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एंजियोप्लास्टी क्या होती है और कब पड़ती है इसकी जरूरत? डॉक्टर से जाने इसके बारे में

Angioplasty: एंजियोप्लास्टी हृदय की उन धमनियों को खोलने की प्रक्रिया है जिनमें चर्बी या प्लाक जमा होने से रुकावट आ गई हो। आइए, जानते हैं इसके बारे में विस्तार से -

Written By Anju Rawat
Published : August 8, 2026 3:19 PM IST

angioplasty

What Is Angioplasty: दिल की बीमारियां आज भी दुनियाभर में मृत्यु और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का बड़ा कारण हैं। इन्हीं बीमारियों के इलाज में एंजियोप्लास्टी एक मुख्य रूप से अपनाई जाने वाली प्रक्रिया है। यह एक कम जटिल (मिनिमली इनवेसिव) उपचार है, जिसमें हृदय की संकीर्ण या अवरुद्ध धमनियों को खोला जा सकता है। इससे रक्त प्रवाह सामान्य होता है, सीने के दर्द जैसे लक्षणों में राहत मिल सकती है और दिल के दौरे का खतरा कम हो सकता है। आइए, डॉ दीपक अग्रवाल, कंसल्टेंट - कार्डियोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर से जानते हैं एंजियोप्लास्टी क्या होती है और कब पड़ती है इसकी जरूरत?

एंजियोप्लास्टी क्या है?

एंजियोप्लास्टी को चिकित्सकीय भाषा में पर्क्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन (PCI) कहा जाता है। यह हृदय की उन धमनियों को खोलने की प्रक्रिया है, जिनमें चर्बी या प्लाक जमा होने से रुकावट आ गई हो। आपको बता दें कि धमनियों में प्लाक जमा होने और उनके संकरा होने की स्थिति को कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) कहा जाता है।

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एंजियोप्लास्टी की प्रक्रिया में एक पतली नली (कैथेटर) को हाथ की कलाई या जांघ की धमनी से हृदय की संकरी धमनी तक पहुंचाया जाता है। फिर कैथेटर की नोक पर लगे छोटे गुब्बारे (बलून) को फुलाया जाता है, जिससे प्लाक धमनियों की दीवार से चिपक जाता है और रक्त प्रवाह के लिए रास्ता साफ हो जाता है। ज्यादातर मामलों में, धमनी को लंबे समय तक खुला रखने के लिए स्टेंट डाला जाता है।

एंजियोप्लास्टी के लाभ क्या हैं?

  • एंजियोप्लास्टी तुरंत सीने के दर्द, सांस फूलने और थकान जैसी परेशानियों से राहत दिला सकती है।
  • हृदय रोग से पीड़ित मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में तेजी से सुधार देखा जा सकता है।
  • दिल के दौरे की स्थिति में तो यह प्रक्रिया जीवन रक्षक भी साबित हो सकती है। क्योंकि, यह तुरंत हृदय की मांसपेशियों तक रक्त प्रवाह को तेज कर देती है।

हालांकि, किसी भी चिकित्सा प्रक्रिया की तरह इसमें भी कुछ जोखिम होते हैं। इनमें कैथेटर डालने की जगह पर खून निकलना, रक्त वाहिका को चोट लगना, प्रक्रिया में उपयोग होने वाले डाई से एलर्जी, या स्टेंट में थक्का बनने का खतरा शामिल हैं।

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एंजियोप्लास्टी कब की जाती है?

डॉक्टर कुछ परिस्थितियों में एंजियोप्लास्टी की सलाह दे सकते हैं। जैसे-

  1. दिल का दौरा (हार्ट अटैक): जब किसी धमनी में अचानक रुकावट आ जाती है तो हृदय की मांसपेशियों तक रक्त नहीं पहुंच पाता है। इस स्थिति में तुरंत की गई एंजियोप्लास्टी (प्राइमरी एंजियोप्लास्टी) जीवन बचाने वाली साबित हो सकती है।
  2. गंभीर एनजाइना (सीने में दर्द): अगर मरीज को बार-बार और तेज सीने में दर्द हो और दवाओं से राहत न मिले तो एंजियोप्लास्टी की जा सकती है।
  3. दवाओं से लाभ न मिलना: कई मरीजों में दवाओं और जीवनशैली में बदलाव के बावजूद बीमारी पर नियंत्रण नहीं हो पाता है। ऐसे मामलों में यह प्रक्रिया उपयोगी हो सकती है।
  4. उच्च जोखिम वाले ब्लॉकेज: जब जांच में पता चले कि हृदय की मुख्य धमनियों में गंभीर अवरोध है, तो भविष्य में दिल का दौरा रोकने के लिए एंजियोप्लास्टी की जाती है।

एंजियोप्लास्टी के विकल्प

एंजियोप्लास्टी बहुत प्रभावी है, लेकिन यह एकमात्र उपचार नहीं है। इसके अन्य विकल्प भी उपलब्ध हैं, जैसे-

  1. दवाइयां: हल्के या मध्यम लक्षणों वाले मरीजों के लिए खून पतला करने वाली दवाइयां, कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवाइयां और हृदय की कार्यक्षमता नियंत्रित करने वाली दवाइयां पर्याप्त हो सकती हैं।
  2. जीवनशैली में बदलाव: धूम्रपान छोड़ना, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना और तनाव को नियंत्रित करना बीमारी की प्रगति को रोकने में मदद कर सकता है।
  3. कोरोनरी आर्टरी बायपास सर्जरी (CABG): कई गंभीर ब्लॉकेज वाले मरीजों के लिए बायपास सर्जरी बेहतर विकल्प होती है। इसमें शरीर की किसी दूसरी रक्त वाहिका का उपयोग करके अवरुद्ध धमनी के चारों ओर नया मार्ग बनाया जाता है।

Disclaimer: एंजियोप्लास्टी न केवल लक्षणों में तुरंत राहत देती है बल्कि कई परिस्थितियों में जीवन भी बचा सकती है। फिर भी, यह हर मरीज के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं मानी जाती है। इसलिए डॉक्टर मरीज की स्थिति, ब्लॉकेज की गंभीरता और अन्य विकल्पों को ध्यान में रखकर निर्णय लेते हैं।