जानें क्या है AYUSH-64, जिसकी मदद से राजस्थान और असम ने जीती थी मलेरिया से लड़ाई?

AYUSH-64 Kya Hai: आयुष-64 भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तहत CCRAS आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान केंद्रीय परिषद द्वारा विकसित एक बहु-हर्बल (polyherbal) आयुर्वेदिक दवा है। मूल रूप से यह मलेरिया के लिए बनी है।

WrittenBy

Written By: Vidya Sharma | Published : April 27, 2026 11:20 AM IST

Malaria Ke Liye Konsi Dawa Le: मलेरिया एक बहुत ही सीरियस बीमारी है, जो मच्छरों द्वारा पैदा होती है और उन्हीं के द्वारा फैलती है। यह प्लास्मोडियम (Plasmodium) नामक परजीवी (parasite) के कारण होता है। यह रोग संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। जागरूकता के बावजूद भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में वैश्विक स्तर पर मलेरिया से लगभग 610,000 मौतें हुईं।

मलेरिया से बचने के लिए पश्चिमी राजस्थान (1984), असम (1995) में महामारी मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम चलाया गया। इस दौरान आयुष-64 का विकास हुआ, यह कई जड़ी बूटियों से तैयार एक ऐसी दवा है तो मुख्य रूप से मलेरिया का इलाज करती है। लेकिन इसके अलावा यह दवा, अब हल्के-से-मध्यम कोविड-19, इन्फ्लूएंजा, और वायरल बुखार के उपचार में इम्यूनोमॉड्यूलेटरी और एंटी-वायरल के रूप में उपयोग की जाती है। आइए हम इसके बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं।

क्या था महामारी मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम?

महामारी मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रमों के दौरान राजस्थान और असम में क्रमशः लगभग 3,600 और 10,000 पी-विवैक्स मामलों का उपचार किया गया। लगभग सभी मामलों में नैदानिक ​​सुधार देखा गया। कुछ मामलों में पी. फाल्सीपेरम पॉजिटिव पाया गया और कुछ मामलों में परजीवी का सफाया और नैदानिक ​​सुधार हुआ।

आइए इसके बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं- 

आयुष 64 कैसे बनी आयुष 64 कैसे बनी

क्या AYUSH-64 के दुष्प्रभाव हैं?

- निर्धारित मात्रा में लेने पर कोई दुष्प्रभाव/विषाक्त प्रभाव नहीं होता है।

AYUSH-64 की किसे कितनी खुराक लेनी चाहिए?

नीचे बताए अनुसार या चिकित्सक के निर्देशानुसार- 

वयस्क- 4 गोलियां (500 मिलीग्राम प्रति गोली), दिन में तीन बार, 5-7 दिन

बच्चे (5-12 वर्ष)- 2 गोलियां, दिन में तीन बार, 5-7 दिनों तक। 

शिशु (5 वर्ष से कम)- 1 गोली का पाउडर शहद के साथ, दिन में तीन बार।

क्या कहती है रिपोर्ट?

आयुष 64 दवा आयुष 64 दवा

सभी उष्णकटिबंधीय रोगों में, मलेरिया सबसे अधिक प्रचलित, विनाशकारी और व्यापक रूप से फैला हुआ रोग है, जो प्राचीन काल से ही आयुर्वेदिक चिकित्सकों के बीच प्रसिद्ध है। आयुर्वेद के प्राचीन शास्त्रीय साहित्य में विषमज्वरा (Vishamajvara) के अंतर्गत रोगजनन, नैदानिक ​​लक्षण और उपचार पद्धति का विस्तृत वर्णन मिलता है। 

इसकी व्यापकता और मलेरिया के परजीवी में दवाओं के प्रति बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता को देखते हुए, CCRAS ने व्यापक औषधीय, विष-संबंधी और नैदानिक ​​अध्ययनों के आधार पर 'आयुष-64' नामक एक बहु-औषधीय, विष-रहित और मलेरिया-रोधी दवा विकसित की है। परिषद ने नई दिल्ली स्थित 'राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम' के माध्यम से इस दवा का पेटेंट भी करवाया है।

क्लिनिकल ट्रायल में क्या मिला?

अगर हम सामान्य क्लिनिकल ट्रायल की बात करें तो देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित काउंसिल के विभिन्न रिसर्च संस्थानों और केंद्रों में मलेरिया के 1442 पॉजिटिव मामलों पर Ayush-64 के क्लिनिकल ट्रायल किए गए। इलाज का रिस्पॉन्स 89% रहा और इसके नतीजे जाने-माने एंटी-मलेरिया दवाओं - क्लोरोक्वीन और प्राइमाक्वीन के बराबर पाए गए।

वहीं डबल ब्लाइंड स्टडीज में OPD और IPD लेवल पर 178 मरीजों पर डबल ब्लाइंड क्लिनिकल स्टडीज की गईं, जिनसे पता चला कि यह दवा 95.4% मरीजों में असरदार है। इस दवा ने बुखार और पैरासाइट, दोनों के खिलाफ असर दिखाया। यानी की नेचुरल तरीके के मलेरिया का इलाज किया जा सकता है। यह आयुर्वेद ने करके दिखाया है।

निष्कर्ष- अगर आपके घर में किसी को भी मलेरिया हो जाए तो खुद इस दवाई का सेवन न करें, बल्कि पहले डॉक्टर से परामर्श लें। ऐसा इसलिए क्योंकि आजकल वायरल भी कई तरह के हो गए हैं, जिनका इलाज सिर्फ एक तरह की दवा से संभव नहीं हो पा रहा है।

FAQs

मलेरिया रोग के जनक कौन थे?

Charles Louis Alphonse Laveran को मलेरिया परजीवी की खोज के लिए जाना जाता है। इसलिए Charles Louis Alphonse Laveran को ही मलेरिया रोग का जनक कहा जाएगा।

मलेरिया किस मौसम में आम है?

मानसून में मच्छर होने के कारण इस मौसम में मलेरिया होना आम बात है, लेकिन इसे हल्के में न लें और खुद को डॉक्टर को दिखाएं।

मलेरिया में कौन सा अंग खराब होता है?

मलेरिया रोग में लिवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। कुछ मामलों में स्थिति जानलेवा हो सकती है।

मलेरिया क्या है?

मलेरिया मच्छरों से फैलने वाला एक प्रकार का परजीवी संक्रमण है, जिसका समय पर अगर इलाज शुरु न किया जाए तो स्थिति जानलेवा हो सकती है।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source

Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.