अनियमित दिल की धड़कन या एरिथमिया क्या है? एक्‍सपर्ट से जानिए इसके लक्षण, कारण और उपचार

Arrhythmia Treatment: यदि आपको घबराहट होती है या चक्कर आते हैं तो आपको अवश्य अपने डॉक्टर से इसके बारे में बात करनी चाहिए। इस प्रकार के लक्षण आपको बहुत सी जानलेवा बीमारियों के लक्षण भी दे सकते हैं।

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Written By: Atul Modi | Updated : January 28, 2021 3:32 PM IST

एरिथमिया या अनियमित दिल की धड़कन (Arrhythmia or Irregular Heartbeat) एक ऐसी स्थिति का नाम है जब हमारी धड़कन सामान्य नहीं होती है। जब आपकी धड़कन 100 प्रति मिनट से अधिक हो जाती है तो उसे टेकी एरिथमिया कहा जाता है और यदि यह 60 प्रति मिनट से नीचे चली जाती है तो इसे ब्रेडी एरिथमिया कहा जाता है।

हमारी सामान्य धड़कन को साइनस रिदम कहा जाता है। सामान्य साइनस रेट 60 से 100 प्रति मिनट के बीच रहता है। यह एक्सरसाइज के दौरान 100 प्रति मिनट तक जा सकती है व सोने के दौरान 50 प्रति मिनट तक जा सकती है।

एरिथमिया किन कारणों द्वारा हो सकता है?

इसके पीछे बहुत से कारण हो सकते हैं। टेकी व ब्रेडी एरिथमिया बच्चों में अक्सर देखने को मिलता है। यदि जन्म से ही किसी की धड़कन बहुत कम होती है तो उसे कंजेनिटल हार्ट ब्लॉक के नाम से जाना जाता है। यह मां के शरीर में मौजूद रहने वाली ऑटो एंटीबॉडीज के कारण भी हो सकता है। यदि कोई बच्चा जन्म से ही चेनेलोपैथी के साथ पैदा होता है तो उसे आगे जाकर एरिथमिया होने का भयंकर खतरा रहता है।

कई बार एरिथमिया उम्र बढ़ने के साथ साथ भी हो जाता है। हार्ट ब्लॉक एक ऐसी स्थिति होती है जब आपके ऊपरी हृदय कक्ष से लेकर निचले हृदय कक्ष के बीच आने वाली इंपल्स का कंड्क्शन ब्लॉक हो जाता है। ऐसा ज्यादातर वृद्धों में होता है और इसके पीछे का कारण भी उनकी उम्र बढ़ना ही होता है।

एरिथमिया कुछ दवाइयां लेने के कारण भी हो सकता है। इनमें कुछ एंटी एरिथमेटिक ड्रग्स, डाईगॉक्सिन, एंटी साईकोटिक ड्रग्स, गैस्ट्रोइंटेस्टिनल स्टिमुलांट्स आदि शामिल होती हैं। इनके कारण आपको उल्टी व डायरिया जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं जोकि एरिथमिया को और अधिक गंभीर बना सकते हैं।

कुछ बीमारियां जैसे बहुत अधिक थायरॉयड बढ़ जाना, थायरोटॉक्सिकोसिस आदि भी एरिथमिया का रूप ले सकती हैं।

एरिथमिया के कुछ लक्षण

इसके (ब्रेडी) कुछ लक्षणों में मुख्यत:

  • चक्कर आना
  • सुध बुध खो देना
  • परेशान रहना आदि शामिल हैं।

इसके अलावा टेकी एरिथमिया के लक्षणों में घबराहट, चक्कर आना, बेहोश हो जाना व बहुत अधिक पसीना आना शामिल है।

एरिथमिया को कैसे पहचाना जा सकता है?

इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम एरिथमिया को पहचानने का सबसे कॉमन उपाय है। लेकिन यदि यह आंतरमयिक है तो इसे ईसीजी के द्वारा पहचानने में भी कठिनाई हो सकती है। ऐसे केस में एक्सटर्नल लूप रिकॉर्डर का प्रयोग किया जाता है। यदि एरिथमिया बहुत कम बार होता है तो इसे जानने के लिए इंप्लांटबल रिकॉर्डर का प्रयोग किया जाता है।

एरिथमिया को कैसे ठीक किया जा सकता है?

इसका निर्णय आपके डॉक्टर ही लेंगे की यह कैसे ठीक किया जा सकता है और इसे ठीक करने का सबसे अच्छा उपचार कौन सा हो सकता है। इसे ठीक करने के लिए पहले उन्हें इसके कारण का पता लगाना होगा। इसके लिए वह आपके विभिन्न प्रकार के टेस्ट भी कर सकते हैं। इसे ठीक करने के लिए वह आपको बहुत से एंटी एरिथमिया ड्रग्स भी दे सकते हैं। यदि आपका हार्ट ब्लॉक होने की सम्भावना होती है तो उस केस में पेस मेकर इंप्लांटेशन भी किया जा सकता है। वेंट्रिकुलार टेकी कार्डिया से बचाने के लिए एआईसीडी इंप्लांटेशन का प्रयोग किया जाता है।

क्या घबराहट होने पर आपको डॉक्टर से इसके बारे में बात करनी चाहिए?

यदि आपको घबराहट होती है या चक्कर आते हैं तो आपको अवश्य अपने डॉक्टर से इसके बारे में बात करनी चाहिए। इस प्रकार के लक्षण आपको बहुत सी जानलेवा बीमारियों के लक्षण भी दे सकते हैं। वैसे तो एरिथमिया सामान्य होता है और उसके लिए आपको ज्यादा डॉक्टर के पास जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। लेकिन इस प्रकार के लक्षण होने पर आपको डॉक्टर के पास जरूर जाना चाहिए।

Inputs by- Dr Santosh Kumar Dora, Senior Cardiologist, Asian Heart Institute, Mumbai

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