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Written By: Jitendra Gupta | Published : March 7, 2023 10:25 AM IST
रीढ़ की हड्डी को जीवनभर सीधा रखने के लिए ये उपाय हैं जरूरी! जानें मोटापे से रीढ़ की हड्डी को होने वाले नुकसान
मोटापे की समस्या से दुनियाभर के लाखों लोग ग्रसित हैं, यह एक गंभीर समस्या है, जिससे डायबिटीज, हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर जैसी कई बीमारियां पैदा होती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मोटापे के कारण हमारे शरीर के हड्डियों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है? जिसे अनदेखा किया जाता है। ISIC हॉस्पिटल में मिनिमली इनवेसिव और स्पाइनल डिफॉर्मिटी रोबोटिक सर्जन, सीनियर कंसल्टेंट एंड यूनिट चीफ, डॉ. गुरुराज संगोंडीमठ का कहना है कि मोटापे का प्रभाव हमारे शरीर के बाहरी अंगों के अलावा हड्डियों पर भी पड़ता है, खासकर सर्वाइकल ऑसिफिकेशन की समस्या उत्पन्न होती है। सर्वाइकल ऑसिफिकेशन एक ऐसी स्थिति है जो सर्वाइकल स्पाइन को प्रभावित करती है, जहां लिगामेंट्स में बोनी संरचनाएं विकसित होती हैं जो रीढ़ को सहारा देती हैं, जिससे कठोरता और सीमित गतिशीलता होती है। वहां पर समस्या होने से पूरे शरीर पर प्रभाव पड़ता है और यह समस्या अधिकतर बुजुर्ग व्यक्तियों में देखी जाती है पर आजकल युवाओं में भी इस प्रकार की दिक्कतें बढ़ रही हैं।
सर्वाइकल स्पाइन या गर्दन के आस-पास का क्षेत्र हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग सिर को सहारा देने के साथ-साथ रीड की हड्डी की गतिशीलता व सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। हमारे पूरे शरीर में मोटापे के कारणप्रभाव पड़ता है खासकर रीढ़ की हड्डियों में मोटापे से कितनी समस्याएं आती हैं, यह समझना भी अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
मोटापा सर्वाइकल स्पाइन पर यांत्रिक तनाव को बढ़ाता है, जिससे जोड़ों, डिस्क और लिगामेंट्स पर टूट-फूट बढ़ जाती है। इस बढ़े हुए तनाव से सर्वाइकल लिगामेंट्स में बोनी संरचनाओं का निर्माण हो सकता है, जिससे सर्वाइकल ऑसिफिकेशन हो सकता है। इसके अलावा मोटापा जीर्ण सूजन के साथ जुड़ा हुआ है, जिससे आगे चलकर सर्वाइकल ऑसिफिकेशन विकसित हो सकता है।
अपने वजन को नियंत्रित बनाए रखना बहुत जरूरी है इससे आपकी रीड के हड्डियों पर यांत्रिक तनाव कम हो सकता है और भविष्य में सर्वाइकल ऑसिफिकेशन के विकास की संभावना कम हो जाती है। नियमित व्यायाम, स्वस्थ आहार व अनुशासन से आप अपने वजन को नियंत्रित रख सकते हैं।
खराब पोश्चर मैं उठने बैठने व खड़े होने से आप सर्वाइकल स्पाइन की समस्या को बढ़ा सकते हैं, इसलिए हमेशा यह ध्यान रखें कि आपको सीधे खड़े होना है, सीधे बैठना है, अपने कंधों को पीछे और अपनी छुट्टी को अंदर की ओर ही रखें।अगर आप सही पोजीशन में उठाएंगे और बैठेंगे तब आप सर्वाइकल स्पाइन की समस्या से दूर रह सकते हैं।
शरीर को हमेशा एक्टिव रखिए इसके लिए आप योग तैराकी व अन्य शारीरिक गतिविधियों को नियमित तौर पर जारी रखें जिससे आपके शरीर में लचीलापन बना रहे आपके सर्वाइकल स्पाइन में भी लचीलापन व गतिशीलता बनी रहे। इससे आपकी हड्डियां मजबूतरहती हैं और लचीलापन के कारण भविष्य में सर्वाइकल ऑसिफिकेशन से बच सकते हैं।
धूम्रपान का असर आपके सर्वाइकल ऑसिफिकेशन के जोखिम को बढ़ा देता है इसलिए धूम्रपान से दूरी बनाकर रखें जैसे आपकी रीड की हड्डी के स्वास्थ्य में सुधार हो सके और भविष्य में सर्वाइकल ऑसिफिकेशन से आप बच सकें।
रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखने व सर्वाइकल ऑसिफिकेशन के विकास को रोकने के लिए आपको सबसे पहले इनके लक्षणों पर गौर करना व तुरंत उसका इलाज कराना बहुत जरूरी है, क्योंकि लक्षणों में देरी करने पर इसके इलाज में भी बहुत दिक्कतें आती हैं। इसका इलाज कई माध्यमों से किया जाता है। इसके उपचार में शामिल हैंः
गंभीर लक्षणों वाले रोगियों के लिए ऐसे मामलों में सर्जरी द्वारा उपचार किया जा सकता है। सर्जरी के माध्यम से रीड की हड्डी और तंत्रिकाओं पर प्रभाव डालने वाली बोनी संरचनाओं को हटाया जाता है जिससे इन पर दबाव से राहत मिलती है और गतिशीलता में सुधार होता है।
यह भी एक सर्जरी की ही प्रक्रिया है जिसमें बोनी संरचनाओं को हटाने आगे की गति को रोकने के लिए प्रभावित कशेरुकाओं को फ्यूज कर राहत जाती है। यह सर्जरी सर्वाइकल स्पाइन को स्थिर करने में मदद कर सकती है और रीढ़ की हड्डी और नसों को और नुकसान से बचा सकती है।
यह सर्जरी अक्सर उन लोगों के लिए की जाती है जिनके हल्के लक्षण होते हैं। जिसमें रीढ़ की हड्डी पर दबाव को दूर करने के लिए स्पाइनल कैनाल को खोल कर रोगी का इलाज किया जाता है। लैमिनोप्लास्टी एक न्यूनतम इनवेसिव सर्जिकल प्रक्रिया है।
सर्वाइकल ऑसिफिकेशन के दर्द और सूजन जैसे लक्षणों को दूर करने के लिए दवाओं का उपयोग किया जाता है। आम तौर पर, इबुप्रोफेन या नेपरोक्सन जैसे दर्द निवारक दवाएं हैं जो दी जाती हैं। ये दवाएं गैर-स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लैमेटरी दवाएं हैं, जो सूजन को कम करने और दर्द से राहत देने में मदद करती हैं इसी प्रकार से मांसपेशियों और तंत्रिका दर्द में राहत देने के लिए दवाएं दी जाती हैं।
फिजिकल थेरेपी के माध्यम से शरीर में गतिशीलता के साथ सर्वाइकल ऑसिफिकेशन से जुड़े दर्द को कम करने में मदद मिलती है। डॉक्टर फिजिकल थेरेपी के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग कर सकते हैं चीन में व्यायाम, मैनुअल थेरेपी और विद्युत उत्तेजना से रोगियों में इन लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है।
रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है जिसमें गर्मी का उपयोग कर तंत्रिका तंतुओं को नष्ट करके मरीज का इलाज किया जाता है। इस प्रक्रिया का उपयोग सर्वाइकल ऑसिफिकेशन से जुड़े गर्दन के दर्द को रोकने के लिए किया जाता है।
मोटापा आपके शरीर में विभिन्न बीमारियों को जन्म तो देता ही है, साथ ही यह विशेष रूप से रीढ़ की हड्डियों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव डालता है। सर्वाइकल ऑसिफिकेशन के कारण कई प्रकार की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। सर्वाइकल स्पाइन पर बढ़ता यांत्रिक तनाव और मोटापे से जुड़ी पुरानी सूजन सर्वाइकल ऑसिफिकेशन की शुरुआत है और यदि इन पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह सर्वाइकल ऑसिफिकेशन को और बढ़ा सकता है, जिस कारण रीड की हड्डी में कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएंउत्पन्न हो सकती हैं।
इन समस्याओं से बचने के लिए मोटापे को रोकने के साथ-साथ रीढ़ की हड्डियों के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना है- शरीर के वजन को नियंत्रित रखना है, अच्छी मुद्रा का अभ्यास करें, शरीर को एक्टिव रखें, धूम्रपान से दूरी बनाकर रखें, इसके अलावा इसके लक्षणों के पता चलने पर तुरंत इलाज कराएं तभी आप सर्वाइकल ऑसिफिकेशन की समस्या से बच सकते हैं। इसलिए गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर के पास जाकर अपना इलाज कराएं और स्वस्थ रहें।