कार्डियोमायोपैथी क्या है? जानें कितने प्रकार की होती है यह बीमारी

कार्डियोमायोपैथी एक हृदय रोग है, जो मांसपेशियों के कमजोर या मोटी होने की वजह से होता है। इसमें दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है।

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Written By: Dr. Amit Bhushan Sharma | Updated : May 5, 2026 9:12 PM IST

कार्डियोमायोपैथी हृदय की मांसपेशियों की ऐसी बीमारी है, जिसमें हृदय की दीवारें कमजोर, मोटी या सख्त हो जाती हैं। सामान्य तौर पर हृदय हर धड़कन के साथ खून को पूरे शरीर में पंप करता है, लेकिन इस बीमारी में यह क्षमता प्रभावित हो जाती है। इसकी वजह से शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है और कई तरह की जटिलताएं होने लगती हैं। इस स्थिति में हार्ट फेलियर और अनियमित दिल की धड़कन का खतरा बढ़ जाता है।

दरअसल, जब हृदय की मांसपेशियां कमजोर होती हैं, तो खून सही तरह से नहीं निकलता है। वहीं, जब मांसपेशी मोटी होती है तो खून के रास्ते में रुकावट आ जाती है और मांसपेशी के सख्त होने पर दिल ठीक से नहीं फैल पाता है। इसलिए इन स्थिति में खून को पंप करना मुश्किल हो जाता है।

कार्डियोमायोपैथी के प्रकार

1. फैलाव वाली कार्डियोमायोपैथी

इसमें हृदय का मुख्य चैम्बर बड़ा हो जाता है। इससे हृदय की पंप करने की ताकत कमजोर पड़ जाती है। आपको बता दें कि यह सबसे सामान्य प्रकार है। यह स्थिति हार्ट फेलियर की वजह बन सकती है।

2. मोटी मांसपेशियों वाली कार्डियोमायोपैथी

इसमें हृदय की मांसपेशियां असामान्य रूप से मोटी हो जाती हैं। इससे खून का बहाव बाधित हो सकता है और अचानक कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ जाता है। यह समस्या ज्यादातर युवाओं में देखने को मिलती है।

3. सख्त दिल वाली कार्डियोमायोपैथी

इसमें हृदय की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं और ठीक से फैल नहीं पातीं। इससे दिल में खून भरने में दिक्कत होती है, जिससे सूजन और सांस फूलने जैसी समस्या होती है।

4. अनियमित धड़कन वाली कार्डियोमायोपैथी

इसमें हृदय की मांसपेशियां धीरे-धीरे फैट या फाइबर में बदल जाती हैं। इससे हृदय की धड़कन अनियमित हो जाती है, जिसे अतालता भी कहा जाता है।

कार्डियोमायोपैथी के लक्षण क्या हैं?

आमतौर पर शुरुआत में इसके कोई लक्षण महसूस नहीं होते हैं। लेकिन, जैसे-जैसे स्थिति गंभीर होती है इसके लक्षण महसूस होने लगते हैं। इसमें शामिल हैं-

  • सीढ़िया चढ़ते समय या थोड़ा सा भारी सामान उठाने पर सांस फूलना
  • हर वक्त सीने में दर्द या दबाव जैसा महसूस होना
  • दिल की धड़कन तेज या अनियमित रहना
  • पैरों, टखनों या पेट में सूजन दिखाई देना
  • अक्सर ही थकान और कमजोरी महसूस होना
  • चक्कर आना या बेहोशी होना

इस बीमारी के कारण क्या हैं?

कार्डियोमायोपैथी बीमारी होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

  • सबसे पहला है जेनेटिक कारण, अगर परिवार में किसी को यह बीमारी है तो आने वाली पीढ़ी में इसका खतरा ज्यादा रहता है।
  • हाई बीपी और कोरोनरी आर्टरी डिजीज के रोगियों में इसका जोखिम ज्यादा बना रहता है।
  • वायरल इन्फेक्शन हृदय की मांसपेशियों को प्रभावित कर सकता है। इससे कार्डियोमायोपैथी रोग हो सकता है।
  • डायबिटीज, थायरॉइड जैसी बीमारियां में इसका खतरा ज्यादा बना रहता है।

इसका इलाज कैसे होता है?

कार्डियोमायोपैथी का इलाज बीमारी के प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है।

1. दवाइयां

इस बीमारी के मरीजों को बीपी कंट्रोल करने की दवाइयां दी जा सकती हैं। इसके अलावा, हृदय पपिंग सुधारने वाली दवाइयों और क्लॉट बनने से रोकने वाली दवाइयां दी जा सकती हैं।

2. मेडिकल डिवाइस

इस बीमारी के कुछ रोगियों में मेडिकल डिवाइस का उपयोग भी किया जाता है। इनमें पेसमेकर का उपयोग किया जाता है, जिससे हृदय की धड़कन को नियंत्रित की जा सके।

3. सर्जरी

कुछ मामलों में हृदय सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। इतना ही नहीं, जब इसकी वजह से हार्ट फेलियर हो जाता है, तो हार्ट ट्रांसप्लांट किया जा सकता है।

बचाव के लिए क्या करें?

  • इस बीमारी से बचाव के लिए बीपी को नियंत्रण में रखें। इसके लिए नमक का सेवन कम मात्रा में करें।
  • रोजाना हल्की एक्सरसाइज करें। आप योग का सहारा भी ले सकते हैं।
  • धूम्रपान और शराब से दूरी बनाकर रखें। इससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ता है।
  • हृदय की नियमित रूप से जांच कराएं। इससे समय पर बीमारी का पता लगाने में मदद मिलेगी।

Disclaimer: कार्डियोमायोपैथी एक गंभीर लेकिन नियंत्रित होने वाली एक बीमारी है। सही समय पर पहचान, नियमित इलाज और हेल्दी लाइफस्टाइल की मदद से जिंदगी को सामान्य बनाया जा सकता है। अगर आपको इसके लक्षण महसूस हो तो अनदेखी बिल्कुल न करें।

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