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अस्थमा एक ऐसी बीमारी है, जो आम तौर पर एलर्जी से जुड़ी हुई है। अस्थमा के महत्वपूर्ण कारकों में वातावरण में धूल, धुआ जैसे कण हमारे सांस लेने के साथ ही हमारी श्वास नली में पहुंच जाते हैं और व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। यही स्थिति आगे चलकर धीरे-धीरे अस्थमा का रूप ले लेती है। श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट में सीनियर कंसलटेंट, रेस्पिरेटरी मेडिसिन डॉ. अनिमेष आर्य बताते हैं कि अस्थमा एक ऐसी स्थिति है, जिसमें मरीज की सांस की नली में सूजन आ जाती है और सांस की नली धीरे-धीरे सिकुड़ने लगती है और मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है।
डॉ. अनिमेष बताते हैं कि देश में नियमित रूप से अस्थमा रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती जा रही है और बता दें कि भारत में 2 से 3 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित है। अस्थमा जैसे रोग से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि आप सबसे पहले यह पहचान कर लें कि आप के शरीर में जो लक्षण दिखाई दे रहे हैं वो अस्थमा के हैं या नहीं। दरअसल हर स्थिति में सांस का फूलनाअस्थमा का लक्षण नहीं होता है लेकिन अगर किसी को अस्थमा है तो उसकी सांस फूलना एक प्रमुख लक्षण में शामिल है।
1-सांस फूलना
2- सांस लेते समय सीटी की आवाज आना
3- लम्बें समय तक खांसी आना
4-सीने में दर्द की शिकायत होना
5-सीने में जकड़न होना।
अस्थमा रोग की सही पहचान के लिए व्यक्ति का पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट बहुत जरूरी होता है और इसी टेस्ट के जरिए व्यक्ति में अस्थमा की पहचान की जाती है।
क्यों होता है अस्थमा
डॉ. अनिमेष आर्य कहते हैं कि अस्थमा की बीमारी किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को शिकार बना सकती है, जिसका प्रमुख कारण हैः
1- खराब दिनचर्या
2- खान-पान का ठीक ना होना
3- अस्थमा के प्रति जागरूकता की कमी है।
डॉक्टर आर्य के मुताबिक, भारत में अस्थमा के करीब 20 प्रतिशत ऐसे मरीज हैं, जिनकी उम्र 14 साल से भी कम है। डॉ. आर्य के मुताबिक, अस्थमा जैसी स्थिति से पीड़ित व्यक्ति नाक से ठीक प्रकार से सांस नही ले पाता और मुंह से सांसलेता है। दरअसल अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति के सांस की नली में सूजन हो जाती है, जिससे नलियां सिकुड़ने लगती है और व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होती है।
डॉ. आर्य के मुताबिक, प्रदूषण, तापमान में बदलाव, एलर्जी, धूम्रपान, धूल और धुएं के सम्पर्क में आने से भी अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा ये स्वास्थ्य स्थिति घर में धूल या पालतू जानवरों से एलर्जी के कारण भी बढ़ जाती है। बात करें प्रदूषण की तो बढ़ता प्रदूषण भी अस्थमा के मुख्य कारणों में शामिल है। दूषित हवा में सांस लेने से प्रदूषित ऑक्सीजन हमारे फेफड़ों में पहुंचती है, जिससे सांस लेने में परेशनी होने लगती है। इससे बचने के लिए बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाले मास्क का प्रयोग करे अपने मुंह को ढ़ककर रखें।
डॉ. आर्य के मुताबिक, वायरल इंफेक्शन भी एक एक प्रकार की एलर्जी है, जिसके कारण आप बार-बार सर्दी, बुखार से परेशान हो सकते हैं। अस्थमा की शुरुआत वायरल इंफेक्शन से होती है और इससे बचने के लिए संतुलित जीवनशैली अपनाना ही एक मात्र विकल्प है। इसके साथ सही समय पर डॉक्टर से इलाज कराएं ताकि भविष्य में परेशानी का सामना न करना पड़े।