसी, जुखाम, लीवर संबंधित बीमारियां कब्ज़, पीलिया, सूजन व तंत्रिका तंत्र की कमज़ोरी के उपचार में प्रयुक्त होता है। पीला रंग “गुरु ग्रह” का प्रतिनिधित्व करता है। व्यक्ति में ज्ञान और वैराग्य भावना विकसित कर सम्मानित जीवन जीने के लिए पीले रंग का पुखराज रत्न ग्रहण करने की सलाह दी जाती है।
बैंगनी रंग
बैंगनी रंग लाल व नीले रंग के मिश्रण से बनता है। इस रंग का प्रयोग यश, प्रसिद्धि व उत्साह प्रदान करता है। यह रंग रक्त शोधन के लिए प्रयुक्त किया जाता है। दर्द, सूजन, बुखार व कार्य क्षमता की वृद्धि के लिए इस रंग का प्रयोग किया जाता है। बैंगनी रंग सुस्त मस्तिष्क को उत्सव व आशा प्रदान करता है।
चित्रस्रोत-Shutterstock.
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