World Osteoporosis Day: बोन डेंसिटी टेस्ट क्या है? डॉक्टर से जानें यह क्यों जरूरी है?

Osteoporosis Kya Hota Hai: जहां 50-55 के बाद हड्डियों कमजोर होती थीं, वहीं आज 25 के बाद ही युवा पैरों व शरीर की अन्य हड्डियों में दर्द की शिकायत कर रहे हैं। ऐसा क्यों हो रहा है, आइए डॉक्टर से जानते हैं।

World Osteoporosis Day: बोन डेंसिटी टेस्ट क्या है? डॉक्टर से जानें यह क्यों जरूरी है?
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Written by Vidya Sharma |Published : October 20, 2025 7:59 PM IST

Bone Density Kya Hoti Hai: हर साल 20 अक्टूबर को वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हड्डियों की सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कैल्शियम और मिनरल्स की मात्रा घटने लगती है, जिससे हड्डियां कमजोर होकर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी का कारण बन सकती हैं। यह ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि मामूली चोट या गिरने से भी टूट सकती हैं। इस समस्या की समय पर पहचान के लिए नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. हेमेन्द्र कुमार अग्रवाल ने बताया कि सबसे ज्यादा जरूरी बोन डेंसिटी टेस्ट करना है।

आपको बता दें कि यह एक विशेष एक्स-रे जांच है, जिसे DEXA स्कैन(Dual Energy X-ray Absorptiometry) कहा जाता है। इस टेस्ट के माध्यम से हड्डियों में मौजूद कैल्शियम और मिनरल्स की मात्रा मापी जाती है, जिससे हड्डियों की मजबूती और ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम का पता लगाया जा सकता है। यह जांच पूरी तरह दर्द रहित और सुरक्षित होती है, जिसमें बहुत कम मात्रा में रेडिएशन का उपयोग किया जाता है। आइए इस विषय पर गहराई से जानते हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस है साइलेंट डिजीज

ऑस्टियोपोरोसिस को अक्सर “साइलेंट डिजीज” कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण आमतौर पर स्पष्ट नहीं होते। जब तक हड्डी टूट न जाए, तब तक समस्या का पता नहीं चलता। बोन डेंसिटी टेस्ट समय रहते बीमारी की पहचान करने में सहायक होता है। यह जांच विशेष रूप से 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं, मेनोपॉज के बाद की महिलाओं, 60 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों, हड्डियों के फ्रैक्चरका पारिवारिक इतिहास रखने वाले व्यक्तियों और लंबे समय तक स्टेरॉयड या अन्य दवाओं का सेवन करने वालों के लिए महत्वपूर्ण है।

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ऑस्टियोपोरोसिस के कारण

कैल्शियम या विटामिन D की कमी तथा शारीरिक रूप से निष्क्रिय जीवन शैली भी हड्डियों के कमजोर होने का कारणबन सकती है। ऑस्टियोपोरोसिस से आर्थराइटिस का खतरा भी बढ़ सकता है और यह जोड़ों में दर्द का प्रमुख कारण बनता है। कमजोर हड्डियां वजन और दबाव का उचित भार नहीं उठा पातीं, जिससे जोड़ों में सूजन, अकड़न और असहजता की स्थिति बन जाती है।

बोन डेंसिटी टेस्ट से जुड़ी जरूरी बातें

बोन डेंसिटी टेस्ट के नतीजे T-score के रूप में मिलते हैं। T-score -1 से अधिक होने पर हड्डियां सामान्य मानी जाती हैं, -1 से -2.5 के बीच होने पर ऑस्टियोपीनिया (हड्डियों में हल्की कमजोरी) और -2.5 से नीचे आने पर ऑस्टियोपोरोसिस की पुष्टि होती है। परिणामों के अनुसार आहार, सप्लीमेंट, व्यायाम और जीवनशैली में परिवर्तन की सलाह दी जाती है ताकि हड्डियों की मजबूती बढ़ाई जा सके।

हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए क्या करें?

हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट का शारीरिक व्यायाम करें, धूप में समय बिताएं ताकि विटामिन D की पर्याप्त मात्रा मिले, और भोजन में दूध, दही, पनीर, बादाम, पालक जैसे कैल्शियम युक्त पदार्थ शामिल करें। धूम्रपान और शराब का सेवन हड्डियों की सेहत को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए इनसे बचना चाहिए।

बोन डेंसिटी टेस्ट एक सरल लेकिन जीवन रक्षक जांच है, जो समय रहते हड्डियों की कमजोरी का संकेत देकर ऑस्टियोपोरोसिस और इसके जटिल परिणामों से बचाव में मदद करती है। मजबूत हड्डियां, मजबूत जीवन की नींव हैं- इसलिए हड्डियों की जांच करवाना और उनका संरक्षण बनाए रखना आवश्यक है।

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Highlights

  • ऑस्टियोपोरोसिस को अक्सर “साइलेंट डिजीज” कहा जाता है।
  • बोन डेंसिटी टेस्ट के नतीजे T-score के रूप में मिलते हैं।
  • हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट का शारीरिक व्यायाम करें।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।