एनीमिया को सिर्फ आयरन की कमी समझना पड़ सकता है भारी! जानिए अप्लास्टिक एनीमिया के बारे में
डॉक्टर कहते हैं कि अप्लास्टिक एनीमिया के शुरुआती लक्षण सामान्य एनीमिया जैसे लग सकते हैं, इसलिए कई बार इसकी पहचान देर से होती है। आइए जानते हैं इसके बारे में-
Written by Ashu Kumar Das|Published : March 5, 2026 4:20 PM IST
what is Aplastic anemia expert explains Symptoms and causes: एनीमिया (Anaemia) एक ऐसा मेडिकल शब्द है जिसे हम अक्सर सुनते हैं, लेकिन इसके बारे में सही जानकारी बहुत कम लोगों को होती है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि एनीमिया का मतलब सिर्फ शरीर में आयरन की कमी होना है। आसान भाषा में कहें तो जिन लोगों में खून की कमी होती है, उन्हें एनीमिया नामक बीमारी है। 10 में से 8 लोगों को ऐसा लगता है कि एनीमिया का इलाज आयरन की गोलियां खाकर आसानी हो जाता है। हालांकि सच उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है।
डॉ. राजेश कश्यप, प्रोफेसर और क्लीनिक हेमेटोलॉजी और स्टेम सेल रिसर्च के हेड, संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS), लखनऊ का कहना है कि एनीमिया कोई एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर में होने वाली किसी समस्या का संकेत होता है। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) की कमी कई अलग-अलग कारणों से हो सकती है।
इसी वजह से सभी तरह के एनीमिया एक जैसे नहीं होते। कुछ हल्के और आसानी से ठीक हो जाते हैं, जबकि कुछ गंभीर भी हो सकते हैं। इन्हीं में से एक है अप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anaemia), जो एक दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन पर छपी रिसर्चबताती है कि एनीमिया उस स्थिति को कहते हैं जब शरीर में हेल्दी लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है। लाल रक्त कोशिकाओं का मुख्य काम शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाना होता है। जब इनकी संख्या कम हो जाती है, तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और कई तरह के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। एनीमिया होने पर नीचे बताए गए लक्षण नजर आते हैं।
लगातार थकान महसूस होना
शारीरिक कमजोरी रहना
त्वचा का पीला पड़ना
चक्कर आना
सांस फूलना
डॉ. राजेश कश्यप का कहना है कि सबसे आम प्रकार आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया (Iron Deficiency Anaemia) है। यह आमतौर पर खराब खान-पान, खून की कमी, या प्रेग्नेंसी के दौरान आयरन की जरूरत बढ़ने के कारण होता है। स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी बताती है कि भारत में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में एनीमिया की समस्या ज्यादा होती है। लेकिन खास बात यह है कि सही इलाज और पोषण से एनीमिया को नियंत्रित किया जा सकता है।
एनीमिया के प्रमुख कारण क्या हैं?- Causes of Anaemia
इनमें से सबसे गंभीर स्थितियों में से एक है अप्लास्टिक एनीमिया।
अप्लास्टिक एनीमिया क्या है?
अप्लास्टिक एनीमिया एक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी है जिसमें बोन मैरो पर्याप्त मात्रा में रक्त कोशिकाएं बनाना बंद कर देता है। बोन मैरो शरीर का वह हिस्सा होता है जहां से तीन प्रकार की रक्त कोशिकाएं बनती हैं:
लाल रक्त कोशिकाएं (Red Blood Cells)
सफेद रक्त कोशिकाएं (White Blood Cells)
प्लेटलेट्स (Platelets)
जब बोन मैरो के स्टेम सेल डैमेज हो जाते हैं, तो इन तीनों प्रकार की कोशिकाओं का स्तर खतरनाक रूप से कम हो सकता है। इस स्थिति को पेन साइटोपेनिया (Pancytopenia) कहा जाता है।
अप्लास्टिक एनीमिया के लक्षण क्या हैं?
