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Bleeding Disorder Symptoms: जब किसी वजह से हमें चोट लग जाती है और शरीर से खून बहने लगता है तो थोड़ी देर बाद खुद ब खुद खून बहना बंद हो जाता है। यह शरीर द्वारा नेचुरली होनेवाली एक प्रक्रिया के चलते होता है जिसमें चोट वाली जगह पर खून के थक्के (blood clots) बन जाते हैं और ब्लीडिंग धीमी होकर रूक जाती है। लेकिन, अगर चोट लगने के बाद लगातार खून बहता रहे (continuous bleeding) और बहुत अधिक ब्लड लॉस (blood loss) हो तो यह स्थिति किसी ब्लीडिंग डिसॉर्डर का संकेत हो सकती है।
ब्लीडिंग डिसॉर्डर (Bleeding disorders) हमारे रक्त में प्रोटीन और हेल्दी प्लेटलेट्स की कम मात्रा के कारण (signs of low level of healthy platelets) हो सकती है। जैसा कि रक्त में मौजूद प्रोटीन क्लॉटिंग की प्रक्रिया में मदद करता है। लेकिन ब्लीडिंग डिसॉर्डर की स्थिति में शरीर में यह प्रोटीन कम होता है और इसी वजह से ब्लीडिंग नहीं रूक पाती। इस लेख में बात करेंगे ब्लीडिंग डिसॉर्डर के कारणों और लक्षणों के बारे में साथ ही जानें कि ब्लीडिंग डिसॉर्डर का उपचार किस तरह किया जाता है।
विटामिन के (Vitamin K) की कमी हो जाने के कारण शरीर अंदर से कमजोर होने लगता है और इसकी वजह से आपको ब्लीडिंग डिसॉर्डर की समस्या भी हो सकती है। जब शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन के नहीं मिलता तो इससे शरीर में ब्लड क्लॉटिंग नहीं हो पाती। इसीलिए जब सर्जरी होती है या किसी तरह की चोट लगती है तो रक्त तेजी से बहने लगता है। (symptoms of vitamin K deficiency in the body)
शरीर को स्वस्थ रखनेवाली लाल रक्त कणिकाओं (Red blood cells) का निर्माण जब कम होता है या ब्लड सेल्स की मात्रा में असंतुलन होता है तो इससे ब्लीडिंग डिसऑर्डर की समस्या आ सकती है।
किसी पुरानी बीमारी का इलाज करा रहे लोगों या लगातार दवाएं खाने वाले लोगों में उन दवाओं के कई साइड-इफेक्ट्स भी दिखायी दे सकते हैं। इनमें से कुछ दवाओं के नुकसान के तौर पर ब्लीडिंग डिसॉर्डर जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं।
कुछ लोगों को ब्लीडिंग डिसॉर्डर्स की समस्या परिवार से विरासत में मिल सकती है यानि अनुवांशिक कारणों से भी यह स्थिति बन सकती है। अगर किसी के माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी को ब्लीडिंग डिसॉर्डर हो तो उन्हें भी यह समस्या हो सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार ब्लीडिंग डिसऑर्डर से जुड़ी समस्याएं होने या उसके लक्षण दिखायी देने पर उनकी तरफ ध्यान ना देना एक बड़ी गलती साबित हो सकता है। ब्लीडिंग डिसॉर्डर्स की वजह से ब्रेन, जोड़ों और आंतों में भी रक्तस्राव हो सकता है और ये स्थितियां जानलेवा साबित हो सकती हैं।
ब्लीडिंग डिसॉर्डर के इलाज के लिए डॉक्टर सबसे पहले स्थिति की गम्भीरता समझते हैं और उसके आधार पर दवाएं मरीज को दी जाती है। जैसे कुछ लोगों के शरीर में आयरन की कमी हो जानेसे भी ब्लीडिंग बढ़ जाती है। ऐसे में मरीज को केवल आयरन की गोलियां खाने की सलाह दी जाती है और उसकी स्थिति में होनेवाले बदलावों के आधार पर इलाज आगे बढ़ाया जा सकता है।
(डिस्क्लेमर:इस लेख में दी गई बीमारी और उसके उपचार से जुड़ी सभी जानकारियां सूचनात्मक उद्देश्य से लिखी गयी है। किसी बीमारी की चिकित्सा से जुड़े किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए कृपया अपने चिकित्सक का परामर्श लें।)