क्या है कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग? जानिए क्यों जरूरी है इसकी नियमित जांच और क्या हैं फायदे

कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टेस्ट रक्त में एचडीएल और एलडीएल दोनों स्तरों का परीक्षण करता है। 20 साल की उम्र में पहली बार कोलेस्ट्रोल स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना चाहिए। इसके बाद, हर पांच साल में एक बार कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग करा के आप कोलेस्ट्रॉल के स्तर की निगरानी कर सकते हैं। हालांकि, इसके बाद आपको कितने समय तक परीक्षण करना है, यह जांच के स्तर पर निर्भर करता है। यदि रक्त कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से अधिक है या आपके परिवार में दिल की बीमारियों का पारिवारिक इतिहास है, तो डॉक्टर हर 2 या 6 महीने में एक परीक्षण की सिफारिश कर सकते हैं।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : September 16, 2020 3:21 PM IST

हम सभी जानते हैं कि बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल हमारे स्वास्थ्य के लिए बुरा है क्योंकि यह कई खतरनाक बीमारियों का कारण बनता है। हम सभी जानते हैं कि उच्च कोलेस्ट्रॉल हृदय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। हालांकि कोलेस्ट्रॉल दो प्रकार का होता है। एक अच्छा कोलेस्ट्रॉल यानि कि एचडीएल और दूसरा बुरा कोलेस्ट्रॉल यानि कि एलडीएल है। इनमें से अच्छा कोलेस्ट्रॉल आपके शरीर के लिए फायदेमंद होता है, जबकि खराब कोलेस्ट्रॉल शरीर को कई बीमारियों के खतरे में रखता है। कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टेस्ट रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच करता है। इस जांच से रक्त में मौजूद एचडीएल और एलडीएल दोनों के स्तर का परीक्षण किया जाता है। आइए हम आपको बताते हैं कि कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टेस्ट क्या होता है और इसे कराने की क्यों जरूरत पड़ती है।

क्या होती है कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग?

कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टेस्ट रक्त में एचडीएल और एलडीएल दोनों स्तरों का परीक्षण करता है। 20 साल की उम्र में पहली बार कोलेस्ट्रोल स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना चाहिए। इसके बाद, हर पांच साल में एक बार कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग करा के आप कोलेस्ट्रॉल के स्तर की निगरानी कर सकते हैं। हालांकि, इसके बाद आपको कितने समय तक परीक्षण करना है, यह जांच के स्तर पर निर्भर करता है। यदि रक्त कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से अधिक है या आपके परिवार में दिल की बीमारियों का पारिवारिक इतिहास है, तो डॉक्टर हर 2 या 6 महीने में एक परीक्षण की सिफारिश कर सकते हैं।

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क्यों जरूरी है कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच?

कोलेस्ट्रॉल लिवर द्वारा उत्पादित हुआ फैट है। हमारे शरीर को ठीक से काम करने के लिए कोलेस्ट्रॉल का होना आवश्यक है। शरीर में हर कोशिका के जीवन के लिए कोलेस्ट्रॉल आवश्यक है। कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा शरीर को कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकती है। प्रमुख हृदय रोगों के कारण कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से अधिक होता है। इसलिए, समय-समय पर कोलेस्ट्रॉल की जांच करा के आप यह जान सकते हैं कि आपको हृदय रोग का खतरा है या नहीं। इसके अलावा, इस जांच के माध्यम से आप यह भी जान सकते हैं कि आपको कोलेस्ट्रॉल को कम करने की कितनी आवश्यकता है।

क्या होता है सही कोलेस्ट्रॉल लेवल?

क्या ब्लड में बढ़ी हुई कोलेस्ट्रॉल की मात्रा का सेहत पर फर्क पड़ता है? रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर 3.6 मिलीग्राम प्रति लीटर से लेकर 7.8 मिली ग्राम प्रति लीटर तक होता है। 6 मिली लीटर प्रति लीटर कोलेस्ट्रॉल को उच्च कोलेस्ट्रॉल के रूप में देखा जाता है। जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ जाता है तो कई रोग जन्म लेने लगते हैं। 7.8 मिली ग्राम प्रति लीटर से अधिक कोलेस्ट्रॉल को अत्यधिक उच्च कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है। व्यक्ति को इस स्थिति में आने से बचना चाहिए। क्योंकि ऐसी परिस्थिति में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।

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कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के तरीके

1. कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए ओट्स का सेवन अच्छा होता है। क्योंकि इसमें फाइबर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं जिसमें बीटा ग्लुकन होता है। यह फाइबर घुलनशील होता है और रक्त में कोलेस्‍ट्रॉल के संचार को रोकता है। इस कारण कोलेस्ट्रोल शरीर से उत्सर्जित हो जाता है और फलस्वरूप कोलेस्‍ट्रॉल लेवल में गिरावट आती है।

2. कोलेस्ट्राल को नियंत्रित करने के लिए लहसुन का सेवन फायदेमंद होता है। यदि आपका कोलेस्ट्रॉल हाई है तो आप इसे रोकने के लिए लहसुन का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप एक ताजा लहसुन की कली लीजिए और उसमें आधा चम्मच अदरक को मिलाइए। फिर उसमें आधा चम्मच नींबू का रस मिलाइए। इन तीनों को अच्छी तरह से मिलाने के बाद आप इसे रोज हर मील से पहले खा सकते हैं।

3. ब्राउन राइस का सेवन भी कोलेस्ट्राल को सामान्य रखने में मदद करता है। इन चावलों को पूरी तरह प्रोसेस नहीं किया जाता, बल्कि सिर्फ बाहरी छिलके उतारे जाते हैं। इस कारण से चावल में मौजूद भूसी बनी रहती है और इसमें न सिर्फ प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है बल्कि विटामिन और मिनरल भी बहुलता में मौजूद होते हैं।

4. नियमित रूप से सुबह खाली पेट आंवला जूस पीने से पेट संबंधी समस्याओं के साथ हाई कोलेस्ट्रॉल को भी कम किया जा सकता है। आंवला के हमारे शरीर पर एंटी-हाइपरलिपिडेमिक, एंटी-एथेरोजेनिक और हाइरोलिपिडेमिक प्रभाव होते हैं। यह बॉडी के हाइपोलिपिडेमिक एजेंट की तरह काम करता है और सीरम में लिपिड की मात्रा को कम करता है।

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