डॉ. राजेश कश्यप का कहना है कि एनीमिया सिर्फ शारीरिक थकान और कमजोरी तक सीमित नहीं होता है। अप्लास्टिक एनीमिया के लक्षण सामान्य एनीमिया से अलग होते हैं। अप्लास्टिक एनीमिया के सामान्य लक्षणों में शामिल हैः
ब्लड सेल्स कम होना- अप्लास्टिक एनीमिया की स्थिति में अत्यधिक शारीरिक थकान की परेशानी होती है। इसके साथ ही व्यक्ति को तेज या धीरे-धीरे सांस लेने में भी परेशानी आती है। यह परेशानी मुख्य रूप से ब्लड सेल्स कम होने के कारण होती है।
सफेद रक्त कोशिकाएं कम होने पर- अप्लास्टिक एनीमियामें बार-बार संक्रमण होना एक आम बात मानी जाती है। इससे गंभीर इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इस प्रकार की परेशानी बच्चों और बुजुर्गों में ज्यादा देखी जाती है।
प्लेटलेट्स कम होने पर- अप्लास्टिक एनीमिया में शरीर के प्लेटलेट्स भी कम हो जाते हैं। इससे जल्दी चोट या नीले निशान पड़ना, मसूड़ों से खून आना, नाक से खून बहना, छोटी चोट से भी ज्यादा देर तक खून बहने की समस्या होती है।
यही कारण है कि अप्लास्टिक एनीमिया को सामान्य एनीमिया से अलग माना जाता है।
अप्लास्टिक एनीमिया की समय पर पहचान क्यों जरूरी है?
डॉक्टर कहते हैं कि अप्लास्टिक एनीमिया के शुरुआती लक्षण सामान्य एनीमिया जैसे लग सकते हैं, इसलिए कई बार इसकी पहचान देर से होती है। अगर किसी व्यक्ति को लगातार थकान के साथ-साथ बार-बार संक्रमण, आसानी से चोट लगना या बिना कारण खून बहने जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। इस बीमारी की पुष्टि के लिए आमतौर पर ब्लड टेस्ट और बोन मैरो जांच की जरूरत होती है।
अप्लास्टिक एनीमिया से बचाव के लिए क्या करना चाहिए
संतुलित और पौष्टिक आहार लें- अप्लास्टिक एनीमिया से बचाव के लिए शरीर को कई तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसलिए अपने खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी), फल (सेब, अनार, संतरा), साबुत अनाज, दालें और बीन्स, दूध और डेयरी उत्पाद को शामिल करें। इन चीजों में मौजूद सभी पोषक तत्व शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। इससे अप्लास्टिक एनीमिया और अन्य बीमारियों का खतरा कम होता है।
संक्रमण से बचाव- अप्लास्टिक एनीमिया में शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। इसलिए संक्रमण से बचाव ज्यादा मुश्किल होता है। डॉ. कश्यप का कहना है कि अप्लास्टिक एनीमिया से बचाव के लिए मरीजों को नियमित रूप से हाथ धोएं, भीड़भाड़ वाली जगहों से बचें, साफ-सफाई का ध्यान रखें और आपके घर में कोई व्यक्ति बीमार है, तो उसके संपर्क में आने से बचने की कोशिश करें।
केमिकल और रेडिएशन से बचें- कुछ जहरीले केमिकल और रेडिएशन बोन मैरो को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए अप्लास्टिक एनीमिया के मरीजों को जहरीले धुएं और केमिकल्स वाले रिएक्शन से बचकर रहना चाहिए।
नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं- अगर आपको बार-बार कमजोरी, थकान या संक्रमण जैसी समस्या हो रही है तो समय पर जांच करवाना जरूरी है। डॉक्टर बताते हैं कि शुरुआती जांच से कई गंभीर बीमारियों का पता समय रहते लगाया जा सकता है।
अप्लास्टिक एनीमिया से बचाव के लिए क्या नहीं करना चाहिए
धूम्रपान और शराब से दूर रहें- डॉक्टर का कहना है कि धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाता है। शराब और सिगरेट पीने से ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है। इससे खून बनने की प्रक्रिया में देरी आती है।
जंक फूड से दूरी बनाकर रहें- जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड में पोषण की कमी होती है, जिससे शरीर कमजोर हो सकता है। जिन लोगों को अप्लास्टिक एनीमिया की परेशानी है, उन्हें जंक और बाजार में मिलने वाले विभिन्न प्रकार के फूड्स खाने से बचना चाहिए।
संक्रमण को नजरअंदाज न करें- अगर आपको बार-बार बुखार, गले में दर्द या संक्रमण हो रहा है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अत्यधिक तनाव न लें- लगातार तनाव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकता है, जिससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
निष्कर्ष
एनीमिया को सिर्फ आयरन की कमी समझना एक बड़ी गलती हो सकती है। हालांकि कई मामलों में यह साधारण और आसानी से ठीक होने वाली स्थिति होती है, लेकिन कुछ मामलों में इसके पीछे गंभीर कारण भी छिपे हो सकते हैं। अप्लास्टिक एनीमिया जैसी बीमारियां यह बताती हैं कि एनीमिया को हमेशा गंभीरता से लेना चाहिए। सही जानकारी, समय पर जांच और सही इलाज से इस गंभीर बीमारी का इलाज किया जा सकता है। इसलिए अगर एनीमिया के लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो इसे नजरअंदाज न करें और विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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