क्या आपका सिर्फ वजन बढ़ा हुआ है या फिर मोटापा ही आ गया है? BMI से जानें अपने हेल्थ रिस्क

Body Mass Index: फिट रहने के लिए आपको BMI के बारे में जरूर जानना चाहिए, क्योंकि यह सिर्फ आपके शरीर के वजन को नहीं बताता बल्कि उसके बारे में और भी बहुत सी महत्वपूर्ण जानकारियां देता है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : April 2, 2026 5:37 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Shrey Srivastava

अब समय आ गया है कि मोटापा या शरीर के बढ़ते वजन को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया जाए, क्योंकि अब हर कोई जानता है कि शरीर का बढ़ता वजन या मोटापा एक नहीं बड़ी बीमारियों का कारण बन सकता है और उनमें कुछ बीमारियां तो जानलेवा भी हो सकती हैं। लेकिन कैसे पता चलेगा कि आपका वजन बढ़ा हुआ हा या फिर आपको मोटापा ही हो चुका है? ऐसा आपको BMI यानी बॉडी मास इंडेक्स से पता चलेगा। हेल्थ एक्सपर्ट्स भी कहते हैं कि अपने बॉडी मास इंडेक्स पर नजर रखना बेहद जरूरी है और तभी आप शरीर की जरूरत के अनुसार खुद को फिट रख पाएंगे और अपने खानपान में ठीक से बदलाव कर पाएंगे। आज के समय में हर किसी को बीएमआई की सही जानकारी होनी चाहिए, ताकि आप खुद और अपने परिवार को बढ़ती बीमारियों के खतरे से बचा सकें, चलिए आगे जानते हैं बीएमआई के बारे में।

BMI के बारे में समझें

आसान शब्दों में कहें तो यह एक पैमाना है, जो शरीर की लंबाई और वजन और उम्र के आधार पर बताता है कि आपके शरीर का वजन ज्यादा (Overweight) है, कम (Underweight) है या फिर आप मोटापे का शिकार (Obesity) हो चुके हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार अगर आपका BMI सही रेंज में है, तो आपको दिल की बीमारी, टाइप-2 डायबिटीज और कुछ खास तरह के कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है कि BMI आपके शरीर में चर्बी के स्तर को नहीं नाप सकता है।

(और पढ़ें - वेट लॉस करने का सबसे फास्ट तरीका क्या है)

BMI कैलकुलेट कैसे करें

दरअसल, बीएमआई एक फॉर्मूला पर काम करता है और इसलिए अपना बॉडी मास इंडेक्स पता लगाने के लिए आपको उस फॉर्मूले को समझना होगा।

BMI = वजन (किलोग्राम में) / कद (मीटर में)

उदाहरण के लिए - अगर आपका वजन 60 किलो है और लंबाई 1.5 मीटर है, तो आपका BMI लगभग 26.7 होगा।

BMI की मदद से आपको यह जानने में मदद मिल मिल सकती है कि आपके शरीर के लिए सही डाइट क्या और कितनी होगी और आपके शरीर को कितनी एक्सरसाइज की जरूरत है। हालांकि, अगर आपको बॉडी बिल्डिंग करनी है, आपकी उम्र बहुत कम या बहुत ज्यादा है और यहां तक कि एथनिसिटी के आधार पर भी BMI के पैमाने पर कई बार फिर से विचार करना पड़ सकता है।

उदाहरण के लिए - अगर आप मसल गेन कर रहे हैं, तो हो सकता है कि आपका BMI ज्यादा दिखा दे। जबकि आपका वजन आपके अनुसार सही हो, क्योंकि मांसपेशियां ज्यादा सघन होती हैं और इसलिए उनमें चर्बी से ज्यादा वजन होता है।

वैश्विक स्तर के मानकों के अनुसार अगर आपका BMI -

BMI लेवलक्या दर्शाता है?
17.0 से नीचे हैबहुत ज्यादा पतलापन दर्शाता है
18.5 से नीचे हैशरीर का वजन सामान्य से कम होना दर्शाता है
18.5 से 24.9 के बीचसामान्य शारीरिक वजन दर्शाता है
25 से ज्यादाशरीर का वजन जरूरत से ज्यादा दर्शाता है
30 या उससे ज्यादामोटापे को दर्शाता है

भारतीयों के लिए बीएमआई स्टैंडर्ड - जैसा कि हमने आपको ऊपर भी बताया है कि एथनिसिटी के आधार पर BMI में के पैमाने अलग-अलग हो सकते हैं। इसी प्रकार भारतीयों के शरीर की बनावट के आधार पर BMI के अलग पैमाने हैं, जिन्हें इन्डियन कट-ऑफ कहा जाता है।

मोटापे से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं

मोटापा आज के समय में एक बड़ी हेल्थ कंडीशन बन चुका है, सीडीसी (CDC) के अनुसार अगर किसी व्यक्ति का वजन ज्यादा है या फिर वह मोटापे का शिकार है, तो तो उससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। मेटापे के कारण होने वाली बीमारियां निम्न हो सकती हैं -

  • उम्र कम होना
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • हाई या लो कोलेस्ट्रॉल
  • हाई ट्राइग्लिसराइड्स
  • टाइप 2 डायबिटीज
  • कोरोनरी हार्ट डिजीज
  • स्ट्रोक
  • गॉलब्लैडर डिजीज
  • ओस्टियोआर्थराइटिस
  • स्लीप एप्निया
  • ब्रीथिंग प्रॉब्लम्स
  • कैंसर
  • मानसिक बीमारियां
  • बदन दर्द

अगर BMI ज्यादा है तो क्या करें?

