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Bipolar Disorder kya hota hai: क्या होगा जब लगने लगे कि पूरी दुनिया आपके खिलाफ साजिश करने में लगी हुई है? अचानक से बेचैनी बढ़ जाए, अंदर से पूरा निगेटिविटी भरी हुई हो, कोई कुछ भी बोले लगता है कि वह मेरे खिलाफ साजिश कर रहा है, खुदकुशी करने का मन करने लगे और पता नहीं क्या क्या महसूस होने लगे! ये सभी बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण (Bipolar Disorder Symptoms) हो सकते हैं। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें निगेटिविटी पूरे विश्वास के साथ आने लगती है। कोई कितना भी यकीन दिलाए लेकिन नहीं होता। पांच सालों तक इस बीमारी से जूझकर ठीक हुए मसहूर रैपर यो यो हनी सिंह (Yo Yo Honey Singh Bipolar Disorder) ने अपने कई इंटरव्यू में इस बीमारी के बारे में खुलकर बताया है। इस विषय पर डॉक्टर राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के साइकोलोजिस्ट एसोसिएट प्रोफेसर (Dr.) A Q Jilani ने के साथ विस्तार से बात की और बीमारी पर खुलकर बताया। आइए जानते हैं कि उन्होंने क्या कुछ कहा।
डॉक्टर जिलानी ने बताया कि, बाइपोलेर डिसऑर्डर एक मानसिक विकार है। जैसा कि इसके नाम से ही पता चल रहा है, इसके दो पोल होते हैं। पहले पोल को मेनिया कहा जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति बहुत ज्यादा एक्साइटेड हो जाता है, अचानक से शरीर में ऊर्जा भर जाती है, नींद नहीं आती, बहुत अधिक बातें करने का मन करता है, मरीज जोखिम भरे काम करने लगता है। वहीं, दूसरा पोल डिप्रेशन की स्थिति होती है जिसमें पेशेंट उदासी, निराशा, बेचैनी और थका हुआ महसूस करता है। इस स्थिति में किसी काम में मन नहीं लगता और अक्सर अकेले का मन करता है।
डॉ. जिलानी ने बताया कि बाइपोलर डिसऑर्डर का खतरा 15 से 35 साल की उम्र में अधिक होती है। इस बीमारी से महिलाएं और पुरुष दोनों प्रभावित हो सकते हैं। हर तरह के लोगों में यह बीमारी हो सकती है। लेकिन नशा करने वाले लोगों में इसका खतरा अधिक होता है।
अधिक समय तक बाइपोलर डिसऑर्डर होने पर साइकोसिस की समस्या हो सकती है। इसे बाइपोलर डिसऑर्डर का उन्नत भी कह सकते हैं। साइकोसिस पेशेंट को अवास्तविक चीजें वास्तविक लगने लगती हैं, पेशेंट को लगने लगता है कि कोई उनके खिलाफ साजिश कर रहा है, उनके सभी कामों पर पानी फेरना चाहता है। कोई कितना भी यकीन दिलाने की कोशिश करे की ऐसा कुछ नहीं है लेकिन पेशेंट को अपनी कल्पनाओं पर दृढ़ विश्वास हो जाता है।
डॉ. जिलानी ने बताया कि भांग, एल्कोहल, चरस और गांजा जैसे नशा करने से बाइपोलर डिसऑर्डर का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि हनी सिंह ने कहा था कि जो लोग शराब का सेवन करते हैं उन्हें ज्यादा खतरा नहीं हैं। लेकिन डॉक्टर ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया।
बाइपोलर डिसऑर्डर से बचने के लिए नशे से दूर रहना बेहद जरूरी है। यदि आप एक बार ठीक हो चुके हैं और दोबारा नशा लेना शुरू करते हैं तो दोबारा बाइपोलर डिसऑर्डर का खतरा बढ़ जाता है।
यदि इससे पहले आपके परिवार में किसी को बाइपोलर डिसऑर्डर हुआ है, तो आपको आसानी से हो सकता है। इसके लिए आपको सावधान रहने की जरूरत है। कोई भी सिम्टम्स दिखाई दे, तो तुरंत विशेषज्ञ को दिखाएं।
यदि आपको बाइपोलर डिसऑर्डर हो गया है तो तुरंत मनोचिकित्सक से मिलें। लगातार उनके संपर्क में रहें और उनके डायरेक्शन को फॉलो करें।
इसके उपचार में परिवार और रिलेटिव का अहम रोल होता है। जैसे ही व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव देखें तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। तुरंत मरीज को किसी मनो चिकित्सक को दिखाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने मनोरोगियों के लिए एक बहुत अच्छी योजना Tele MANAS चलाई है। जहां पेशेंट बिना अस्पताल जाए टोल फ्री नंबर पर कॉल करके डॉक्टर की सलाह ले सकता है।
डॉ. जिलानी ने बताया कि बाइपोलर डिसऑर्डर होने पर मूड स्टेबलाइजर्स, एंटी डिप्रेशन जैसी कुल चार दवाईयां हैं, जिन्हें डॉक्टर की सलाह पर ले सकते हैं। इसके साथ ही योगा, ध्यान, मेडिटेशन और खानपान भी काफी हद तक आपको ठीक करने में मदद कर सकता है। डॉक्टर ने बताया कि इसका इलाज किया जा सकता है।
हनी सिंह (Honey Singh) ने एक इंटरव्यू में अपनी बीमारी के बारे में बताते हुए कहा, इस बीमारी में लगता है कि पूरी दुनिया आपके खिलाफ साजिश में लगी हुई है। कोई अपना भी पास आता है तो लगता है कि वह मारने के लिए आ रहा है। लोग चाहे जितना समझाएं लेकिन समझ में नहीं आता। जिसकी वजह से महीनों अकले रहा। कमरे में कम्यूनिकेशन का कोई साधन नहीं रखता था।