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स्लिप डिस्क क्या होता है? जानें कितने दिन में ठीक होती है यह समस्या

हम में से कई ऐसे लोग होंगे जिन्हें स्लिप डिस्क की समस्या होगी, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होंगे जिन्हें इस समस्या के बारे में बिल्किल पता नहीं होगा। आइए डॉक्टर से विस्तार से जानते हैं।

स्लिप डिस्क क्या होता है? जानें कितने दिन में ठीक होती है यह समस्या
VerifiedMedically Reviewed By: Dr. Gaurav Singh Bhandari

Written by Vidya Sharma |Updated : February 27, 2026 1:12 PM IST

Slip Disk Thik Hone Mai Kitna Time Lagta Hai: स्लिप डिस्क को अच्छे से समझने के लिए हमें रीढ़ की हड्डी के बारे में भी जानना होगा। देखें रीढ़ की हड्डी शरीर की मुख्य धुरी मानी जाती है। यह केवल शरीर को सीधा खड़ा नहीं रखती, बल्कि दिमाग से निकलने वाली नसों को भी सुरक्षा देती है। रीढ़ की हड्डी कई छोटी-छोटी हड्डियों से मिलकर बनती है जिन्हें वर्टिब्रा कहा जाता है। हर दो हड्डियों के बीच एक नरम कुशन जैसी संरचना होती है, जिसे डिस्क कहा जाता है।

धर्मशिला नारायणा हॉस्पिटल, दिल्ली के डायरेक्टर एवं यूनिट हेड- ऑर्थोपेडिक डॉक्टर गौरव सिंह भंडारी कहते हैं कि यह डिस्क झटकों को सहन करती है, शरीर को लचीलापन देती है और चलने, झुकने, उठने-बैठने में मदद करती है। जब यही डिस्क अपनी सामान्य जगह से खिसक जाती है या बाहर की ओर उभर जाती है, तो उसे आम भाषा में स्लिप डिस्क कहा जाता है। चिकित्सकीय भाषा में इसे हर्नियेटेड डिस्क या प्रोलैप्स्ड डिस्क कहा जाता है।’ आइए अब हम इस विषय पर थोड़ा विस्तार से जानते हैं और यह भी जानेंगे कि स्लिप डिस्क कितने दिन में ठीक होती है।

स्लिप डिस्क क्या होता है?

डॉक्टर ने स्लिप डिस्क के बारे में सरल शब्दों और गहराई के साथ समझाते हुए बताया कि 'डिस्क के दो हिस्से होते हैं। बाहर का हिस्सा मजबूत और रबर जैसा होता है, जबकि अंदर का हिस्सा जेल जैसा मुलायम होता है। जब बाहरी परत कमजोर हो जाती है या उसमें दरार आ जाती है, तो अंदर का मुलायम हिस्सा बाहर की ओर निकलने लगता है।' 

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जब यह बाहर निकला हुआ हिस्सा पास की नसों पर दबाव डालता है, तब दर्द, झनझनाहट या कमजोरी जैसे लक्षण सामने आते हैं। अधिकतर मामलों में यह समस्या कमर के निचले हिस्से में देखी जाती है, जिसे लंबर स्पाइन कहा जाता है। कई बार गर्दन में भी यह समस्या विकसित होती है।

किन कारणों से होती है स्लिप डिस्क

स्लिप डिस्क अचानक नहीं बनती। यह अक्सर धीरे-धीरे विकसित होती है। उम्र बढ़ने के साथ डिस्क में पानी की मात्रा कम होती है और वह कमजोर होने लगती है। इसे डिस्क डीजेनेरेशन कहा जाता है। नीचे स्लिप डिस्क के कारण दिए गए हैं- 

गलत तरीके से वजन उठाना

यह समस्या तब भी पैदा हो सकती है जब भारी सामान को घुटनों मोड़े बिना कमर झुकाकर उठाया जाता है। इस दौरान पूरा दबाव रीढ़ की डिस्क पर पड़ता है, जिससे वह खिसक जाती है। इससे डिस्क की बाहर की परत कमजोर हो सकती है। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि वजन उठाते समय घुटनों को मोड़ें, पीठ सीधी रखें और वजन शरीर के पास रखें, ताकि चोट का जोखिम कम हो। साथ ही कोशिश करें कि अगर ज्यादा भारी सामान नहीं उठा सकते हैं तो न उठाएं।

