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कार्डियक हाइपरट्रॉफी (Cardiac Hypertrophy) एक ऐसी मेडिकल कंडीशन है जो हार्ट मसल्स को प्रभावित करती है। इस स्थिति में मरीज के हार्ट में स्ट्रक्चर यानि संरचनात्मक बदलाव आ जाते हैं, जिसके कारण हार्ट की मसल्स मोटी और कठोर हो जाती है। सुनने में यह स्थिति कम खतरनाक लग सकती है लेकिन यदि इसका समय पर सही इलाज न हो तो ये कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
कार्डियक हाइपरट्रॉफी के लिए ऐसी प्रतिक्रियाएं जिम्मेदार होती है जो हृदय पर अतिरिक्त तनाव डालती है:
1. हाई ब्लड प्रेशर, इस स्थिति में हार्ट को पूरे दिन ब्लड की सप्लाई करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है जिसके कारण हार्ट की मसल्स मोटी हो जाती है और ये स्थिति हाइपरट्रॉफी का कारण बन सकती है।
2. हृदय वाल्व रोग
3. वंशानुगत (हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी)
4. मोटापा
5. इन्फिल्ट्राटेरिव कार्डियोमायोपैथी
6. एथलीट या ऐसे लोग जो हैवी वर्कआउट करते हैं उन्हें कार्डियक हाइपरट्रॉफी हो सकती है जिसे "एथलीट का हृदय" भी कहते हैं।
इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना मुश्किल हो सकता है क्योंकि स्थिति लगभग सामान्य रहती है। लेकिन जैसे जैसे स्थिति बिगड़ती है निम्न लक्षण महसूस किए जा सकते हैं:
1. सांस की तकलीफ, खासकर शारीरिक गतिविधि के दौरान।
2. थकान और कमजोरी
3. सीने में दर्द या बेचैनी
4. तेज या अनियमित दिल की धड़कन का तेज या अनियमित होना
5. चक्कर आना या बेहोशी होना
कार्डियक हाइपरट्रॉफी के निदान के लिए डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री चेक करने के साथ शारीरिक जांच और ब्लड टेस्ट कराते हैं। हृदय की संरचना और कामकाज सामान्य है या नहीं ये देखने के लिए डॉक्टर इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी या ईकेजी), इकोकार्डियोग्राम और कार्डियक एमआरआई स्कैन का उपयोग कर सकते हैं।
कार्डियक हाइपरट्रॉफी के उपचार का मुख्य उद्देश्य बीमारी का कारण जानना और लक्षणों को कंट्रोल करना है। व्यक्ति की स्थिति के आधार पर, उपचार के विकल्प निम्न हो सकते हैं:
1. लाइफस्टाइल में बदलाव करना: संतुलित डाइट, नियमित एक्सरसाइज और वजन प्रबंधन कार्डियक हाइपरट्रॉफी को मैनेज करने में मदद करते हैं। सकते हैं। खासकर तब जब ये हाइपरटेंशन और मोटापे से संबंधित हो।
2. दवाएं: डॉक्टर ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने, हार्ट को अतिरिक्त प्रेशर से बचाने और हाइपरट्रॉफी के लिए जिम्मेदार स्थितियों का इलाज करने के लिए दवाएं लिख सकते हैं।
3. सर्जिकल हस्तक्षेप: कुछ मामलों में, खासकर तब जब हृदय वाल्व संबंधी परेशानियां शामिल होती हैं तब वाल्व रिपेयर या इसके रिप्लेसमेंट के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
4. इंप्लांटेबल कार्डियक डिवाइस: एरिथमिया या हार्ट फेलियर वाले लोगों के लिए पेसमेकर या डिफाइब्रिलेटर जैसी इंप्लांटेबल कार्डियक डिवाइस की आवयकता हो सकती है जो हार्ट रिदम और कार्डियक फंक्शन को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
कार्डियक हाइपरट्रॉफी के लिए जिम्मेदार कारणों और लक्षणों को समझकर और हार्ट के अनुसार सही लाइफस्टाइल अपनाकर व्यक्ति कार्डियक हाइपरट्रॉफी की स्थिति से बच सकता और इसे मैनेज कर सकता है। जिससे उसका हृदय हमेशा के लिए स्वस्थ रहे। याद रखें, एक स्वस्थ हृदय लंबे, खुशहाल जीवन की कुंजी है।
(Inputs: Dr Abhijit Borse, Interventional cardiologist at Asian Heart Institute, Mumbai)