
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Medically Verified By: Dr Nitin K Sethi
silent stroke
Silent Stroke: आपने स्ट्रोक के बारे में जरूर सुना होगा, लेकिन क्या आपने कभी साइलेंट स्ट्रोक के बारे में सुना है? अगर नहीं, तो आपको बता दें कि साइलेंट स्ट्रोक तब होता है, जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त का प्रवाह अचानक रुक जाता है। इस स्थिति में प्रभावित हिस्से तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है और मस्तिष्क कोशिकाएं डैमेज होने लगती हैं। दरअसल, साइलेंट स्ट्रोक में मस्तिष्क का वह हिस्सा प्रभावित होता है, जो बोलने, चलने या शरीर की अन्य गतिविधियों को नियंत्रित नहीं करता है। यानी इसका कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देता है और व्यक्ति को पता ही नहीं होता है कि उसे स्ट्रोक है। ज्यादातर मामलों में साइलेंट स्ट्रोक लैक्यूनर स्ट्रोक होते हैं, जो मस्तिष्क की छोटी रक्त वाहिकाओं में होते हैं। ऐसा रक्त का थक्का बनने, धमनियों का संकरा होने या हाई बीपी जैसी स्थितियों में हो सकता है। आइए, PSRI हॉस्पिटल के न्यूरोसाइंस के चेयरमैन और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. नितिन कुमार सेठी (Dr Nitin K Sethi, chairman of neurosciences and senior consultant at PSRI Hospital) से जानते हैं साइलेंट स्ट्रोक के बारे में-
डॉ नितिन बताते हैं कि आमतौर पर साइलेंट स्ट्रोक का पता एमआरआई या सीटी स्कैन के जरिए चलता है। अगर MRI या CT स्कैन में सफेद धब्बे (White Matter Lesions) या क्षति के निशान दिखाई दें, तो ये मस्तिष्क की कुछ कोशिकाओं के क्षतिग्रस्त होने का संकेत हो सकता है। इसी रिपोर्ट को देखकर डॉक्टर साइलेंट स्ट्रोक की पहचान करते हैं। हालांकि, कुछ लोगों में इसके हल्के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, लेकिन स्पष्ट संकेत नहीं मिल पाते हैं।
silent stroke
डॉ नितिन साइलेंट स्ट्रोक में मस्तिष्क के किसी छोटे हिस्से में रक्त का प्रवाह रुक जाता है। इससे वहां की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इसमें कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। लेकिन, धीरे-धीरे मस्तिष्क की कार्यक्षमता पर असर पड़ रहा होता है। इसकी वजह से समय के साथ-साथ याद्दाश्त कमजोर होने लगती है और सोचने-समझने की क्षमता भी घटने लगती है। इतना ही नहीं, साइलेंट स्ट्रोक शरीर का संतुलन बिगाड़ सकता है और चलने-फिरने में परेशान पैदा कर सकता है। अगर साइलेंट स्ट्रोक बार-बार होता है, तो इससे डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ जाता है।
डॉ नितिन के अनुसार, कुछ लोगों में साइलेंट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा हो सकता है। जैसे-
National Library of Medicine के अनुसार, बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं। इस उम्र के बाद साइलेंट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। इसमें मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कुछ समय के लिए बाधित हो जाता है, लेकिन सामान्य स्ट्रोक की तरह स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। यही वजह है कि ज्यादातर लोगों को स्ट्रोक के बारे में पता ही नहीं चल पाता है। जब किसी मरीज का एमआरआई या ब्रेन स्कैन कराया जाता है, तो इस स्थिति में साइलेंट स्ट्रोक का पता चल सकता है। अगर लंबे समय तक साइलेंट स्ट्रोक रहता है, तो यह बाद में डिमेंशिया और डिप्रेशन का कारण बन सकता है।
साइलेंट स्ट्रोक से बचने के लिए आपको कुछ अच्छी और स्वस्थ आदतें जरूर अपनानी चाहिए। जैसे-
Disclaimer: साइलेंट स्ट्रोक जानलेवा हो सकता है। इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। लेकिन, एमआरआई और सीटी स्कैन की मदद से इसका पता लगाया जा सकता है। इसलिए अगर आपको इससे जुड़ा कोई भी लक्षण महसूस हो तो डॉक्टर से तुरंत मिलें। इससे बचाव के लिए बीपी और शुगर को कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी है।