
... Read More
Written By: Anshumala | Published : March 28, 2019 1:02 PM IST
In India, a wheelchair rally is conducted at Rajpath, inclusive cultural programmes are organised across the country, relevant messages and information are spread with the help of radio campaigns.© Shutterstock
गर्दन के हिस्से में स्पाइनल कैनाल के दबाव के कारण सर्वाइकल माइलोपैथी की स्थिति पैदा होती है। सामान्य भाषा में कहें तो इसमें गर्दन में स्थित स्पाइनल कॉर्ड का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाता है। इससे कॉर्ड सही ढंग से काम नहीं करती और यह परेशानी सभी उम्र के मरीजों को होती है। इस स्थिति के कई कारण हैं। हालांकि, सबसे सामान्य कारण स्पॉन्डिलाइसिस (इसे स्पंडीलाइटिक माइलोपैथी कहते हैं) और रूमेटाइड अर्थराइिटस है।
जानें, अर्थराइटिस और आस्टियोपोरोसिस बीमारी में क्या अंतर है, हड्डियों के रोग से यूं बचें
नई दिल्ली स्थित बत्रा अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. अमिताभ गुप्ता का कहना है कि सामान्यतः सर्वाइकल माइलोपैथी के कोई शुरुआती लक्षण नजर नहीं आते और लक्षण दिखते भी हैं, तो बहुत मामूली या भ्रमित करने वाले होते हैं। इसमें कई बार मरीज को गर्दन का दर्द बहुत आगे की स्टेज में महसूस होता है, इससे स्थिति का पता चलना बहुत मुश्किल हो जाता है। स्पॉन्डिलाइसिस और रूमेटाइड अर्थराइटिस के अलावा सर्वाइकल माइलोपैथी के अन्य कई कारण हैं, जैसे स्लिप डिस्क, घिस रही सर्वाइकल डिस्क्स, स्पाइनल कॉर्ड में ट्यूमर, स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव, बोन स्पर्स, गर्दन का फ्रैक्चर, सर्वाइकल स्पाइन में गंभीर चोट, ऑटोइम्यून बीमारियां जैसे मल्टीपल स्केलोरिसस या न्यूरोमिलिटिस ऑप्टिका, हड्डी या पीठ की परेशानी, जन्म से ही स्पाइनल कॉर्ड का संकरापन। ऐसा कैंसर जिसमें हडिड्यां भी प्रभावित हों आदि। कुछ सामान्य लक्षण भी दिखते हैं, जैसे छोटी चीजों के साथ काम करने में समस्या मसलन अपनी शर्ट के बटन बंद नहीं कर पाना, कंधे और हाथों की मांसपेशियां कमजोर पड़ना तथा इनमें दर्द, हैंडराइटिंग में बदलाव और हाथों में सूनापन या झनझनाहट आदि।
डॉ. अमिताभ गुप्ता का कहना है कि सर्वाइकल माइलोपैथी की जांच और स्पाइन और आस-पास के ढांचे की स्थिति देखने के लिए कई इमेजिंग टेस्ट किए जाते हैं, जैसे एक्सरे, एमआरई स्कैन, डाई के साथ सीटी स्कैन इसके अलावा इलेक्ट्रोमायोग्राफी (ईएमजी), सोमाटोसेंसरी इवोक्ड पोटेन्शियल्स। सर्वाइकल माइलोपैथी के उपचार के लिए माइलोपैथी के कारण का उपचार करना जरूरी हैं। इसके आधार पर दर्द को कम या मैनेज किया जा सकता है। मजबूती देने वाले व्यायाम भी परेशानी और दर्द को कम कर सकते है। लेकिन स्पाइनल कॉर्ड के ढांचे पर किसी तरह का दबाव सामने आता है, तो तुरंत सर्जरी की आवश्यकता होती है ताकि चोट आगे नहीं बढ़े गर्दन को सही करने के लिए कई तरह की सर्जरी और प्रोसीजर उपलब्ध है जैसे-डिसेक्टोमी-इस सर्जरी में स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव डाल रही डिस्क या हिस्से को हटाया जाता है। दर्द और पीड़ा को कम करने के लिए न्यूरोसर्जीकल उपायों में फिजीकल थैरेपी, ऑक्यूपेशनल थैरेपी किए जा सके है। इसके अलाावा डॉक्टर नॉनस्टोराइडल एंटी इन्फ्लेमेट्री दवाइयां, दे सकते हैं जो लक्षणों में राहत दे सके।
अर्थराइटिस के दर्द से पाना है छुटकारा, तो खाएं ये हर्ब्स
हालांकि, सर्वाइकल मैलोपैथी से बचाव मुश्किल है, लेकिन किसी भी दुर्घटना या पीड़ा से बचने के लिए सामान उठाने की सही तकनीक समझना, अपने पोस्चर को सही रखना और सहीं ढंग से बैठना विशेषकर जब आप लैपटॉप पर काम कर रहे हैं जैसे उपाय किए जा सके है। इसके अलावाा पहले कभी भी डिस्क से जुडी कोई समस्या रही है, तो खेल गतिविधियों से बचना, गर्दन के मूवमेंट को सीमित करना और सोते या बैठे हों तो धीरे-धीरे उठना चाहिए।