आजकल युवाओं में तेजी से क्यों बढ़ रही हैं रीढ़ की समस्याएं? जानें इनके लक्षण और उपचार का तरीका

Back pain: खराब जीवनशैली और अनहेल्दी लाइफस्टाइल हमारे स्वास्थ्य को कई अलग-अलग जगह से प्रभावित करता आ रहा है। ऐसे में रीढ़ की हड्डी होना आम समस्याएं होती जा रही हैं, जानें इसके कारण और बचाव के तरीके।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : September 12, 2024 12:11 PM IST

What is the reason behind back pain: आजकल युवाओं में भी रीढ़ की हड्डी (spine) की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिसका मुख्य कारण बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठने वाला कार्य, गलत बैठने की आदतें, और शारीरिक गतिविधि की कमी है। रीढ़ की हड्डी की समस्याएं न केवल शारीरिक दर्द का कारण बनती हैं, बल्कि यह जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित करती हैं। रीड की यह समस्या ऐसा फील करते हैं जैसे आप संपूर्ण रूप से बीमार हो आपके लिए रोजाना के दैनिक कार्य करना भी मुश्किल हो जाता है। स्वास्थ्य पेशेवर कहते हैं कि रीढ़ की हड्डी की समस्याएं आजकल युवाओं में आम हो गई हैं, लेकिन इसे सही मुद्रा, नियमित व्यायाम, और स्वस्थ जीवनशैली से रोका जा सकता है और यदि लक्षण गंभीर हों, तो चिकित्सक की सलाह लेकर इसका उपचार किया जा सकता है। लेकिन आखिर में कौन से कारण है कि आजकल युवाओं में रीढ़ की हड्डी की समस्याएं तेजी से बढ़ने लगी है? और क्या इस उपचार के माध्यम से ठीक किया जा सकता है?

1. गलत मुद्रा (Poor Posture)

आजकल अधिकतर लोग इलेक्ट्रॉनिक डिवीजन से चिपके रहते हैं वह भी लंबे समय तक। भाइयों की यह मजबूरी है तो केवल टाइम पास करने के लिए इनका इस्तेमाल करते रहते हैं। मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का लंबे समय तक इस्तेमाल करते समय गलत तरीके से बैठना और झुककर काम करना रीढ़ की हड्डी पर दबाव डालता है। जो कि युवाओं में आज के समय में रीड की हड्डी में समस्या उत्पन्न होने का सबसे आम कारण है।

2. शारीरिक गतिविधि की कमी (Lack of Physical Activity)

आधुनिक जीवनशैली में अधिकांश युवा शारीरिक गतिविधि नहीं करते हैं, जिससे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और रीढ़ पर अधिक दबाव पड़ता है। यह समस्या अक्सर युवा वर्ग में देखी जाती है क्योंकि वह शारीरिक रूप से बहुत कम ही एक्टिव रहते हैं। जो की रीड की समस्याओं को उत्पन्न करता है।

3. लंबे समय तक बैठे रहना (Prolonged Sitting)

ऑफिस या घर में लंबे समय तक बैठे रहने वाली जीवनशैली रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचाती है, खासकर बिना सही एर्गोनोमिक सपोर्ट के। लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करने से गर्दन और रीढ़ पर असर पड़ता है, और रीढ़ की हड्डी में दर्द महसूस होने लगता है।

4. मोटापा (Obesity)

मोटापा अधिकतर शारीरिक समस्याओं का कारण है इसलिए वजन को नियंत्रित करके रखना बेहद आवश्यक है। अधिक वजन होने से रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे कमर और पीठ दर्द की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसलिए आपको अपने वजन की और ध्यान देना चाहिए और उसे नियंत्रण में ही रखना चाहिए।

5. तनाव और मानसिक दबाव (Stress and Mental Strain)

आज के समय में तनाव और चिंता हर मनुष्य के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है या कहें सबसे बड़ी परेशानी। मानसिक तनाव सबसे पहले आपके शरीर को नुकसान पहुंचता है और यही मानसिक तनाव और चिंता भी रीढ़ की मांसपेशियों को तनावग्रस्त कर देती हैं, जिससे गर्दन और पीठ में दर्द बढ़ सकता है।

आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेदिक तेल मालिश (Panchakarma Therapy): यह रीढ़ की हड्डी की समस्याओं को ठीक करने में मददगार है। आयुर्वेदिक औषधियों से बनी तेल मालिश रीढ़ के दर्द को कम करती है।

अश्वगंधा: अश्वगंधा का सेवन मांसपेशियों और नसों को मजबूत करता है और रीढ़ की हड्डी के दर्द को कम करता है।

त्रिफला चूर्ण: त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से शरीर से विषाक्त तत्व बाहर निकलते हैं और पाचन क्रिया में सुधार होता है, जिससे रीढ़ की समस्याएं कम होती हैं।

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