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Chickenpox Explainer: माता निकलना क्या होता है? जानें इसके लक्षण, कारण और बचाव के उपाय

चिकनपॉक्स एक संक्रामक बीमारी है, इसे माता निकलना भी कहा जाता है। इसमें त्वचा पर लाल चकत्ते और फफोले निकलने लगते हैं। इन पर खुजली हो सकती है और घर पर ही इसका इलाज हो सकता है।

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Written By: Anju Rawat | Published : July 7, 2026 9:10 PM IST

चिकनपॉक्स (Chickenpox), इसे आम बोलचाल की भाषा में माता निकलना या छोटी माता कहा जाता है। यह एक बेहद संक्रामक बीमारी है। यानी यह एक से दूसरे व्यक्ति में बेहद आसानी से फैल सकती है। वैसे तो यह किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है। लेकिन, बच्चों में इसके मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं। चिकनपॉक्स में पूरे शरीर पर लाल दाने, फफोले और पपड़ी बन सकते हैं। इनके अलावा, बुखार और शरीर में तेज दर्द भी हो सकता है। CDC के अनुसार, आमतौर पर यह बीमारी 7 से 10 दिनों में ठीक हो जाती है। लेकिन, अगर चिकनपॉक्स वायरस पूरी तरह से ठीक नहीं होता है, तो Varicella-Zoster वायरस शरीर की नसों में निष्क्रिय अवस्था में रह सकता है। बाद में यही वायरस शिंगल्स रोग का कारण बन सकते हैं। ज्यादातर मामलों में एक बार चिकनपॉक्स होने के बाद, शरीर में इसके खिलाफ प्रतिरक्षा विकसित हो जाती है। लेकिन, कुछ मामलों में यह बीमारी दोबारा हो सकती है। तो आइए, आज के इस लेख में चिकनपॉक्स के बारे में विस्तार से जानते हैं-

चिकनपॉक्स कैसे फैलता है?

Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार, चिकनपॉक्स एक संक्रामक बीमारी है और यह Varicella-Zoster Virus (VZV) के कारण होती है। यह बीमारी मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैल सकता है। यानी यह एक से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल सकता है। खासकर, अगर किसी व्यक्ति ने चिकनपॉक्स की वैक्सीन नहीं लगवाई है और वह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आता है, तो उसमें चिकनपॉक्स होने की संभावना 90 फीसदी तक बढ़ सकती है। हैरानी की बात यह है कि चिकनपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति त्वचा पर दाने निकलने से 1-2 दिन पहले से ही दूसरे लोगों में संक्रमण फैला सकता है। फिर जब तक किसी व्यक्ति के फफोले और पपड़ी ठीक नहीं हो जाते, तब तक यह संक्रमण फैल सकता है।

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चिकनपॉक्स के लक्षण क्या हैं?

  • CDC के अनुसार, चिकनपॉक्स होने पर सबसे पहले त्वचा पर दाने निकलते हैं। यही चिकनपॉक्स का सबसे आम लक्षण माना जाता है।
  • बाद में इन दानों पर तेज खुजली हो सकती है और इनमें तरल पदार्थ भर सकता है।
  • इससे ये फफोले बन जाते हैं और जब फफोले सूख जाते हैं, तो पपड़ी का रूप ले लेते हैं।

आपको बता दें कि चिकनपॉक्स की वजह से होने वाले दाने आमतौर पर छाती, पीठ और चेहरे पर सबसे पहले दिखाई दे सकते हैं। इसके बाद, ये दाने धीरे-धीरे पूरे शरीर पर फैल सकते हैं। चिकनपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति की त्वचा पर लगभग 500 फफोले निकल सकते हैं। इन फफोलों को पपड़ी बनने में लगभग एक सप्ताह लग सकता है। हालांकि, जिन लोगों को चिकनपॉक्स की वैक्सीन लग चुकी है, उनमें इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं और फफोले भी कम निकल सकते हैं।

NHS के अनुसार, चिकनपॉक्स होने पर दाने, फफोले और पपड़ी के साथ तेज बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी, थकान और भूख कम लगना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

चिकनपॉक्स का खतरा ज्यादा किसे होता है?

वैसे तो किसी भी व्यक्ति को चिकनपॉक्स हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में चिकनपॉक्स का खतरा ज्यादा बना रहता है। इनमें शामिल हैं-

  • जिन लोगों को पहले कभी चिकनपॉक्स नहीं हुआ है।
  • जिन लोगों ने चिकनपॉक्स की वैक्सीन नहीं लगवाई है।
  • गर्भवती महिलाओं में चिकनपॉक्स का खतरा ज्यादा रहता है और गंभीर भी हो सकता है।
  • नवजात शिशुओं में चिकनपॉक्स गंभीर और जानलेवा हो सकता है।
  • जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोरी होती है, उनमें चिकनपॉक्स का खतरा ज्यादा हो सकता है। क्योंकि, इनकी बॉडी किसी भी वायरस और बैक्टीरिया की चपेट में जल्दी आ जाती है और बीमारी से लड़ने में सक्षम नहीं होती है।

चिकनपॉक्स कितने दिनों में ठीक हो जाता है?