अगर आपके शरीर का वजन सामान्य से ज्यादा है या आप मोटापे से जूझ रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आपका BMI बहुत ज्यादा है। ऐसे में आप अपने लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव ला सकते हैं, जिससे आपको काफी फायदा भी मिलेगा। शारदा हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट - इंटरनल मेडिसिन डॉ. श्रेय श्रीवास्तव ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति का भारतीय मानकों के अनुसार भी BMI ज्यादा है, तो उसे अपने स्वास्थ्य की अच्छे से जांच करा लेनी

चाहिए और साथ ही इन बातों का ध्यान भी रखना चाहिए -

  • डाइट में हेल्दी फूड्स शामिल करें जिसमें साबुत अनाज, खूब सारी सब्जियां व फल शामिल हों
  • शारीरिक रूप से एक्टिव रहना जरूरी है, इसलिए रेगुलर एक्सरसाइज करें और सुबह शाम सैर करें
  • ज्यादा ऑयली, ज्यादा शुगर वाले, तने-भुने व अन्य प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन कम से कम रखें
  • रोजाना पर्याप्त नींद लें, पर्याप्त पानी पीएं और स्ट्रेस न होने दें

डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि हाई BMI स्केल को एक चेतावनी संकेत की तरह समझना चाहिए, न कि उसे अपनी पहचान ही समझ लेना चाहिए। अगर वजन ज्यादा है तो आपका ध्यान सिर्फ वजन कम करने पर ही नहीं बल्कि ओवरऑल हेल्थ को बेहतर बनाने पर होना चाहिए।

रिसर्च कहती हैं कि अगर आपके शरीर का वजन बढ़ा हुआ है, तो ऐसे में अगर आप अपने कुल वजन का 5 से 10 फीसद वजन भी कम करते हैं, तो इससे हार्ट और मेटाबॉलिज्म हेल्थ में काफी सुधार लाया जा सकता है और इनसे जुड़ी बीमारियों का खतरा भी काफी हद तक कम हो सकता है।

आगे डॉ. श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि अगर साइंटिफिक नजरिए से देखा जाए तो BMI कम करने में डाइट का रोल ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि वही तय करती है कि हम कितनी एनर्जी ले रहे हैं। उसके बाद एक्सरसाइज का रोल एक सपोर्ट के रूप में आता है, जिसकी मदद से हम अतिरिक्त एनर्जी को खर्च कर पाते हैं। एक्सरसाइज व फीजिकल एक्टिविटी बॉडी कंपोजिशन सुधारती हैं और वजन कम करने के रिजल्ट को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करती है।

BMI के अलावा भी अन्य तीरके हैं -

  • कमर का माप - इसकी मदद से पेट की चर्बी को नापने में मदद मिलती है
  • वेस्ट-हिप रेशो - शरीर में फैट किस तरीके से और कितना फैला है
  • बॉडी फैट परसेंटेज - इसकी मदद से शरीर में फैट और मसल्स का पता चलता है
  • मेटाबॉलिक मार्कर्स - इसमें कुछ जरूरी टेस्ट किए जाते हैं जैसं ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल और ब्लड प्रेशर
  • फिजिकल फिटनेस - इसमें शारीरिक क्षमता की जांच की जाती है, जिसमें दिल और फेफड़ों की क्षमता व मांसपेशियों की ताकत का पता लगाया जाता है

पूरी तरह से समझ पाना मुश्किल

एनआईएच के अनुसार, किसी व्यक्ति में हार्ट या मेटाबॉलिक डिजीज का खतरा कितना है, यह सिर्फ BMI से पूरी तरह नहीं पता लगाया जा सकता है और खासतौर पर अगर पेट की चर्बी है तो इसका अंदाजा लगाना और भी मुश्किल हो जाता है। हालांकि, इन बीमारियों के जोखिम का बेहद अंदाजा BMI में कमर के नाप से लगाया जा सकता है, हालांकि, इसे भी सटीक कहना उचित नहीं होगा। लेकिन ऐसा कहा जा सकता है, कि BMI के साथ-साथ कमर का नाप लेने से स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां ली जा सकती है। इसलिए BMI के साथ-साथ कमर का नाप लेने की सलाह भी दी जाती है।

हालांकि, अपने BMI के बारे में जानना और समझना, खुद के लिए कोई इमेज सेट करना नहीं है बल्कि अपने स्वास्थ्य के बारे में सही जानकारी लेना है और किसी भी बीमारी के खतरे को कम करना है। आपको इस बारे में यह जरूर जानना चाहिए कि कि बढ़ते वजन से होने वाली किसी भी बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है, सिर्फ अपने बढ़ते वजन को कंट्रोल करके।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।