लंबे समय तक झुक कर बैठना

स्लिप डिस्क की समस्या तब भी हो सकती है जब आप लंबे समय तक झुक कर बैठते हैं। कई घंटों तक बैंड होकर बैठना या स्क्रीन पर आगे की ओर झुके रहना रीढ़ की नेचुरल कर्वीनेस को खराब करता है। जब आप लंबे समय तक झुक कर बैठते हैं तो डिस्क पर लगातार दबाव बढ़ता है। यह सूजन या दर्द की शुरुआत हो सकती है। बेहतर है कि आप एर्गोनॉमिक कुर्सी, सही स्क्रीन ऊंचाई और हर 30–40 मिनट में हल्का स्ट्रेच करना शुरू करें।

मोटापा भी है एक कारण

वह लोग जिनका वजन अधिक होता है, उनके शरीर का ज्यादातर भार सीधे कमर और रीढ़ की डिस्क पर पड़ता है। जिससे डिस्क कमजोर हो सकती है और स्लिप डिस्क का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए आप अपनी डाइट को हेल्दी रखें, बैलेंस रखें, रोजाना 10 या जितने कम से कम 5 हजार कदम चलें और अपने वेट को मैनेज करें।

व्यायाम की कमी

इसमें कोई दो राय नहीं है कि जब हमारी पीठ और पेट की मांसपेशियां मजबूत नहीं होती हैं, तो रीढ़ को पर्याप्त सहारा नहीं मिल पाता है। इन-एक्टिव लाइफस्टाइल से मसल्स कमजोर होकर डिस्क पर ज्यादा दबाव डालती हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि हल्की स्ट्रेचिंग, कोर स्ट्रेंथ एक्सरसाइज और नियमित फिजिकल एक्टिविटी कमर को स्थिर और सुरक्षित रखने में मदद करती है।

एक ही मुद्रा में काम करना

कभी-कभी हम अपने काम में इतना मग्न हो जाते हैं या किसी ऐसी स्थिति में फंस जाते हैं कि लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठना या खड़े रहना पड़ता है। इससे रीढ़ पर स्थिर दबाव बनाता है, जिससे डिस्क की इलास्टिसिटी कम हो सकती है और दर्द की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए आप काम के दौरान अपनी पोजीशन बदलते रहें, छोटे-छोटे ब्रेक लेते रहें और सही बॉडी अलाइनमेंट बनाए रखनें। यह कुछ बातें बैक बोन हेल्थ के लिए जरूरी है।

अचानक झटका लगने या दुर्घटना

इन सब के अलावा किसी दुर्घटना, गिरने या अचानक तेज झटके से भी रीढ़ की डिस्क पर तेज दबाव पड़ सकता है। इससे डिस्क अपनी जगह से खिसक सकती है या नसों पर दबाव बना सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय जांच जरूरी है, ताकि सही समय पर उपचार शुरू कर जटिलताओं से बचा जा सके।

यह सभी कारण इस समस्या को बढ़ावा देते हैं। कई बार अचानक झटका लगने या दुर्घटना की वजह से भी डिस्क खिसक जाती है। आज की जीवनशैली में लंबे समय तक लैपटॉप पर बैठकर काम करना और शारीरिक गतिविधि का कम होना भी एक बड़ा कारण बनता है।

इसके लक्षण कैसे पहचानें?

  1. स्लिप डिस्क का सबसे सामान्य लक्षण कमर या गर्दन में तेज दर्द होता है।
  2. कमर में स्लिप डिस्क होने पर दर्द नितंब से होते हुए पैर तक जाता है। इसे साइटिका कहा जाता है।
  3. कई लोगों को पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस होती है।
  4. गर्दन की डिस्क खिसकने पर दर्द कंधे और हाथों तक फैलता है।
  5. अगर नस पर दबाव ज्यादा होता है, तो चलने में कठिनाई या मांसपेशियों में कमजोरी भी दिखाई देती है।
  6. बहुत ही गंभीर स्थिति में पेशाब या मल पर नियंत्रण में समस्या भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता जरूरी होती है।

कितने दिन में ठीक होती है स्लिप डिस्क?

