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Medically Verified By: DR. Vineet
क्या डॉक्टर ने कभी आपको अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लिखा है? अगर हां, तो आपके मन में जरूर आया होगा कि आखिर अल्ट्रासाउंड क्या होता है? क्या सभी बीमारियों के लिए अल्ट्रासाउंड अलग-अलग होता है? अल्ट्रासाउंड सेफ होता है या नहीं? अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट कैसे पढ़ी जाती है? इस लेख में एससीएम हेल्थकेयर के प्रिंसिपल कंसल्टेंट, यूरोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. विनीत मल्होत्रा (Dr. Vineet Malhotra, Principal Consultant, Urology, Sexology, Andrology, Infertility Treatment, SCM Healthcare) से विस्तार में जानें अल्ट्रासाउंड से जुड़ी सारी जानकारी-

Ultrasound Test: आज के समय में बीमारियों की पहचान जल्दी और सटीक तरीके से करना बेहद जरूरी हो गया है। क्योंकि जितनी जल्दी बीमारी का निदान होगा, उतनी जल्दी उसका इलाज शुरू होगा और रोगी ठीक हो पाएगा। बीमारियों का निदान करने के लिए अलग-अलग टेस्ट कराए जाते हैं, इसमें अल्ट्रासाउंड जांच भी एक है। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट की सटीकता के लिए बेहद जरूरी जांच है, जिसे डॉक्टर अक्सर तब लिखते हैं जब रोगी को दर्द, प्रेग्नेंसी, सूजन या पेशाब से जुड़ी समस्याएं होती हैं। इसके अलावा, अल्ट्रासाउंड तकनीक का उपयोग शरीर के अंदरूनी अंगों जैसे लिवर, किडनी, पित्ताशय, अग्न्याशय, गर्भाशय, अंडाशय, प्रोस्टेट, थायरॉइड और हृदय की स्थिति को समझने के लिए भी किया जाता है।आपको बता दें कि अल्ट्रासाउंड एक ऐसी मेडिकल इमेजिंग प्रक्रिया है, जिसमें शरीर के अंदर अंदरूनी अंगों की तस्वीरें ध्वनि तरंगों (Sound Waves) की मदद से बनाई जाती हैं। इन्हीं इमेज की मदद से डॉक्टर बीमारी का आकलन करते हैं और इलाज शुरू करते हैं। यह जांच पूरी तरह से सुरक्षित और दर्दरहित होता है। इसमें रेडिएशन भी नहीं होता है, इसलिए इसे गर्भवती महिलाओं से लेकर बच्चों और बुज़ुर्गों तक, सभी के लिए उपयुक्त माना जाता है।
जवाब: अल्ट्रासाउंड एक मेडिकल जांच है, जिसमें हाई-फ्रिक्वेंसी साउंड वेव्स की मदद से शरीर के अंदरूनी अंगों की लाइव इमेज बनाई जाती है। इस इमेज के आधार पर ही डॉक्टर किसी बीमारी का आकलन करते हैं और रोगी को आगे के इलाज के लिए सलाह देते हैं।
जवाब: अल्ट्रासाउंड किसी बीमारी की पहचान करने के लिए किया जाता है। जब किसी व्यक्ति को लंबे समय तक दर्द, गांठ या सूजन बनी रहती है, तो इसके असल कारण का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। इसके अलावा, हार्मोनल असंतुलन या पेशाब से जुड़ी समस्याएं होने पर भी डॉक्टर अल्ट्रासाउंड करवाते हैं। प्रेग्नेंसी में अल्ट्रासाउंड कराना बहुत जरूरी होता है। प्रेग्नेंसी के दौरान हर तिमाही में शिशु की ग्रोथ और उसकी हलचल देखने के लिए अल्ट्रासाउंड कराया जाता है।
जवाब: अल्ट्रासाउंड ट्रांसड्यूसर की मदद से किया जाता है। इस जांच को करने के लिए मशीन से जुड़ा ट्रांसड्यूसर शरीर की सतह पर घुमाया जाता है। यह साउंड वेव्स को शरीर के अंदर भेजता है, जो अंगों से टकराकर वापस आती हैं। इन तरंगों से स्क्रीन पर अंगों की तस्वीर बनती है, इसमें अंग साफ-साफ दिखाई देते हैं, जो भी समस्या होती है डॉक्टर रिपोर्ट देखकर उसका आकलन कर पाते हैं।
जवाब: डॉ. विनीत बताते हैं, "अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में अंगों का आकार, संरचना और कोई भी असामान्यता दिख जाती है। रिपोर्ट में पूरी डिटेल लिखी होती है, आप उसे पढ़कर आसानी से स्थिति को समझ सकते हैं। रिपोर्ट में अगर कोई दिक्कत दिखती है, तो उसे बोल्ड और ब्लैक भी किया जाता है। लेकिन, आपको हमेशा अपनी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट को डॉक्टर को ही दिखाना चाहिए।"

जवाब: जी हां, अल्ट्रासाउंड पूरी तरह से सुरक्षित होता है। इसमें किसी तरह के रेडिएशन का इस्तेमाल नहीं होता है। इसलिए इसे पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में भी इसका बेझिझक उपयोग किया जाता है।
जवाब: अल्ट्रासाउंड जांच की प्रक्रिया बेहद आसान होती है।

