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Brain Death क्या होती है? कब किया जा सकता है अंगदान, जानिए डॉक्टर क्या कहते हैं

ब्रेन डेथ एक ऐसी स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क पूरी तरह से काम करना बंद कर चुका है और उसे इलाज के जरिए भी ठीक नहीं किया जा सकता है। कुछ ब्रेन डेथ रोगियों का अंगदान किया जाता है। आइए, डॉ. भुपेश कुमार से जानते हैं कि ब्रेन डेथ में अंगदान कब किए जा सकते हैं?

Written By Anju Rawat
Published : July 31, 2026 8:46 PM IST

brain death image (AI Generated Image)

Brain Death: क्या आपने कभी ब्रेन डेथ के बारे में सुना है? कई लोग इसे कोमा समझ लेते हैं, जबकि कोमा और ब्रेन डेथ दोनों पूरी तरह से अलग-अलग होते हैं। ब्रेन डेथ एक स्थिति है, जब मस्तिष्क और ब्रेन स्टेम की सभी गतिविधियां पूरी तरह बंद हो जाती हैं। इसका मतलब है कि मस्तिष्क में अब कोई गतिविधि नहीं है और न ही मस्तिष्क दोबारा काम करना शुरू कर सकता है। इस अवस्था में मरीज अपने दम पर जीवित नहीं रह सकता है, उसके कुछ अंगों को सिर्फ वेंटिलेटर की मदद से सपोर्ट दिया जा सकता है। आइए, राष्ट्रीय अंगदान दिवस (हर साल 3 अगस्त को मनाया जाता है) के मौके पर जानते हैं कि ब्रेन डेथ वाले लोगों का अंगदान कब किया जा सकता है?

ब्रेन डेथ क्या होती है?

Neuromet wellness care, गुरुग्राम के डायरेक्टर-न्यूरोलॉजी डॉ. भुपेश कुमार बताते हैं कि ब्रेन डेथ एक ऐसी स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क पूरी तरह और हमेशा के लिए काम करना बंद कर देता है। कई लोग ब्रेन डेथ को कोमा समझ लेते हैं, जबकि कोमा से इंसान वापस लौट सकता है। लेकिन, ब्रेन डेथ को ठीक नहीं किया जा सकता है। यही वजह है कि भारत समेत कई देशों में ब्रेन डेथ को कानूनी रूप से मृत्यु माना जाता है। आपको बता दें कि ब्रेन डेथ की पुष्टि डॉक्टर मेडिकल एग्जामिनेशन के आधार पर करते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में इसकी पुष्टि के लिए कई दूसरी जांचें भी की जाती हैं।

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brain death

क्या वेंटिलेटर से ब्रेन डेथ के मरीज ठीक हो सकते हैं?

डॉ. भुपेश कुमार बताते हैं, "अक्सर लोगों को लगता है कि अगर किसी ब्रेन डेथ मरीज को वेंटिलेटर पर रखा जाए, तो वह ठीक हो सकता है या ठीक होने की संभावना है। जबकि, ऐसा बिल्कुल नहीं होता है। ब्रेन डेथ मरीज को वेंटिलेटर पर रखकर भी उसका मस्तिष्क दोबारा जीवित नहीं हो सकता है। वेंटिलेटर से सिर्फ फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाने और रक्त संचार को बनाए रखने में मदद मिलती रहती है।"

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ब्रेन डेथ के बाद अंगदान कैसे संभव हो सकता है?

डॉ. भुपेश बताते हैं कि ब्रेन डेथ की पुष्टि के बाद ही अंगदान पर विचार किया जाता है। जब किसी मरीज को ऑफिशियल डॉक्टरों की टीम द्वारा ब्रेन डेथ घोषित कर दिया जाता है, तो कानून के अनुसार परिवार की सहमति मिलने के बाद ही उसके अंगों को दान किया जा सकता है। अगर परिवार की सहमति नहीं है, तो उसके अंगदान नहीं किए जा सकते हैं।

दरअसल, ब्रेन डेथ मरीज को वेंटिलेटर की मदद से शरीर के अंगों को कुछ समय तक ऑक्सीजन मिलती रहती है, इसलिए वे ट्रांसप्लांट के लिए सुरक्षित माने जा सकते हैं। डॉ. भुपेश बताते हैं कि पहले मरीज की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाते हैं। लेकिन, जब मरीज को पूरी तरह से ब्रेन डेथ की पुष्टि हो जाती है और इलाज काम नहीं कर रहा होता है, तब अंगदान की प्रक्रिया पर चर्चा और विचार किया जाता है।

ब्रेन डेथ के संकेत क्या हो सकते हैं?

betterhealth.vic.gov.au के अनुसार, ब्रेन डेथ की पुष्टि सिर्फ प्रशिक्षित डॉक्टरों द्वारा पूरा मेडिकल एग्जामिनेशन के बाद ही की जाती है। इस दौरान मरीज में कुछ संकेत दिख सकते हैं। जैसे-

  • दर्द देने पर शरीर में कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है।
  • पुतलियां रोशनी पर प्रतिक्रिया नहीं देती हैं।
  • कान में ठंडा पानी डालने पर भी आंखों में कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है।
  • आंख की सतह को छूने पर पलकें नहीं झपकती हैं।
  • सिर को हिलाने पर आंखों में कोई हरकत नहीं होती हैं।
  • वेंटिलेटर हटाने पर मरीज खुद सांस नहीं ले पाता है।

लेकिन, इनमें से किसी एक लक्षण के आधार पर ब्रेन डेथ घोषित नहीं किया जा सकता है। डॉक्टरों की पूरी टीम सारे प्रोटोकॉल और क्लिनिकल एग्जामिनेशन करती है, उसके आधार पर ही ब्रेन डेथ की पुष्टि होती है।

किन कारणों से हो सकता है ब्रेन डेथ?

donatelifecalifornia.org के अनुसार, ब्रेन डेथ आमतौर पर किसी गंभीर चोट या बीमारी के बाद हो सकती है। जब मस्तिष्क तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाती है या मस्तिष्क में इतनी ज्यादा सूजन आ जाती है कि उसे ठीक करना संभव नहीं हो पाता है। इनके अलावा, स्ट्रोक, लंबे समय तक कार्डियक अरेस्ट और मस्तिष्क में गंभीर सूजन जैसी स्थिति में भी ब्रेन डेथ हो सकती है।

Disclaimer: ब्रेन डेथ वाले व्यक्ति को कई देशों में कानूनी रूप से मृत्यु मान जाता है। उसके अंग वेंटिलेटर के सपोर्ट पर ही कार्य कर सकते हैं। ब्रेन डेथ, कोमा से पूरी तरह अलग होता है। ब्रेन डेथ से व्यक्ति को वापस ठीक या जीवित करना संभव नहीं हो पाता है। जब सभी मेडिकल एग्जामिनेशन के बाद किसी व्यक्ति में ब्रेन डेथ की पुष्टि हो जाती है, तो उसके कानूनी प्रावधानों और परिवार की सहमति के आधार पर अंगदान का विचार किया जाता है।