
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : August 7, 2025 10:02 AM IST
What is Breastfeeding in Hindi: स्तनपान शिशु और मां दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ पोषण का एक जरिया नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक कवच है जो बच्चे को कई बीमारियों से बचाता है। मां का दूध पूरी तरह से संतुलित होता है और इसमें ऐसे पोषक तत्व और एंटीबॉडी होते हैं जो शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। यह बच्चे के दिमाग के विकास और शारीरिक वृद्धि के लिए भी बहुत जरूरी है। डॉ. मितुल गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, कोकून हॉस्पिटल, जयपुर ने इस बारे में कुछ खास जानकारी दी हैं, जिनके बारे में हम आपको इस लेख में बताने वाले हैं।
स्तनपान सिर्फ एक सामान्य प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक मां और बच्चे के बीच एक खास व गहरे रिश्ते को दर्शाता है और उसका एक प्रमाण भी होता है। ऐसा नहीं है कि स्तनपान सिर्फ शिशु के लिए ही जरूरी है, बल्कि उतना ही जरूरी मां के लिए भी होता है। स्तनपान सिर्फ बच्चे की भूख ही नहीं मिटाता, बल्कि उसे पोषण देता है और साथ ही बीमारियों से बचाने में मदद करता है। क्योंकि बच्चे के लिए मां का दूध एक संपूर्ण आहार होता है, जिसमें वे सारे तत्व होते हैं, जो बच्चे को उस समय चाहिए होते हैं। मां और बच्चे के बीच स्तनपान से जुड़ा यह रिश्ता आगे जाकर उन्हें शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक तौर पर दोनों को जोड़ता है और पोषण देता है। अगस्त माह में जब हम "स्तनपान सप्ताह" मना रहे हैं, यह समझना बेहद जरूरी है कि यह नवजात शिशु के स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव रखने में कितना अहम योगदान देता है।
स्तनपान बच्चे और मां दोनों के लिए जरूरी है और इस लेख में एक्सपर्ट्स आपको बता रहे हैं, कि आखिर मां के दूध को बच्चे के लिए इतना जरूरी क्यों माना जाता है।
मां का दूध बच्चे के लिए सबसे अच्छा होता है। इसमें वो सब चीजें होती हैं जो बच्चे के विकास, हड्डियों और दिमाग के लिए जरूरी होती हैं। यह बीमारियों से बचाता है, जैसे कि सर्दी-खांसी, दस्त और मोटापा। माँ का दूध बच्चे और माँ के बीच प्यार का रिश्ता भी मजबूत करता है और मां को भी जल्दी स्वस्थ होने में मदद करता है। इसलिए मां का दूध बच्चे के लिए सबसे जरूरी और सबसे बेहतर पोषण होता है।
भारत में कई जगहों पर साफ पानी और अच्छा खाना नहीं मिलता। ऐसे में माँ का दूध बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित और सस्ता तरीका है जिससे उन्हें पूरा पोषण और सुरक्षा मिलती है। लेकिन हर मां को यह मौका मिलना चाहिए, चाहे वो शहर में हो या गांव में, दफ्तर में काम करती हो या खेत में। खासतौर पर जो महिलाएं दफ्तरों या फैक्ट्रियों में काम करती हैं, उन्हें ऐसी जगह मिलनी चाहिए जहां वे आसानी से अपने बच्चे को दूध पिला सकें।
मां का दूध पिलाना सिर्फ मां की जिम्मेदारी नहीं है, ये पूरे परिवार और समाज की जिम्मेदारी है। हर अस्पताल में ऐसा माहौल होना चाहिए जहाँ माँ को दूध पिलाने के लिए मदद मिले। गाँवों और शहरों में काम करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सही जानकारी और ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। घर में पति और बड़े बुजुर्गों को भी माँ की मदद करनी चाहिए।
स्तनपान बच्चे के जीवन की सबसे अच्छी शुरुआत है। यह मां का अपने बच्चे को पहला तोहफा है। समाज को चाहिए कि वह मां को पूरा सहयोग दे ताकि वह अपने बच्चे को अच्छे से पाल सके। अगर हम एक स्वस्थ और मजबूत समाज बनाना चाहते हैं, तो माँ और बच्चे के इस पहले रिश्ते को सम्मान देना और बढ़ावा देना बहुत जरूरी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जन्म के बाद 6 महीने तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध दिया जाना चाहिए। इसके बाद दो साल या उससे ज्यादा समय तक दूध के साथ-साथ सही खाना भी दिया जाए। लेकिन दुनिया में सिर्फ 44% बच्चों को ही पहले 6 महीनों तक केवल माँ का दूध मिल पाता है। भारत में भी कई बार जागरूकता के बावजूद लोग स्तनपान शुरू करने या उसे लंबे समय तक जारी रखने में दिक्कत महसूस करते हैं। इसकी वजहें सामाजिक सोच, सुविधाओं की कमी और जानकारी की कमी हैं।
डॉ. कर्णिका तिवारी, हेड ऑफ डिपार्टमेंट, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, मदरलैंड हॉस्पिटल, नोएडा ने कहा कि, "स्तनपान एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो न केवल बच्चे को संपूर्ण पोषण देती है बल्कि उसे रोगों से लड़ने की ताकत भी देती है। मां का दूध नवजात के लिए पहला और सबसे असरदार इम्यूनिटी बूस्टर है, जो बच्चे को कब्ज दस्त, सर्दी खांसी, निमोनिया और मोटापे जैसी समस्याओं से बचाता है। जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करना और पहले छह महीनों तक केवल माँ का दूध देना शिशु मृत्यु दर को कम करने का सबसे कारगर उपाय है। यह माँ के लिए भी फायदेमंद है, इससे गर्भाशय जल्दी सामान्य होता है, वजन नियंत्रित रहता है और ओवरी व ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी घटता है। दुर्भाग्यवश, कई महिलाएं आज भी सामाजिक दबाव, कार्यस्थल पर सुविधाओं की कमी और जानकारी के अभाव में स्तनपान नहीं करा पातीं। ऐसे में परिवार, समाज और सरकार की जिम्मेदारी है कि वे हर मां को स्तनपान के लिए सकारात्मक माहौल और मदद दें। स्तनपान माँ का नहीं, पूरे समाज का विषय है और इसका समर्थन एक स्वस्थ पीढ़ी की नींव रखता है।"
स्तनपान बच्चे के लिए फायदेमंद तो है ही उतना ही फायदेमंद यह मां के लिए भी होता है, लेकिन बहुत सी महिलाएं इस बारे में जानती नहीं है। स्तनपान कराने से मां को कई शारीरिक और मानसिक लाभ मिलते हैं। स्तनपान कराने से कैलोरी बर्न होती है, जिससे गर्भावस्था के दौरान बढ़ रहे वजन को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। साथ ही स्तनपान कराने से ऑक्सीटोसिन हार्मोन रिलीज होता है, प्रसव के बाद होने वाली ब्लीडिंग आदि को कम करने में मदद करता है। यहां तक कि कुछ रिपोर्ट्स का यह मानना भी है कि स्तनपान कराने से ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कभी कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
सिर्फ शारीरिक लाभ ही नहीं बल्कि स्तनपान कराने से मानसिक लाभ भी हो सकते हैं, जिनमें से सबसे पहला लाभ यह है कि ब्रेस्टफीडिंग मां और बच्चे के रिश्ते को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है। इसके अलावा स्तनपान कराने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, क्योंकि इससे मेंटल स्ट्रेस, चिंता व अवसाद आदि को कम करने में मदद मिलती है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।