NHS के अनुसार, अधिकतर मामलों में  चिकनपॉक्स 1 से 2 सप्ताह में ठीक हो जाता है। जब सभी दानों या फफोलों पर पपड़ी बनने लगती है, तो संक्रमण फैलने का खतरा भी काफी कम हो जाता है।

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चिकनपॉक्स से बचाव के लिए क्या करें?

CDC के अनुसार, चिकनपॉक्स से बचने का सबसे प्रभावी तरीका वैक्सीन लगवाना है। अगर किसी व्यक्ति को पहले कभी चिकनपॉक्स नहीं है, तो उन्हें चिकनपॉक्स वैक्सीन की 2 डोज लगवाने की सलाह दी जाती है। छोटे बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों को चिकनपॉक्स वैक्सीन की 2 डोज दी जाती है। बच्चों को दी जाने वाली चिकनपॉक्स वैक्सीन, उन्हें खसरा और रूबेला जैसे रोगों से भी सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।

  • चिकनपॉक्स से बचने के लिए वैक्सीन लगवाना बहुत जरूरी है।
  • इस बीमारी से बचने के लिए संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना जरूरी है।
  • चिकनपॉक्स से बचने के लिए हाइजीन का ख्याल रखना जरूरी है। खाना खाने से पहले हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह से धोएं।
  • खांसते और छींकते समय मुंह को कवर करें। इससे संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है।

चिकनपॉक्स होने पर क्या करें और क्या नहीं?

चिकनपॉक्स होने पर कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। अधिकतर मामलों में चिकनपॉक्स घर पर ही ठीक हो जाता है, इसके लिए अस्पताल में भर्ती या इलाज की जरूरत नहीं पड़ती है। NHS के अनुसार, आपको कुछ dos and donts को फॉलो करना चाहिए। जैसे-

क्या करें? (do's)

  • चिकनपॉक्स होने पर आपको पर्याप्त मात्रा में पानी जरूर पीना चाहिए। अगर बच्चे को चिकनपॉक्स है, तो उसे भी ठंडे तरल पदार्थ जरूर पिलाएं।
  • अगर शरीर में दर्द या बुखार रहता है, तो डॉक्टर की सलाह पर दवा ली जा सकती है।
  • नाखून छोटे रखें और रात में उसके हाथों में गलव्स और पैरों में मोजे पहनें।
  • डॉक्टर की सलाह पर कूलिंग क्रीम या जेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे खुजली और जलन से राहत मिल सकती है।
  • ठंडे पानी से नहाएं और त्वचा को तौलिए से थपथपाकर सुखाएं।
  • चिकनपॉक्स होने पर ढीले और सूती कपड़े पहनें।

क्या न करें (dont's)

  • चिकनपॉक्स होने पर आपको घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। स्कूल, कॉलेज या ऑफिस नहीं जाना चाहिए।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा का सेवन न करें। इससे त्वचा संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
  • दानों पर खुजली न करें। इससे संक्रमण बढ़ सकता है और त्वचा पर निशान पड़ सकते हैं।

इन लक्षणों की न करें अनदेखी

अगर चिकनपॉक्स होने पर आपको कुछ लक्षण महसूस हो तो इनकी अनदेखी बिल्कुल न करें और तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। इनमें शामिल हैं-

  • तेज बुखार और शरीर में दर्द होना
  • लगातार उल्टी और मतली जैसा महसूस होना
  • दौरे पड़ना या बेहोशी होना
  • दानों से पस निकलना और पपड़ी न बनना
  • सांस लेने में मुश्किल होना
  • नवजात शिशु में चिकनपॉक्स

Disclaimer: चिकनपॉक्स एक संक्रामक बीमारी है और एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकती है। यह बीमारी  Varicella-Zoster Virus के कारण होती है और इसकी वजह से पूरे शरीर पर लाल दाने और फफोले होने लगते हैं। यह बीमारी घर पर ही 4 से 7 दिनों में ठीक हो सकती है। लेकिन, इस दौरान व्यक्ति को बाहर निकलने से बचना चाहिए और खुद को आइसोलेट करना चाहिए। अगर चिकनपॉक्स के लक्षण गंभीर हो जाए, तो डॉक्टर से जरूर कंसल्ट करना चाहिए। चिकनपॉक्स होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा बिल्कुल न लें।