जब किसी व्यक्ति को अक्सर ही पेट दर्द, उल्टी या गैस की समस्या रहती है तो डॉक्टर एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा, सूजन और पीलिया का पता लगाने के लिए भी एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड कराने से लिवर, गॉलब्लैडर, किडन और पैंक्रियाज अंगों की स्थिति स्पष्ट दिखाई देती है। इस अल्ट्रासाउंड की मदद से पित्त की पथरी, फैटी लिवर, किडनी स्टोन और लिवर संक्रमण आदि का पा लगाया जा सकता है।
प्रेग्नेंसी के दौरान हर 3 महीने में अल्ट्रासाउंड रिपीट कराया जाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान कई तरह के अल्ट्रासाउंड कराए जाते हैं। इसमें शामिल हैं-
जब डॉक्टर को गर्दन मे कोई असामान्य लक्षण जैसे-सूजन या गांठ दिखाई देती है, तो इस स्थिति में थायराइड अल्ट्रासाउड कराया जाता है। इस अल्ट्रासाउंड की मदद से गांठ की प्रकृति का पता चल पाता है। इससे पता चलता है कि आपको थायराइड है या नहीं।
आपको बता दें कि इकोकार्डियोग्राफी या इको एक बेहद ही सुरक्षित और दर्दरहित अल्ट्रासाउंड जांच है। इसमें हृदय की गतिशील तस्वीरें दिखाई देती हैं। इस अल्ट्रासाउंड को दिल की संरचना, वाल्वों, चैंबर्स और पंपिंग क्षमता की जांच करने के लिए कराया जाता है। इस अल्ट्रासाउंड को सिर्फ डॉक्टर के लिखने पर ही किया जाता है।

पीरियड्स की अनियमितता, पीसीओएस, निचले पेट में दर्द या फर्टिलिटी की जांच के लिए पेल्विक अल्ट्रासाउंड कराया जाता है। महिलाओं से जुड़ी इस तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का पता लगाने के लिए पेल्विक अल्ट्रासाउंड करवाया जाता है।
ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड एक इमेजिंग टेस्ट है। इसमें एक छोटे अल्ट्रासाउंड प्रोब को योनि में डाला जाता है और जो गर्भाशय, अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब और गर्भाशय ग्रीवा की तस्वीरें ली जाती हैं। इस अल्ट्रासाउंड की मदद से रक्तस्त्राव और इनफर्टिलिटी के कारणों का असल कारण पता चल पाता है
जब किसी पुरुष को पेशाब में जलन या रुकावट होती है, तो इस स्थिति में डॉक्टर प्रोस्टेट अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं। इसके अलावा, मेल इनफर्टिलिटी का पता लगाने के लिए भी इस अल्ट्रासाउंड की मदद ली जाती है।
मांसपेशियों में दर्द, अकड़न, सूजन या खिंचाव आने पर डॉक्टर मस्कुलोस्केलेटल अल्ट्रासाउंड करवाते हैं। इससे दर्द या सूजन के कारण का पता चलता है।
जवाब: ज्यादातर लोगों को लगता है कि अल्ट्रासाउंड में ज्यादा समय लगता है। जबकि, ऐसा नहीं है। अल्ट्रासाउंड को करने में महज 10 से 30 मिनट का समय लगता है और कुछ देर बाद ही रिपोर्ट भी मिल जाती है।

जवाब: अल्ट्रासाउंड से शरीर में होने वाले असामान्य गांठ का पता लगाया जा सकता है। लेकिन, कैंसर की सटीक पुष्टि के लिए स्कैनिंग और बायोप्सी का सहारा लिया जाता है।
जवाब: अल्ट्रासाउंड में जेल इसलिए लगाया जाता है, ताकि ध्वनि तरंगें सही तरीके से शरीर में जा सके और इमेज साफ और सटीक नजर आए।
जवाब: जब ब्लड फ्लो या नसों में खून की गति जांचनी होती है, तो इसके लिए डॉप्लर अल्ट्रासाउंड करवाया जाता है।
जवाब: नहीं। अल्ट्रासाउंड पूरी तरह से दर्दरहित होता है। अल्ट्रासाउंड कराने से कोई दर्द नहीं होता है। इसमें सिर्फ ट्रांसड्यूसर को त्वचा पर हल्के हाथों से घुमाया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान दर्द बिल्कुल नहीं होता है। हालांकि, कुछ लोगों को हल्का दबाव महसूस हो सकता है।

जवाब: अल्ट्रासाउंड से पहले पानी पीना जरूरी होता है। पेल्विक या लोअर एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड से पहले पानी पिलाया जाता है। इससे अंग स्पष्ट दिखते हैं और रिपोर्ट ज्यादा सटीक आती है।
जवाब: एक्स-रे में रेडिएशन होता है। जबकि, अल्ट्रासाउंड में रेडिएशन नहीं होता है।
| 2D अल्ट्रासाउंड | 3D अल्ट्रासाउंड | 4D अल्ट्रासाउंड | |
| इमेज का प्रकार | ब्लैक-एंड-व्हाइट | थ्री-डायमेंशनल तस्वीर | 3D की लाइव मूविंग इमेज |
| उपयोग | सामान्य जांच के लिए | अंगों की बनावट देखने के लिए | लाइव मूवमेंट देखने के लिए |
| सटीकता | बेसिक जानकारी देता है | संरचनात्मक डिटेल ज्यादा साफ दिखाता है | डिटेल और अनुभव दोनों बेहतर है |
| उपलब्धता | हर जगह आसानी से | चुनिंदा सेंटरों पर | सीमित जगहों पर |
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।