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AITL कैंसर क्या है? जानें इसके पहचान, लक्षण और इलाज की पूरी जानकारी

AITL (एंजियोइम्यूनोब्लास्टिक टी-सेल लिंफोमा) नॉन-हॉजकिन लिंफोमा कैंसर का एक दुर्लभ लेकिन आक्रामक प्रकार है। यह कितना खतरनाक है और इसके शुरुआती लक्षण, कारण और किन लोगों में इसका खतरा अधिक होता है, आज हम डॉक्टर सरिता रानी जायसवाल से जानेंगे।

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Written By: Vidya Sharma | Updated : July 30, 2026 12:02 PM IST

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Medically Verified By: Dr Sarita Jaiswal

कैंसर कई प्रकार के होते हैं, जिनमें से कुछ के बारे में तो हमें पता होता है और कुछ का नाम भी हमने नहीं सुना होता है। ऐसा ही एक कैंसर है AITL, जिसकी फुल फॉर्म है एंजियोइम्यूनोब्लास्टिक टी-सेल लिंफोमा। दिल्ली स्थित धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट और क्लिनिकल लीड हेमेटोलॉजिस्ट, हेमेटो-ऑन्कोलॉजिस्ट और BMT, डॉक्टर सरिता रानी जायसवाल बताती हैं कि AITL को गैर-हॉजकिन लिंफोमा का एक दुर्लभ और आक्रामक रूप माना जाता है।

"यह बीमारी शरीर के इम्यून सिस्टम का हिस्सा माने जाने वाली टी-कोशिकाओं में विकसित होती है। जब ये टी-कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, तो यह बीमारी मुख्य रूप से लसीका ग्रंथियों को प्रभावित करती है। लिवर, प्लीहा (स्प्लीन), बोन मैरो और स्किन में भी इसके फैलने की संभावनाएं रहती हैं। इसके कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट आ जाती है, जिसकी वजह से रोगी में किसी भी संक्रमण और ऑटोइम्यून समस्याओं का जोखिम अधिक हो जाता है।" आइए हम कैंसर के इस प्रकार के बारे में विस्तार से जानते हैं।

ग्राफ से समझें AITL कैंसर क्या है?

AITL कैंसर क्या है? (Image Credit- ChatGPT) AITL कैंसर क्या है? (Image Credit- ChatGPT)

एंजियोइम्यूनोब्लास्टिक टी-सेल लिंफोमा के मुख्य लक्षण क्या हैं?

एंजियोइम्यूनोब्लास्टिक टी-सेल लिंफोमा एंजियोइम्यूनोब्लास्टिक टी-सेल लिंफोमा

आम तौर पर AITL के लक्षण किसी सामान्य वायरल संक्रमण से मिलते-जुलते हो सकते हैं। कुछ मरीजों में लिवर या प्लीहा के बड़े होने के कारणपेट में भारीपन भी महसूस होता है। रेड ब्लड सेल्स की कमी के चलते लगातार थकान और कमजोरी बनी रहती है और स्किन पर खुजली वाले लाल चकत्ते भी उभर सकते हैं।

AITL किन कारणों से होता है, और यह जोखिम कैसे बढ़ाता है?

AITL किन कारणों से होता है? (Image Credit- ChatGPT) AITL किन कारणों से होता है? (Image Credit- ChatGPT)

डॉक्टर के अनुसार, “एंजियोइम्यूनोब्लास्टिक टी-सेल एक गंभीर बीमारी होने के बावजूद भी इसके सटीक कारण अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन कुछ शोधों में पाया गया है कि टी-कोशिकाओं में होने वाले जेनेटिक म्यूटेशन इसके मुख्य कारण हैं।”

वह आगे बताती हैं कि TET2 और DNMT3A जैसे जीनों में होने वाले म्यूटेशन सेल्स के सामान्य विकास को रोकते हैं। साथ ही, एपस्टीन-बार वायरस (EBV) जैसे संक्रमण भी इस स्थिति को ट्रिगर कर सकते हैं। आमतौर पर, 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में यह बीमारी अधिक पाई जाती है।

एंजियोइम्यूनोब्लास्टिक टी-सेल लिंफोमा की पहचान और निदान कैसे करें?

डॉक्टर के अनुसार, “इसकी सही पहचान के लिए सबसे पहले डॉक्टर लसीका ग्रंथि की बायोप्सी करते हैं, जिससे कैंसरग्रस्त टी-कोशिकाओं की सटीक पहचान हो पाती है। इसके साथ ही, कम्प्लीट ब्लड काउंट और किडनी-लिवर फंक्शन टेस्ट किए जाते हैं।”

बीमारी के चरण और शरीर में इसके फैलाव को जानने के लिए पेट और छाती का PET स्कैन या CT स्कैन किया जाता है। साथ ही, बोन मैरो टेस्ट की मदद ली जाती है। ऐसा डॉक्टर का कहना है।

किन लोगों में AITL का खतरा ज्यादा होता है?

धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट एवं हेमेटो-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सरिता रानी जायसवाल के अनुसार, "एंजियोइम्यूनोब्लास्टिक टी-सेल लिंफोमा (AITL)  आक्रामक नॉन-हॉजकिन लिंफोमा है। आसानी से समझने के लिए बता दूं कि नॉन-हॉजकिन लिंफोमा (NHL) एक प्रकार का कैंसर होता है जो लिम्फोसाइट्स यानी कि वाइट ब्लड सेल्स में शुरू होता है और शरीर के लिम्फैतिक सिस्टम को प्रभावित करता है।" यह किन लोगों में होने का खतरा रहता है, आइए डॉक्टर से जानते हैं-

  1. 60 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के लोगों में
  2. TET2 और DNMT3A जैसे जीनों में म्यूटेशन वाले लोगों में
  3. एपस्टीन-बार वायरस (EBV) संक्रमण से जुड़े कुछ मामलों में
  4. वीक इम्यून सिस्टम वाले लोगों में

डॉक्टर कहती हैं कि लगातार सूजी हुई लिम्फ नोड्स, बुखार, रात में पसीना और तेजी से वजन घटना जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत हेमेटो-ऑन्कोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए। साथ ही डॉक्टर ने सलाह दी, "AITL का सटीक कारण अभी पूरी तरह पता नहीं चला है। इसलिए जोखिम वाले लोगों को शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।"

AITL का इलाज कैसे किया जाता है?

AITL के इलाज की प्रक्रिया बीमारी के स्टेज और मरीज की हेल्थ पर निर्भर करती है। प्राथमिक उपचार के रूप में कीमोथेरेपी का उपयोग किया जाता है, जिसमें अलग-अलग दवाओं के कॉम्बिनेशन से कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।

आधुनिक चिकित्सा में टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी का भी इस्तेमाल हो रहा है, जो सामान्य कोशिकाओं को अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचाते हुए कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती हैं। कीमोथेरेपी के बाद बीमारी को दोबारा लौटने से रोकने के लिए कुछ मरीजों में स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की सलाह दी जा सकती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी विशेषज्ञ की सलाह पर आधारित है, लेकिन यह किसी चिकित्सीय परामर्श या उपचार का विकल्प नहीं है। AITL एक जटिल बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और आधुनिक उपचार तकनीकों की मदद से इसका इलाज संभव है। अगर किसी व्यक्ति में लगातार सूजी हुई ग्रंथियां या अकारण बुखार जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत कैंसर विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है। किसी भी घरेलू नुस्खे को दवाओं का विकल्प न मानें।