  1. अधिकतर मामलों में स्लिप डिस्क बिना सर्जरी के ठीक होती है। लगभग 80 से 90 प्रतिशत मरीजों में 4 से 6 हफ्तों के भीतर लक्षणों में सुधार दिखाई देता है।
  2. शरीर में खुद को ठीक करने की क्षमता होती है। समय के साथ बाहर निकला हुआ डिस्क का हिस्सा सूखने लगता है और सूजन कम होती है। इससे नस पर दबाव कम होता है और दर्द घटता है।
  3. कुछ मामलों में 8 से 12 हफ्तों तक भी आराम की जरूरत पड़ती है। यदि तीन महीने तक लगातार दर्द बना रहता है और दवाओं या फिजियोथेरेपी से राहत नहीं मिलती, तब सर्जरी पर विचार किया जाता है।
  4. हर मरीज की स्थिति अलग होती है। उम्र, वजन, काम की प्रकृति और डिस्क के खिसकने की मात्रा से रिकवरी की अवधि प्रभावित होती है।

इलाज के विकल्प क्या होते हैं?

  • शुरुआती इलाज में आराम, दर्द निवारक दवाएं और मांसपेशियों को ढीला करने वाली दवाएं दी जाती हैं। सूजन कम करने के लिए दवाएं दी जाती हैं।
  • फिजियोथेरेपी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विशेष एक्सरसाइज से रीढ़ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और नस पर दबाव कम होता है।
  • कुछ मामलों में एपिड्यूरल स्टेरॉयड इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे सूजन कम होती है और दर्द में राहत मिलती है।
  • यदि लगातार कमजोरी बढ़ती है, चलने में दिक्कत होती है या नस पर अत्यधिक दबाव रहता है, तब माइक्रो डिस्केक्टॉमी जैसी सर्जरी की जाती है। यह एक छोटी प्रक्रिया होती है जिसमें खिसके हुए हिस्से को हटाया जाता है।

क्या पूरी तरह ठीक हो जाती है यह समस्या

सही समय पर इलाज शुरू किया जाए तो अधिकतर लोग पूरी तरह सामान्य जीवन जीते हैं। नियमित व्यायाम और सही पोश्चर अपनाने से दोबारा समस्या होने की संभावना कम होती है। लेकिन अगर जीवनशैली में बदलाव नहीं किया जाता, तो दोबारा डिस्क खिसकने की आशंका रहती है। इसलिए इलाज के साथ जागरूकता भी जरूरी है।

किन बातों का रखें ध्यान

  1. वजन नियंत्रित रखना जरूरी है। अधिक वजन रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
  2. भारी वस्तु उठाते समय घुटनों को मोड़कर उठाना चाहिए, कमर को सीधा रखना चाहिए।
  3. लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों को हर 30 से 40 मिनट में उठकर चलना चाहिए।
  4. नियमित स्ट्रेचिंग और कोर मसल्स की एक्सरसाइज रीढ़ को सहारा देती है। योग और तैराकी भी फायदेमंद मानी जाती है।
  5. धूम्रपान से भी डिस्क की सेहत प्रभावित होती है, इसलिए इसे छोड़ना बेहतर रहता है।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

  • 30 से 50 वर्ष की आयु के लोग इस समस्या से अधिक प्रभावित होते हैं। जिनका काम भारी वजन उठाने से जुड़ा होता है या जो लंबे समय तक ड्राइविंग करते हैं, उनमें जोखिम ज्यादा होता है।
  • डेस्क जॉब करने वाले युवाओं में भी अब यह समस्या तेजी से देखी जाती है। यह केवल उम्र से जुड़ी बीमारी नहीं रह गई है।
  • खिलाड़ियों में गलत तकनीक से ट्रेनिंग करने पर भी स्लिप डिस्क की संभावना रहती है।

स्लिप डिस्क सुनने में गंभीर लगती है, लेकिन हर मामला सर्जरी तक नहीं पहुंचता। शरीर में खुद को ठीक करने की क्षमता होती है, बशर्ते सही समय पर सही कदम उठाए जाएं। दर्द को नजरअंदाज करना समझदारी नहीं होती। शुरुआती लक्षण दिखते ही जांच और सलाह लेना जरूरी होता है।

सही पोश्चर, नियमित व्यायाम और संतुलित जीवन शैली रीढ़ को लंबे समय तक स्वस्थ रखती है। स्लिप डिस्क से बचाव संभव है, और अगर यह हो भी जाए, तो अधिकतर मामलों में कुछ हफ्तों में राहत मिलती है।

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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।