
डॉक्टर आशीष चौधरी
डॉक्टर आशीष चौधरी एक अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं, जो हाल में आकाश हेल्थ केयर में अपनी सेवाएं प्रदान कर ... Read More
Written By: Dr. Aashish Chaudhry | Updated : May 2, 2026 10:46 AM IST
Image credits by: कमर में दर्द
Ankylosing Spondylitis Kya Hota Hai: आजकल क्लिनिक में ऐसे कई युवा मरीज आ रहे हैं, जो लंबे समय से कमर दर्द और जकड़न की समस्या से परेशान हैं। खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश 20 से 40 वर्ष की आयु के होते हैं। अक्सर ये मरीज इस दर्द को सामान्य मान कर लंबे समय तक नजरअंदाज करते रहते हैं, लेकिन कई मामलों में यह एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (AS) जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।
एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस एक क्रोनिक इंफ्लेमेटरी रोग है, जो मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी और सैक्रोइलियक जोड़ों को प्रभावित करता है। इसकी शुरुआत धीरे-धीरे होती है और शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि मरीज इसे साधारण कमर दर्द समझ लेते हैं। यही कारण है कि भारत में इस बीमारी का डायग्नोसिस अक्सर देर से होता है।
एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का सबसे प्रमुख लक्षण है सुबह के समय कमर में जकड़न, जो कुछ समय तक चलने-फिरने के बाद कम हो जाती है। इसके अलावा लंबे समय तक बैठने या आराम करने के बाद दर्द बढ़ना और गतिविधि करने पर राहत मिलना भी इसके संकेत हो सकते हैं। कई मरीजों में गर्दन, कंधे और कूल्हों में भी दर्द महसूस होता है।
मेरे अनुभव में, सबसे बड़ी चुनौती इस बीमारी की समय पर पहचान है। जब तक मरीज रूमेटोलॉजिस्ट के पास पहुंचता है, तब तक कई बार बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के शुरुआती चरण में एक्स-रे में बदलाव नजर नहीं आते, इसलिए MRI और HLA-B27 जैसे टेस्ट की जरूरत पड़ती है। यदि सही समय पर इन जांचों का उपयोग किया जाए, तो बीमारी को शुरुआती अवस्था में ही पकड़ना संभव है।
एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का इलाज मुख्य रूप से इसके लक्षणों को नियंत्रित करने और बीमारी की प्रगति को धीमा करने पर केंद्रित होता है। इसमें दवाओं के साथ-साथ फिजियोथेरेपी और नियमित व्यायाम बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। आज के समय में बायोलॉजिकल थेरेपी जैसे आधुनिक उपचार विकल्प उपलब्ध हैं, जो सूजन को कम करने और मरीज को बेहतर जीवन देने में मदद करते हैं।
मैं अपने सभी मरीजों को यह सलाह देता हूं कि वे अपनी दिनचर्या में नियमित एक्सरसाइज को शामिल करें। खासकर स्ट्रेचिंग और बैक स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज से रीढ़ की लचीलापन बनी रहती है और जकड़न कम होती है। इसके अलावा, सही पोस्चर बनाए रखना भी जरूरी है, क्योंकि गलत बैठने या खड़े होने की आदतें समस्या को बढ़ा सकती हैं।
लाइफस्टाइल में बदलाव भी इस बीमारी के मैनेजमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। धूम्रपान से बचना, संतुलित आहार लेना और वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है। अधिक वजन होने से जोड़ों और रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे दर्द बढ़ सकता है।
एक और महत्वपूर्ण पहलू है मानसिक स्वास्थ्य। लंबे समय तक चलने वाला दर्द मरीज को मानसिक रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे तनाव और चिंता बढ़ सकती है। इसलिए परिवार का सहयोग और सकारात्मक सोच बेहद जरूरी है।
अंत में, मैं यही कहना चाहूंगा कि एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिससे घबराने की जरूरत है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। अगर समय पर पहचान हो जाए और सही इलाज शुरू किया जाए, तो मरीज एक सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकता है।
डिस्क्लेमर- डॉक्टर खुद सलाह देते है कि अगर आपको लंबे समय से कमर दर्द या जकड़न की समस्या है, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श करें। यही आपके स्वस्थ भविष्य की कुंजी है।
हां, स्पॉन्डिलाइटिस का इलाज संभव है, लेकिन इसे पूरी तरह जड़ से खत्म करने के बजाय इसके लक्षणों को नियंत्रित करने पर ध्यान दिया जाता है।
स्पोंडिलोआर्थराइटिस से जुड़े दर्द और अकड़न के इलाज के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली दवाइयों में NSAIDs शामिल हैं।
एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के लक्षण लंबे समय तक बैठने या आराम करने के बाद दर्द बढ़ना और गतिविधि करने पर राहत मिलना भी इसके संकेत हो सकते हैं। कई मरीजों में गर्दन, कंधे और कूल्हों में भी दर्द महसूस होता है।
एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस एक क्रोनिक इंफ्लेमेटरी रोग है, जो मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी और सैक्रोइलियक जोड़ों को प्रभावित करता है।
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