
डॉ. लिपि शर्मा
डॉ. लिपि शर्मा एक एक्सपीरियंस्ड ऑब्सटेट्रिशियन एंड गाइनेकोलॉजिस्ट हैं, जिन्हें इस फील्ड में 12 वर्षों ... Read More
Written By: Dr. Lipi Sharma | Published : January 27, 2026 4:46 PM IST
Medically Verified By: Dr. Lipi Sharma
What is Azoospermia in Hindi: इनफर्टिलिटी आज के समय में एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिससे बड़ी संख्या में लोग परेशान तो हैं ही साथ ही प्रेगनेंसी कंसीव न होने तक यह कपल्स के बीच में काफी टेंशन भी बढ़ाकर रखता है। इनफर्टिलिटी सिर्फ महिलाओं में ही नहीं बल्कि पुरुषों में भी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। पुरुषों में इनफर्टिलिटी का कारण बनने वाली ऐसी ही एक समस्या है एजुस्पर्मिया, जिसके बारे में जान कर हर पुरुष घबरा जाता है। उन्हें लगता है कि शायद अब उनका सपना टूट चुका है। क्योंकि माना जाता है कि एज़ूस्पर्मिया के बाद पिता बनना लगभग असंभव हैं। लेकिन क्या ये सच है? आपको बता दें कि असली सच यह है कि हर मामले में जवाब “नहीं” नहीं होता। सही जानकारी और इलाज से आप पिता बनने का सपना पूरा कर सकते हैं। कैसे आइए हम आपको बताते हैं।

इसे हिन्दी में निल शुक्राणु भी कहा जाता है जो पुरुषों में होने वाली एक ऐसी हेल्थ कंडीशन, जिसमें उनके सीमेन (वीर्य) में स्पर्म (शुक्राणु) नहीं होते हैं या फिर बहुत ही कम मात्रा में होते हैं जो न के बराबर ही होते हैं। इनफर्टिलिटी से जूझ रहे पुरुषों में एक बड़ी संख्या में लोग एजुस्पर्मिया से जूझ रहे होते हैं। परेशानी की बात है कि आमतौर पर यह समस्या बिना किसी साफ लक्षण के होती है और इसका पता केवल स्पर्म टेस्ट से चलता है और स्पर्म टेस्ट आमतौर पर तब कराया जाता है जब आपको इनफर्टिलिटी का संदेह होने लगता है।
एजुस्पर्मिया के दो प्रमुख प्रकार होते हैं। पहला ऑब्सट्रक्टिव एजुस्पर्मिया, इसमें शुक्राणु बनते तो हैं, लेकिन किसी नली में रुकावट के कारण वीर्य में नहीं आ पाते। दूसरा नॉन ऑब्सट्रक्टिव एजुस्पर्मिया, इसमें शुक्राणु या तो बहुत ही कम संख्या में बन रहे होते हैं या फिर बन ही नहीं रहे होते।

जब एजुस्पर्मिया से जूझ रहे किसी पुरुष को यह पता चलता है कि उसके अंदर शुक्राणु बन ही नहीं रहे हैं, बहुत कम मात्रा में बन रहे हैं या फिर किसी नली में रुकावट के कारण वीर्य में नहीं मिल पा रहे हैं तो उन्हें लगने लगता है कि शायद अब वे कभी बाप नहीं बन पाएंगे। यह चिंता एक सवाल बनकर एजुस्पर्मिया से जूझ रहे हर पुरुष के दिमाग में बैठ जाती है। लेकिन ऐसा नहीं होता है, एजुस्पर्मिया का मतलब हमेशा यह नहीं होता है कि अब आप कभी बाप नहीं बन पाएंगे।
एजुस्पर्मिया का इलाज अक्सर उस बीमारी के अंदरूनी कारण पर ही निर्भर करता है। सरल शब्दों में कहें तो एजुस्पर्मिया किस कारण से विकसित हुआ है, इस बात पर निर्भर करेगा कि एजुस्पर्मिया का इलाज संभव है या नहीं और इसका इलाज किस तरीके से किया जाना है। हार्मोन से जुड़ी समस्याओं में दवाओं से सुधार किया जा सकता है। कुछ मामलों में छोटी सर्जरी से रुकावट दूर की जा सकती है। वहीं, आधुनिक तकनीकों जैसे IVF और ICSI की मदद से सीधे टेस्टिस से शुक्राणु निकालकर गर्भधारण कराया जा सकता है।

यह भी जरूरी है कि पुरुष इस विषय पर झिझक महसूस न करें। अक्सर समाज में पुरुष बांझपन पर खुलकर बात नहीं होती, जिससे इलाज में देरी हो जाती है। अगर एक साल तक प्रयास के बाद भी गर्भधारण न हो, तो दोनों पार्टनर को मिलकर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
एजुस्पर्मिया का सही समय पर पता लग जाए तो कई पुरुष सफलतापूर्वक पिता बन सकते हैं। सही जानकारी, समय पर जांच और विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह से यह समस्या संभाली जा सकती है। उम्मीद और इलाज दोनों आज मौजूद हैं।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।